कांवड़ यात्रा के दौरान शुक्रवार को मुजफ्फरनगर जनपद में एक ऐसी अनोखी कांवड़ पहुंची, जिसने हर किसी को सतयुग के श्रवण कुमार की याद दिला दी. इस कांवड़ को लेकर चल रहे शिवभक्त ने एक पलड़े में अपनी बुजुर्ग मां और दूसरे पलड़े में अपनी बुजुर्ग चाची को बैठाया है. दोनों को कंधों पर लेकर वह अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर रहे हैं.
मुजफ्फरनगर जनपद के दूल्हेरा गांव निवासी यशवीर ने 24 जुलाई को हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल उठाया था. इसके बाद उन्होंने अपनी कांवड़ के एक पलड़े में 70 वर्षीय मां कृष्णा देवी और दूसरे पलड़े में 65 वर्षीय चाची फूलो को बैठाकर यात्रा शुरू की. मां और चाची के वजन सहित करीब 115 किलो की कांवड़ लेकर यशवीर अपने परिवार के अन्य लोगों के साथ पैदल चल रहे हैं.
कांवड़ में अपनी मां और चाची को बैठाकर यात्रा करने के बारे में यशवीर ने बताया कि इसके जरिए वह समाज के उन लोगों को संदेश देना चाहते हैं, जो अपने माता-पिता को परेशान करते हैं. उनका कहना है कि सभी लोगों को अपने माता-पिता से प्रेम करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए. यशवीर ने बताया कि वह हर की पौड़ी से मुजफ्फरनगर के रास्ते शाहपुर के पास स्थित अपने गांव दूल्हेरा पहुंचेंगे. गांव के शिवालय में शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वह गांव के शिवालय में ही जल चढ़ा चुके हैं.
आठ साल पहले भी मां को लेकर आए थे यशवीर
यशवीर ने बताया कि इस यात्रा के पीछे उनकी कोई खास मनोकामना नहीं है, बल्कि उनकी अपनी इच्छा है. वह करीब आठ साल पहले भी इसी तरह कांवड़ यात्रा कर चुके हैं. इस बार भी मां और चाची को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करने से उन्हें काफी अच्छा लग रहा है और उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हो रही है.
उन्होंने कहा कि 'एक तरफ हमारी मम्मी हैं और दूसरी तरफ हमारी चाची हैं. हर की पौड़ी से मुजफ्फरनगर के रास्ते शाहपुर के पास अपने गांव दूल्हेरा में जल चढ़ाएंगे. पहले भी गांव में ही जल चढ़ाया था. कोई खास मनोकामना नहीं है, बस हमारी इच्छा है. करीब आठ साल पहले भी मैं इस तरह कांवड़ लेकर आया था.'
अपने माता-पिता की सेवा करो
यशवीर ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह वह श्रवण कुमार की तरह अपनी मां और चाची को कांवड़ में लेकर यात्रा कर रहे हैं, उसी तरह लोगों को भी अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग अपने माता-पिता को बहुत परेशान करते हैं. ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि माता-पिता की सेवा करना उनका कर्तव्य है.
उन्होंने कहा, "हम यही संदेश देना चाहते हैं कि अपने माता-पिता की सेवा करो और मन लगाकर उनकी देखभाल करो. जैसे हम श्रवण कुमार की तरह कांवड़ लेकर आए हैं, वैसे ही जो लोग अपने माता-पिता को परेशान करते हैं, उन पर भी इसका प्रभाव पड़े और वे अपने माता-पिता की सेवा करें. हम यही कहना चाहते हैं कि उन्हें परेशान न करें." यशवीर ने कांवड़ यात्रा के दौरान की गई व्यवस्थाओं की भी तारीफ की. उन्होंने बताया कि रास्ते में उन्हें दूसरे शिवभक्तों का भी काफी सहयोग मिल रहा है. उन्होंने कहा कि व्यवस्था अच्छी है और दूसरे कांवड़िये भी उन्हें पूरा सपोर्ट कर रहे हैं.
मां कृष्णा देवी ने बेटे को दिया आशीर्वाद
यशवीर की मां कृष्णा देवी ने भी बेटे के साथ कांवड़ यात्रा करने पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि सभी लोगों का घर-परिवार ठीक से चले, सभी भोले भक्तों का सम्मान हो और कोई भी अपने माता-पिता को परेशान न करे.
कृष्णा देवी ने कहा कि बेटे के साथ इस तरह यात्रा करके उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है. उन्होंने भगवान भोलेनाथ से बेटे की लंबी उम्र की कामना की. उन्होंने कहा कि 'हम यही चाहते हैं कि सबका घर-परिवार ठीक चले, सभी भोले भक्तों का सम्मान हो और कोई माता-पिता को तंग न करे. हमें बहुत अच्छा लग रहा है. भोले बाबा हमारे बेटे की उम्र बढ़ाएं. वह हमें इतनी दूर से अपने कंधों पर उठाकर लेकर आया है. भगवान उसकी उम्र बढ़ाएं और उसका घर-परिवार हमेशा अच्छा रहे.'
संदीप सैनी