राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही पर आ गया है. उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती, नकदी के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आने की बात कही गई है. इसी बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नैतिक आधार पर इस्तीफा देने से मामला और गर्मा गया है. कारण, सवाल उठ रहे हैं कि क्या नैतिकता बहुत देर से जागी? और क्या FIR में आगे चंपत राय का नाम होगा?
दरअसल, इस मामले में पुलिस ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया है. इन सभी पर मंदिर के चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने के दौरान कथित गबन और हेराफेरी के आरोप हैं. अदालत ने सभी आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी भी हो चुकी है.
FIR में उक्त आठों आरोपियों को नामजद दिया गया है. इसके अलावा अज्ञात पर भी केस दर्ज किया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि ये अज्ञात कौन है और आगे की जांच के बाद किसका नाम एफआईआर में जोड़ा जाएगा. क्या आगे राम मंदिर ट्रस्ट के गोपाल राव का अगला नाम होगा? क्या वो नाम राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और मंदिर में रामलला की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा के समय यजमान बनने वाले डॉक्टर अनिल मिश्रा का होगा? या क्या अब FIR में अगला नाम राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का होगा?
दरअसल, एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट में जहां भक्तों की तरफ से प्रभु राम को अर्पित भेंट, चढ़ावा की गिनती होती थी, वहां कैश की गिनती, उसके संचालन और प्रबंधन सबसे बडी खामियां पाई गई हैं. एसआईटी ने दावा है कि अपनी रिपोर्ट में इस पर सवाल तक उठाया है. यही वजह है कि पूछा जाने लगा कि क्या चंपत राय के खिलाफ भी FIR होगी. जिनके नेतृत्व में सारा प्रबंधन राम मंदिर का संभाला जाता रहा?
चंपत राय पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
ये बात तो सच है कि कार्रवाई शुरु हुई है. आठ लोग पकड़े गए. सोमवार तक जेल भेज दिए गए. लेकिन सवाल है कि आगे क्या इन आरोपियों को रिमांड में लेकर पूछताछ होगी और तब क्या और बड़े नाम भी सामने होंगे और क्या जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, चंपत राय के लिए मुश्किल बढ़ेगी? कारण, अगर चंपत राय का इस्तीफा नैतिकता के नाम पर हुआ है तो क्यों ना ये माना जाए कि नैतिकता बहुत देर बाद जागी है. क्योंकि नैतिकता चंपत राय की तब जागी है. जब केवल तीन महीने में 42 दिन के भीतर 70 बार चढ़ावे की चोरी का सीसीटीवी वीडियो SIT ने देख लिया है.
चंपत राय की नैतिकता तब जागी है, जब SIT को पता चला है कि एसओपी की धज्जियां उड़ाकर चढावे की गिनती होती रही. चंपत राय की नैतिकता तब जाकर जागी है जब SIT को दावा है कि ये भी पता चल चुका है कि 2023 से ही गड़बड़ी चलती रही. चंपत राय की नैतिकता तब जाकर जागी है जब आरोपियों के पास से चढ़ावे की चोरी का पैसा कैश बरामद हुआ है. तो क्या चंपत राय की नैतिकता जागने में देरी नहीं हुई है?
आजतक को एसआईटी के सूत्र ये भी बताते हैं कि आज से नहीं बल्कि पहले से ही आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियां दिखती रही हैं. जांच में ये तक सामने आया है कि पर्याप्त सीसीटीवी कवरेज नहीं रखी गई थी, जिससे चढ़ावे पर निगरानी की व्यवस्था प्रभावित हुई है. एसआईटी आगे इन सब मामलों में जांच को आगे बढ़ाएगी और तब क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा जैसे बडे पदधारियों का भी नाम शामिल होगा? चंपत राय को लेकर सवाल इसलिए भी है क्योंकि ये ट्रस्ट के महासचिव ही हैं, जिन्होंने सबसे पहले आरोप लगने पर कहा कि कुछ भी उल्लेखनीय नहीं मिला.
लेकिन जब एसआईटी ने अयोध्या में शुरुआती जांच की और जांच के दौरान दावा है कि 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक यानी 42 दिन के भीतर 70 मौके ऐसे दिखे जब चढ़ावा चोरी का वीडियो CCTV में नजर आया, तो सवाल उठा कि ये चोरी किस स्पीड से राम मंदिर में होती रही होगी? जहां चंपत राय कहते रहे कि कुछ उल्लेखनीय नहीं मिला है, वहां एसआईटी को कैसे 70 बार चोरी तीन महीने में दिख गई?
हाल में ही ये दावा किया गया कि राम मंदिर में श्रद्धालु कम नहीं हुए लेकिन चढ़ावा कम हआ है. तो क्या ये विश्वास का संकट है? वो संकट जिसे दूर करने की कोशिश में मुख्यमंत्री कहते हैं कि दूध का दूध पानी का पानी होकर रहेगा. लेकिन सवाल है कि जब तक बड़े चेहरों तक जांच नहीं पहुंचेगी, तब तक कैसे मान लिया जाए कि सबकुछ साफ होगा और विश्वास वापस लौटेगा?
2024 में जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होती है. उसके बाद श्रद्धालु सतयुग आने तक की बातें करने लगे. यही भरोसा करोड़ों हिंदुओं का है. जो प्रभु श्री राम में आस्था रखते हैं. उसी आस्था को चोट उन लोगों ने पहुंचाई है, जिन्हें राम के मंदिर की चौकीदारी का जिम्मा दिया गया. उनमें से आठ लोग तो पकड़े जाते हैं. लेकिन ये सब लोग क्या अपने दम पर इतना बड़ा विश्वासघात कर सकते हैं? अब आगे इन्हीं लोगों के दिए गए बयान, सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी, तो वो जांच क्या चंपत राय तक पहुंचेगी?
