प्रयागराज की सड़कों पर चल रही नाव... बाढ़ से हाहाकार, घर-दुकान डूबे, छतों पर राहत का इंतजार कर रहे लोग, Video

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के उफान ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते राजापुर के गांगानगर, दारागंज, छोटा बघाड़ा, करैली और बलुआ घाट जैसे कई रिहायशी इलाके जलमग्न हो चुके हैं. जिन गलियों में कभी लोग पैदल चलते थे और गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां अब नावें चल रही हैं. कई परिवार छतों पर शरण लिए हुए हैं.

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प्रयागराज में गलियों में भी चल रही नाव. प्रयागराज में गलियों में भी चल रही नाव.

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 06 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

यूपी के प्रयागराज में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है. लोगों के घर पानी में डूबे हैं. गलियां डूबी हैं और चार पहिया वाहन और लोगों की दुकानें भी डूबी हुई हैं. हर तरफ गंदगी हैं. लोग छतों पर खड़े होकर राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं. ये हालात राजापुर के गंगानगर इलाके में हैं, यहां बाढ़ तबाही मचा रही है.

राजापुर के गंगानगर की ज्यादातर गलियां जलमग्न हैं. लोग इसी बाढ़ के पानी में निकल रहे हैं. हालांकि प्रशाशन ने NDRF, SDRF के अलावा लोकल नावें भी लगवाई हैं, जो लोगों को बाढ़ से बाहर निकालने में मदद कर रही हैं. कुछ ऐसे भी हैं, जो घुटने और कमर तक पानी में घुसकर निकल रहे हैं. छतों पर फंसे लोग पीने के पानी की मांग कर रहे हैं. जिन सड़कों पर गाड़ियां दौड़ा करती थीं, आज उन सड़कों पर सिर्फ नाव ही एक सहारा है.

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यहां देखें Video

हालांकि पानी बढ़ने की स्पीड कम हुई है, फिर भी दोनों नदियां खतरे के निशान से 1 मीटर ऊपर बह रही हैं. दारागंज, छोटा बघाड़ा, राजापुर, करैली, बलुआ घाट, के अलावा कई ऐसे रिहायशी इलाके हैं, जहां बाढ़ ने तबाही मचा रखी. पानी में वाहन डूबे हैं. सामान डूबा है. लोग दूसरी मंजिल पर रहने के लिए मजबूर हैं. न बिजली है, न पानी... खाने-पीने की भी परेशानी हो रही है.

जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत शिविर में लोगों के रहने की व्यवस्था की है, जहां लोगों को समय-समय पर खाना और नाश्ता दिया जा रहा है. कई लोग ऐसे हैं, जो अपने घरों को छोड़कर नहीं जा रहे हैं. इनको डर है कि कहीं उनके घरों में चोरी न हो जाए.

प्रयागराज के छोटा बघाड़ा इलाके में भी हालात नाजुक

प्रयागराज के छोटा बघाड़ा में हालत बहुत नाजुक है. यह शहरी इलाका है और यहां के घर डूब गए हैं. पानी इतना है कि गेट का केवल ऊपरी भाग दिखाई पड़ रहा है. विधायकों के लगाए गए शिलापट्ट भी पानी में डूबे हुए हैं. टेंपो, बाइक, ठेले सब पानी में समा गए हैं.

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एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू में जुटी है. आजतक के साथ मौजूद एनडीआरएफ के जवानों ने दो मासूम बच्चे, जो छत पर मदद का इंतजार कर रहे थे, उनकी मदद की और उन्हें वहां से बचाया. 11 साल के विशाल और अंकित ने कहा कि कबूतर को दाना देने के लिए वे लोग किसी की छत पर गए थे, लेकिन पानी बढ़ गया और बारिश होने लगी, जिसकी वजह से वे वहीं फंस गए थे. हर तरफ पानी देखकर डर लग रहा था. घर की याद आ रही थी. NDRF ने इन बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.

छोटा बघाड़ा में कई परिवार ऐसे भी दिखे जो एनडीआरएफ के आने के बाद भी सुरक्षित स्थानों पर जाने को तैयार नहीं थे. उन्हें लग रहा था कि अगर वे घर छोड़कर चले जाएंगे तो यहां चोरी हो जाएगी. उनका कहना था कि पहले यहां इस तरह के मामले हो चुके हैं. ऐसे में वे अपने परिवार को सुरक्षित कर रहे हैं. बाहर निकल रहे हैं. एक व्यक्ति घर की रखवाली कर रहा है, जिससे घर सुरक्षित रहे.

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