सीओ जियाउल हक हत्याकांड: राजा भैया को बड़ी राहत, CBI कोर्ट ने खारिज की आगे की कार्रवाई

RAJA BHAIYA CASE: प्रतापगढ़ के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को राहत मिली है. दोबारा जांच के बाद CBI की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया और मामले में आगे की कार्रवाई की मांग खारिज कर दी.

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साल 2013 में हुआ था सीओ जियाउल हक हत्याकांड.(File Photo) साल 2013 में हुआ था सीओ जियाउल हक हत्याकांड.(File Photo)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:51 PM IST

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा में साल 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकांड का मामला एक बार फिर चर्चा में है. मामले में तत्कालीन कुंडा विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका को लेकर लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चली.

सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराई गई FIR में राजा भैया समेत कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था. CBI की शुरुआती जांच के बाद राजा भैया और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई थी.

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इसके बाद परवीन आजाद ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजा भैया की भूमिका की दोबारा जांच की गई. 2023 में दोबारा जांच के बाद CBI ने फिर फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी.

अब CBI कोर्ट ने इस फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई की मांग खारिज कर दी है. इससे राजा भैया के खिलाफ इस मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लगा है. 

2 मार्च 2013 को क्या हुआ था?

2 मार्च 2013 को कुंडा के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद गांव में तनाव बढ़ गया और नन्हे यादव के समर्थक बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए.

इसी दौरान पुलिस टीम मौके पर पहुंची. हालात को काबू करने के दौरान नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव की भी हत्या हो गई. इसके बाद भीड़ और उग्र हो गई और पुलिस टीम पर हमला हुआ.

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इसी दौरान कुंडा के तत्कालीन सीओ जियाउल हक भीड़ के बीच फंस गए. बाद में उनका शव गांव में मिला. उनकी हत्या के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था.

राजा भैया को देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा

जियाउल हक की हत्या के बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल उठे थे. उस समय राजा भैया को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई.

10 आरोपियों को हुई उम्रकैद

इस मामले में CBI की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इनमें फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, राम लखन गौतम, छोटेलाल यादव, राम आसरे, पन्नालाल पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले पटेल शामिल थे. 

वहीं, राजा भैया को इस मामले में CBI की जांच के बाद क्लीन चिट मिल चुकी थी. अब दोबारा जांच के बाद दाखिल फाइनल रिपोर्ट को अदालत द्वारा स्वीकार किए जाने से उनके खिलाफ इस मामले में आगे की कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है.

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