जवाबदेही के कटघरे में चंपत राय
मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के बाद से भले ही ट्रस्ट कटघरे में हो लेकिन सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट को काफी पहले ही चढ़ावा चोरी की आशंका हो गई थी साल 2024-25 में ट्रस्ट और स्टेट बैंक के अधिकारियों के बीच चढ़ावा गणना के लिए जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया गया, उसका भी पालन नहीं किया गया. पकड़े गए अविनाश पांडे के सीसीटीवी फुटेज देखे गए और उसके तरफ से जो रकम चोरी की जा रही थी. इस तारीख में बैंक में रकम जमा भी कराई गई है. राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने पूछताछ के दौरान मिलान कराया तो पुष्टि हुई की चढ़ावा चोरी से जमा की गई रकम का एक हिस्सा अविनाश अपने बैंक खाते में जमा कर रहा था.
जो श्रद्धालु दानपेटी में जेवरात दान करते थे, उसको भी ये लोग चोरी कर लेते. बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप राम लला के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे. सबसे अहम बात ये है कि चोरी पहले करते बाद में नोटों की गिनती या दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा-पढ़ी होती थी. इस मामले में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र ऐसे आरोपी हैं जो लगातार राम मंदिर ट्रस्ट के उस कमरे में आते जाते थे, जहां दान पेटियां खुलती थीं.
तो अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी नहीं डकैती हुई? क्योंकि सिर्फ पैसा के गबन नहीं हुआ, जेवरात भी चुराए गए, जो बताता है कि मंदिर में चढ़ावे को गिनने की इस पूरी प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई. अब सवाल ये है कि मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी रोकने के लिए ट्रस्ट ने कुछ क्यों नहीं किया? क्यों शीशे की पारदर्शी दीवारों में चढ़ावे को गिनने की व्यवस्था नहीं की गई? सवाल ये भी है कि जब सब कुछ डिजिटल हो गया है तो फिर मंदिर में ऑन लाइन डिजिटल ट्रांजेक्शन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई. अगर ऐसा किया गया होता तो फिर चढ़ावे के नाम पर इतनी बड़ी लूट नहीं होती.
हाई सिक्योरिटी के बाद भी आखिर कैसे हुई चढ़ावे की चोरी?
मंदिर को किसी भी हमले से बचाने के लिए यूपी ATS, RAF SSF, CRPF, PAC और स्थानीय पुलिस की संयुक्त तैनाती भी अयोध्या में रहती है. राम मंदिर की बाहरी सुरक्षा को तो पुख्ता कर दिया गया लेकिन मंदिर के अंदर चढ़ावा गिनने वालों ने बड़ा खेल कर दिया. अब सवाल ये है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कैसे हुई? इसे लेकर जानकारी ये है कि मई महीने के आखिरी सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो सबसे चोरी का शक पैदा हुआ. दरअसल, एक दान पेटी में 7 से 8 लाख रुपए एक बार में जमा होते थे लेकिन कुछ सप्ताह के क्रम में 500 की गड्डी में कमी देखी गई. इस तरह चढ़ावा गिनने वाले सीधे 500 के नोट पार कर रहे थे.
दावा है कि चढ़ावे में हेरफेर करने वाले कर्मचारी आगे पीछे छोटे नोट गड्डी में लगाते थे लेकिन बीच में 500 के नोट रहते थे. इस तरह चढ़ाने में लूट का ये खेल काफी समय से चल रहा था. चढ़ावे में हेराफेरी का शक गहराया तो नोट गिनने वाले कमरे ने कुछ छिपे कैमरे लगवाए गए. इन हिडन कैमरे की एक सप्ताह की फुटेज देखी गई तो पता चला नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते और दूसरा साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में नोट चोरी कर कपड़ों में छुपा लेते, लेकिन हिडन कैमरे में उनकी ये चोरी पकड़ी गई.
सबसे बड़ी बात ये है कि ये चोरी एक और तरह से हो रही थी. नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते. जब बैंक के पास रकम गिनने की बारी आती तो हर गड्डी के एक एक नोट को गिनने के बजाए सिर्फ गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता, तब ये रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक में ले जाई जाती. उस दौरान हर गड्डी में जो एक्स्ट्रा नोट लगाए गए थे, वो निकाल दिए जाते. इस तरह वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता और रकम चोरी भी हो रही थी. जबकि नोट की गड्डियों में 100 की जगह ज्यादा नोट लगाए जा रहे थे.
जैसे चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव व्यवस्थापक था तो टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगा दिया था. ऐसे ही सालों से कम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा को लगवा दिया था. आजतक की टीम ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार अनुकल्प मिश्रा की चाची नेहा मिश्रा से बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि राम मंदिर में काम करने के बाद से अनुकल्प और उसके परिवार की संपत्ति बढ़ गई थी. तो चाहे अनुकल्प हो या पिर लवकुश मिश्रा दोनों की आर्थिक सेहद मंदिर में काम करने के बाद से सुधरी.
सवाल ये है कि हजारों की सैलरी में ये कैसे हुआ? बड़ी बात ये भी है कि अनुकल्प मिश्रा तो लवकुश मिश्रा का जीजा है. वहीं रमाशंकर मिश्रा लवकुश के पिता हैं और अनुकल्प के ससुर हैं. इस तरह राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में जीजा-साला, ससुर-दामाद का कनेक्शन जुड़ता है. यही नहीं अनुकल्प मिश्रा की ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी रिश्तेदारी बताई जाती है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि भाई भतीजावाद ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरों की एक ऐसी टीम तैयार कर दी, जिसने करोड़ों की आस्था को चोट पहुंचाने का काम किया.
आजतक ब्यूरो