46 पिंजरे लगे, 26 तेंदुए पकड़े गए... फिर भी मुरादाबाद में दहशत में लोग, तेंदुओं का खौफ क्यों नहीं जा रहा?

गन्ने के खेत के पास से गुजरते हुए मुरादाबाद के कई गांवों में अब लोग सिर्फ रास्ता नहीं देखते, खेत भी देखते हैं. पता नहीं कब झाड़ियों के पीछे से तेंदुआ निकल आए. वन विभाग अब तक 26 तेंदुओं को पकड़ चुका है. 46 पिंजरे लगे हैं, ड्रोन उड़ रहे हैं और कैमरा ट्रैप लगातार नजर रख रहे हैं. फिर भी करीब 36 गांवों में डर बना हुआ है. क्योंकि इसी इलाके में तेंदुए के हमलों में चार लोगों की जान जा चुकी है.

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अब भी सामने आ रही 36 गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी की खबर. (Photo: ITG) अब भी सामने आ रही 36 गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी की खबर. (Photo: ITG)

जगत गौतम

  • मुरादाबाद,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:31 PM IST

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा और कांठ इलाके में इन दिनों अगर कोई कहे कि उसने तेंदुआ देखा है, तो लोग शायद ही इसे अफवाह मानें. क्योंकि यहां तेंदुए दिखना अब कोई नई बात नहीं रही. कभी गन्ने के खेत में. कभी आबादी के पास. कभी किसी नलकूप की छत पर. और कभी सड़क किनारे. वन विभाग भी मानो एक लंबी लड़ाई में उतर चुका है. 3 अगस्त से रेस्क्यू अभियान चल रहा है. एक के बाद एक तेंदुए पकड़े जा रहे हैं.

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अब 8 अक्टूबर को बहापुर बलिया गांव में 26वां तेंदुआ भी पिंजरे में कैद हो गया. इस कहानी में सबसे डरावनी बात यह है कि बहापुर बलिया वही गांव है, जहां तेंदुए के हमलों में तीन लोगों की जान जा चुकी है. खेतों, गन्ने की फसल और आबादी के आसपास तेंदुए देखे जाने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है. कई गांवों में लोग खेतों की तरफ जाने से पहले कई बार सोच रहे हैं. दहशत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.

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3 अगस्त से चल रहे रेस्क्यू अभियान में अब तक 26 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है. 8 अक्टूबर को ठाकुरद्वारा के बहापुर बलिया गांव में 26वां तेंदुआ वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ. 

19 अगस्त... खेत में काम कर रहीं विरमो देवी पर तेंदुए ने हमला किया. उनकी मौत हो गई.
25 अगस्त... इसी गांव में मिथलेश देवी पर हमला हुआ. उनकी भी जान चली गई.
29 अगस्त... घर के पास सो रहे जगराज सैनी को तेंदुआ उठा ले गया. बाद में उनका शव गन्ने के खेत में मिला.

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तीन मौतें एक ही गांव में... इससे पहले 3 अगस्त को लालापुर पीपलसाना में संतोष देवी की तेंदुए के हमले में मौत हुई थी. यानी मुरादाबाद में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है. अब जरा उस ऑपरेशन को समझिए, जिसके तहत 26 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं. 

  • 3 अगस्त को अभियान शुरू हुआ. धीरे-धीरे तेंदुओं की संख्या सामने आने लगी.
  • 4 सितंबर तक 12 तेंदुए पकड़े जा चुके थे.
  • 17 सितंबर तक संख्या 16 हो गई.
  • 18 सितंबर को बहापुर बलिया से 17वां तेंदुआ पकड़ा गया.
  • 24 सितंबर को कांठ के कासमपुर-गढ़ी से एक मादा तेंदुआ रेस्क्यू की गई.
  • 26 सितंबर को भरतपुर से एक और तेंदुआ पकड़ा गया.
  • 29 सितंबर को समदगढ़ उर्फ सिकंदराबाद से तेंदुआ पकड़ा गया.
  • कुछ दिन पहले इसी इलाके में एक साथ तीन तेंदुए नलकूप की छत पर दिखाई दिए थे.
  • फिर 2 अक्टूबर को ठाकुरद्वारा के आलमगीरपुर से 22वां तेंदुआ पकड़ा गया.
  • अक्टूबर की शुरुआत में 23वां तेंदुआ रेस्क्यू हुआ.
  • 4 अक्टूबर को 24वां.
  • 6 अक्टूबर को 25वां.
  • और अब 8 अक्टूबर को 26वां.

कुल 26 तेंदुए पकड़े गए... लेकिन क्या इसका मतलब है कि खतरा खत्म? नहीं... क्योंकि वन विभाग के मुताबिक, ठाकुरद्वारा और कांठ के करीब 36 गांवों से अभी भी तेंदुओं की मौजूदगी की खबरें आती रहती हैं. इसीलिए 46 पिंजरे लगाए गए हैं. लेकिन वन विभाग सिर्फ पिंजरे के भरोसे नहीं बैठा है.

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कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, ताकि पता चले कि तेंदुआ किस रास्ते से आ-जा रहा है. ड्रोन से गन्ने के खेतों पर नजर रखी जा रही है. रात में थर्मल इमेजिंग ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं, ताकि अंधेरे में भी तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाया जा सके. जरूरत पड़ने पर विशेष रेस्क्यू टीम और ट्रैंकुलाइजिंग एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है.

यह भी पढ़ें: 22वां तेंदुआ पिंजरे में कैद, उसी रात दूसरे इलाके में फिर दिखी मौजूदगी... मुरादाबाद के गांवों में मंडरा रहा खतरा!

यानी तरीका यह है कि पहले लोकेशन पता करो. फिर तेंदुए की आवाजाही समझो. उसके रास्ते में पिंजरा लगाओ. और कोशिश करो कि उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया जाए. इस दौरान तीन तेंदुओं के शव भी सड़क किनारे मिले. आशंका जताई गई कि उनकी मौत अज्ञात वाहनों की टक्कर से हुई. 

कहानी का सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है. 26 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं. 46 पिंजरे लगाए गए हैं. ड्रोन और कैमरा ट्रैप लगातार निगरानी कर रहे हैं. फिर भी गांवों में डर क्यों है? क्योंकि तेंदुए का डर सिर्फ उसके दिखने से नहीं बनता. डर तब बनता है, जब खेत में जाते वक्त इंसान को पीछे मुड़कर देखना पड़े. जब गन्ने की फसल सिर्फ फसल न लगे, बल्कि उसके अंदर छिपे खतरे का शक भी हो.

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और जब एक गांव में तीन लोगों की जान जा चुकी हो, तो 26वें तेंदुए के पकड़े जाने के बाद भी लोगों का डर एक झटके में खत्म नहीं होता. फिलहाल वन विभाग का अभियान जारी है. पिंजरे लगे हैं. ड्रोन उड़ रहे हैं. कैमरे नजर रख रहे हैं. और मुरादाबाद के गांवों में लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब वह दिन आएगा, जब खेत की तरफ जाते हुए उन्हें यह सोचने की जरूरत न पड़े कि अगली झाड़ी के पीछे कौन छिपा है.

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