मिर्जापुर का ये गांव कभी बूंद-बूंद को तरसता था, अब 'हर घर नल योजना' से पहुंचा पानी

मिर्जापुर में आजादी के 76 साल बाद लहुरियादह में जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना के तहत पानी पहुंचा है. कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाले लहुरियादह के लोगों को अब घर में टोटी खोलते ही पानी मिल रहा है. ग्रामीण खुश हैं. यह गांव कभी राष्ट्रीय स्तर पर पानी की समस्या को लेकर सुर्खियों में रहता था.

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योजना के अंतर्गत 31 अगस्त 2023 को पहली बार नल से कस्बे में पानी आया. (Photo: ITG) योजना के अंतर्गत 31 अगस्त 2023 को पहली बार नल से कस्बे में पानी आया. (Photo: ITG)

सुरेश कुमार सिंह

  • मिर्जापुर,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में लालगंज तहसील के ड्रमंडगंज में विंध्य की पहाड़ी पर स्थित लहुरियादह कस्बा कभी पानी के लिए तरसता था. यहां के लोग आजादी के बाद भी पानी के लिए संघर्ष करते थे.

पहाड़ी पर मौजूद इस गांव की कुल आबादी 1,500 के करीब है. गांव में कुल 100 घर हैं, जो गांव के पास मौजूद पहाड़ के जलस्रोत से पानी इकट्ठा कर पीते थे. इस झरने में गांव के लोगों का नंबर लगता था. तीन दिन बाद एक परिवार का नंबर आता था. उसके बाद उन्हें पानी मिलता था.

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वहीं, जब गर्मी के दिनों में पानी की समस्या ज्यादा विकराल होती थी, तब जिला प्रशासन की तरफ से पानी के टैंकर की व्यवस्था की जाती थी. इसमें हर व्यक्ति को तीन दिनों के लिए इस्तेमाल करने के लिए 15 लीटर पानी मिलता था. पानी के लिए यहां के लोग पांच किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे भैसोड़ बलाय और मध्य प्रदेश के हनुमान से पानी लाते थे. पानी की समस्या के कारण गांव के लड़कों की शादी होनी बंद हो गई.

मगर प्रदेश सरकार की जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित हर घर नल योजना ने आज इस पूरे गांव की तस्वीर बदल दी है. इस योजना के अंतर्गत 31 अगस्त 2023 को पहली बार नल से कस्बे में पानी आया.

इसके बाद से हर घर में आज पानी की आजादी है. लगभग हर घर के पास नल लगा है, जिसमें सुबह-शाम पानी की सप्लाई होती है. ग्रामीणों को अब पानी के लिए जंगल-पहाड़ में संघर्ष नहीं करना पड़ता है.

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गांव के लोगों का कहना है कि आज पानी की कोई परेशानी नहीं है. अब टोटी खोलिए, पानी गिरने लगता है. हमारे पूर्वजों ने इस पानी के लिए बहुत संघर्ष किया है. मगर सरकार की इस योजना ने हमें पानी दे दिया. योगी के राज में पानी मिला है.

गांव की रहने वाली सुघरी देवी का कहना है, पहले हम लोग पहाड़ पर जलस्रोत के पास ही सोते थे. वहां दिन-रात लाइन लगती थी. जिसका नंबर आता था, उसको पानी भरने के लिए मिलता था. मगर आज योगी जी की देन है, टोटी खोलो, पानी आ रहा है.

 

वहीं, गांव की रहने वाली छमा देवी का कहना है, शादी हुई और यहां आए तो पानी की समस्या सामने थी. घर में खाना बनाने के लिए पानी चाहिए तो गांव से दूर झिंना (पहाड़ी जलस्रोत) पर जाते थे. आज आजादी है, घर पर टोटी लगी है, पानी आ रहा है.

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