Divya Mittal के राजनीति में आने पर बोले राजभर- 'IAS बनना आसान, पर विधायक बनना मुश्किल'

13 साल की नौकरी छोड़ चुकीं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने किसी दल में शामिल हुए बिना आम जनता के साथ नया मंच बनाकर राजनीति करने का ऐलान किया है. वे शिक्षा, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर हिसाब मांगना चाहती हैं. वहीं यूपी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि विधायक बनना आसान नहीं है.

Advertisement
राजभर का दिव्या मित्तल पर बयान (Photo- Screengrab) राजभर का दिव्या मित्तल पर बयान (Photo- Screengrab)

आशीष श्रीवास्तव / अंकित मिश्रा

  • लखनऊ ,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देकर पॉलिटिक्स जॉइन करने का ऐलान करनी वालीं दिव्या मित्तल के फैसले पर यूपी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि आईएएस बनना आसान है, लेकिन चुनाव लड़ना और विधायक बनना मुश्किल है. राजभर ने कहा कि उनके पास खूब पैसा होगा इसलिए चुनाव लड़ रही हैं पर विधायक बनना आसान नहीं है. 

Advertisement

ओमप्रकाश राजभर ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि 'इंडिया' ब्लॉक में सब दगे कारतूस हैं. 150 क्या... कांग्रेस और सपा 403 सीट पर लड़ लें तो भी कुछ नहीं होगा. उन्होंने सीट शेयरिंग को लेकर जारी तनातनी पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधा. साथ ही एनडीए की जीत का दावा किया.   

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में IAS अधिकारी के पद से इस्तीफा देकर चर्चा में आईं पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल अब अपनी जिंदगी की नई पारी शुरू करने जा रही हैं. 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद उन्होंने अगस्त में अपनी इच्छा से IAS की नौकरी छोड़ दी थी. उनके इस्तीफे के बाद से ही इस बात को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं कि आखिर अब दिव्या मित्तल क्या करेंगी? कोई उनके राजनीति में आने की संभावना जता रहा था, तो कोई कोचिंग पढ़ाने या विदेश लौटने की बात कह रहा था. यहां तक कि उनके घर पर रहकर बच्चों की देखभाल करने को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे. हालांकि, अब इन तमाम अटकलों के बीच दिव्या मित्तल ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी आगे की योजनाओं के बारे में जानकारी दी है. 

Advertisement

दिव्या मित्तल ने कहा कि IAS पद से इस्तीफा देने के बाद उनके मन में आगे की योजनाओं को लेकर कई सवाल थे. उन्होंने कुछ दिनों तक इन सवालों का जवाब नहीं दिया, क्योंकि इसके लिए उन्हें एक बड़ा फैसला लेने और हौसला जुटाने की जरूरत थी. अब उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय सार्वजनिक करते हुए कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या पहुंचने के बाद भी नहीं सुनी जाती. दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सामने आए अनुभवों का जिक्र करते हुए शिक्षा, सड़क, पुल, भ्रष्टाचार और आम लोगों को न्याय मिलने में होने वाली देरी जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने लहुरियादह की पहाड़ी का एक किस्सा साझा किया, जहां निरीक्षण के दौरान एक महिला ने उनसे अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद भी पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की थी.

दिव्या मित्तल के मुताबिक, उस समय महिला के घर में पानी की सुविधा भी नहीं थी, लेकिन उसने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए गांव में आगे की कक्षाओं के लिए स्कूल की मांग की. उन्होंने बताया कि नियमों के तहत स्कूल को स्वीकृति भी दी गई, लेकिन तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो सका. दिव्या मित्तल ने सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और स्वीकृति मौजूद थे, तो स्कूल का निर्माण क्यों नहीं हुआ? उन्होंने कहा कि इसके पीछे केवल इरादे की कमी थी और उन्हें ऐसे अधूरे स्कूलों का हिसाब चाहिए.

Advertisement

पूर्व IAS अधिकारी ने राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहते हुए एक भूमिहीन व्यक्ति से जुड़ा अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद उस पर कब्जा नहीं मिलने की शिकायत लेकर उनके पास पहुंचा था. जांच में संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और रिपोर्ट तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. हालांकि, व्यक्ति को जमीन पर कब्जा दिलाने के मामले में कथित तौर पर ऊपर से रोक लगाए जाने की बात सामने आई.

दिव्या मित्तल ने सवाल किया कि आखिर यह ‘ऊपर’ कौन है, जब संविधान के अनुसार जनता ही सर्वोपरि है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को उसका अधिकार देना किसी की कृपा नहीं, बल्कि उसका हक है. उन्होंने ऐसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन लोगों के साथ हुए अन्याय का हिसाब मांगना चाहती हैं, जिन्हें अपने ही अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं.

दिव्या मित्तल ने ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पुलों की कमी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क नहीं है और नदियों पर पुल नहीं होने के कारण बरसात में गांवों का संपर्क कट जाता है. वहीं, खराब सड़कों और गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर भी उन्होंने सवाल उठाए.
उन्होंने युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और AI के बढ़ते इस्तेमाल का मुद्दा उठाया. दिव्या मित्तल ने कहा कि आज युवा सालों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनकी मेहनत प्रभावित होती है. 

Advertisement

वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार के भविष्य को लेकर भी युवाओं और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं. उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा और दूरगामी सोच की जरूरत है.

दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति में इरादे, न्याय, संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को प्राथमिकता देना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति करना चाहती हैं, जिसमें लोगों को केवल वोट के आंकड़ों के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और उनका समाधान किया जाए. उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़कर राजनीति नहीं करेंगी, बल्कि आम लोगों के साथ मिलकर एक नया मंच तैयार करेंगी. दिव्या मित्तल ने बताया कि उनके इस्तीफे के बाद जहां कई लोगों ने उनका समर्थन किया, वहीं सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक राजनीतिक मुलाकात को लेकर कथित तौर पर गलत जानकारी भी साझा की गई. उन्होंने इसे एक महिला को राजनीति में आने से डराने की कोशिश बताया और कहा कि वह ऐसी बातों से डरने वाली नहीं हैं.

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद से ही उनके भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं. हालांकि, उन्होंने अपने फैसले को लेकर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि IAS की नौकरी छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया था. उन्होंने कहा था कि IAS की नौकरी उनके जीवन का केवल एक चैप्टर है, न कि पूरी जिंदगी. 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद उन्होंने अपनी इच्छा से यह कदम उठाया. अब सोशल मीडिया पर अपनी नई पारी को लेकर जानकारी साझा कर उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर चल रही चर्चाओं को विराम दिया है.

Advertisement

दिव्या मित्तल और उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. दोनों ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद विदेश में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया था. दिव्या मित्तल ने जहां लंदन में जेपी मॉर्गन में नौकरी की, वहीं उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों सिटी ग्रुप में कार्यरत थे. विदेश में नौकरी करने के बाद दोनों ने भारत लौटकर सिविल सेवा में जाने का फैसला किया.

दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारियों में शामिल रही हैं. उन्होंने अपने करीब 13 साल के प्रशासनिक कार्यकाल में मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली. इन जिलों में अपनी सख्त और संवेदनशील कार्यशैली के चलते वह लगातार सुर्खियों में रहीं. प्रशासनिक फैसलों और जनता से जुड़े मुद्दों पर उनके काम करने के तरीके ने उन्हें अलग पहचान दिलाई.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »