महोबा के मुड़हरा गांव में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग: करोड़ों की टंकी बनी शोपीस, जल संकट के कारण 40 से ज्यादा युवा बैठे हैं कुंवारे

महोबा के मुड़हरा गांव में हर घर नल योजना के दावे पूरी तरह फेल साबित हुए हैं. ढाई साल पहले पाइपलाइन बिछने और करोड़ों की पानी की टंकी बनने के बावजूद ग्रामीणों को आज तक पानी नसीब नहीं हुआ. पानी की इस भीषण किल्लत की वजह से गांव के 40 से ज्यादा युवाओं की शादी तक नहीं हो पा रही है.

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महोबा जल संकट का प्रशासन ने लिया संज्ञान (Photo- ITG) महोबा जल संकट का प्रशासन ने लिया संज्ञान (Photo- ITG)

नाह‍िद अंसारी

  • महोबा,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

उत्तर प्रदेश के महोबा जिला मुख्यालय से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर स्थित 2 हजार से ज्यादा आबादी वाला मुड़हरा गांव आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है. ये हालात नमामि गंगे योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी और पाइपलाइन होने के बावजूद हैं. पिछले ढाई साल से इस सरकारी परियोजना का पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ और वहां सिर्फ पानी की टेस्टिंग ही की गई है. गांव के लोग भीषण गर्मी में केवल तीन हैंडपंपों और एक मंदिर के कुएं के भरोसे जीवन काटने को मजबूर हैं. पानी के इसी भीषण संकट के कारण कोई भी पिता इस गांव में अपनी बेटी ब्याहने को तैयार नहीं है, जिसके चलते गांव के 40 से ज्यादा लड़के कुंवारे बैठे हैं.

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टेस्टिंग के बाद नलों ने नहीं उगली पानी की एक बूंद

मुड़हरा गांव में सरकार की हर घर जल योजना जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह दम तोड़ चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि ढाई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें पाइपलाइन से पानी नहीं मिला. विभाग ने केवल एक बार टेस्टिंग की थी और उसके बाद से इन नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं निकली. गांव में लगे तीन हैंडपंपों में से दो का पानी इतना खारा है कि वह पीने लायक ही नहीं है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है.

किल्लत के डर से बेटियां ब्याहने से कतरा रहे लोग

गांव के बाहर लगा एकमात्र हैंडपंप ही अब पूरी आबादी की प्यास बुझाने का इकलौता जरिया है, जहां दिनभर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लाइन में खड़े रहते हैं. सुमित्रा, संतोषी और सुमन जैसी ग्रामीण महिलाओं का दर्द है कि उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ पानी ढोने में बीत रही है और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. गांव के 30 से 40 लड़के शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन पानी का संकट देखकर लोग यहां रिश्ते तय करने से कतराते हैं.

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नेताओं और विधायक के खिलाफ आक्रोश

ग्रामीणों के मुताबिक, जब कोई रिश्तेदार गांव में आता है तो उनके नहाने के लिए पानी नहीं होता और उन्हें मजबूरन तालाब भेजना पड़ता है. शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में लोगों को पैसे खर्च करके बाहर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं. इस दुर्दशा से गुस्साए अमरचंद और रतियां सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव में वोट मांगने वाले नेता और सदर विधायक राकेश गोस्वामी जीतने के बाद पांच साल में एक बार भी उनकी सुध लेने नहीं आए.

जल निगम के इंजीनियर जल्द करेंगे समस्या का समाधान

इस पूरे मामले पर महोबा के एसडीएम शिव ध्यान पांडेय ने प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. एसडीएम का कहना है कि प्रशासन द्वारा जहां-कहीं भी पानी की किल्लत की शिकायत मिलती है, वहां तत्काल प्रभाव से उसका निस्तारण कराया जाता है. मुड़हरा गांव में व्याप्त पानी के इस गंभीर संकट की जानकारी उन्हें मिली है. वे जल्द ही जल निगम के इंजीनियर से बात कर इस गांव की समस्या का स्थाई समाधान कराएंगे.

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