लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी में हुए अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया. हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और अब एलडीए शहरभर में फायर सेफ्टी की जांच कर रहा है. नतीजा क्या निकला? 71 कमर्शियल बिल्डिंग सील, 83 भवन मालिकों को नोटिस और दर्जनों जगहों पर नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं.
हजरतगंज के एक कोचिंग संस्थान में जब जांच टीम पहुंची तो वहां मौजूद बच्चों ने ऐसी बात कही, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए. उनका कहना था कि एडमिशन के वक्त उन्हें फायर सेफ्टी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. मोटी फीस, कोर्स, रिजल्ट और सुविधाओं की बात हुई, लेकिन अगर आग लग जाए तो बाहर कैसे निकलना है, इमरजेंसी एग्जिट कहां है, इसकी जानकारी किसी ने नहीं दी.
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दूसरी तरफ कोचिंग प्रबंधन का दावा था कि वे सभी सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हैं. अब सवाल ये है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत थी तो छात्रों को उसकी जानकारी क्यों नहीं थी? कार्रवाई की आंच हजरतगंज के हलवासिया कोर्ट तक पहुंची. यहां एक बिल्डिंग में चल रहे दो कोचिंग संस्थानों पर एलडीए ने ताला जड़ दिया.
एलडीए का कहना है कि जिस भवन को ऑफिस इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी, उसमें कोचिंग नहीं चलाई जा सकती. यानी नियम कुछ और कहते थे, लेकिन जमीन पर हो कुछ और रहा था.
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जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे तस्वीर और चिंताजनक होती गई. कई इमारतों में इमरजेंसी एग्जिट मिला ही नहीं. कहीं आने-जाने के रास्ते इतने संकरे थे कि आपदा के वक्त भगदड़ मच जाए तो लोगों का निकलना मुश्किल हो जाए. कुछ बिल्डिंगों में तो सिर्फ एक ही रास्ता मिला, यानी वही एंट्री और वही एग्जिट. कई जगहों पर सेटबैक एरिया पर कब्जा मिला. जिन खुली जगहों को सुरक्षा और आपातकालीन पहुंच के लिए छोड़ा जाना चाहिए था, वहां निर्माण या अतिक्रमण पाया गया.
गोमती नगर, अलीगंज, आलमबाग समेत कई इलाकों में एलडीए, फायर विभाग और बिजली विभाग की टीमें लगातार जांच कर रही हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि जो खामियां आज पकड़ी जा रही हैं, क्या वो कल नहीं थीं? क्या इन इमारतों में हजारों लोग रोज नहीं आते थे? और अगर आते थे, तो फिर नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
फिलहाल प्रशासन सख्ती दिखा रहा है. लेकिन लखनऊ के इस अग्निकांड ने एक बार फिर याद दिलाया है कि लापरवाही कितनी खतरनाक होती है. एलडीए का कहना है कि भविष्य में भी फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. प्रशासन का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
आशीष श्रीवास्तव