लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) धर्मांतरण मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. KGMU की कार्य परिषद की बैठक के बाद मामले की जांच और कार्रवाई की सिफारिश के लिए 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है.
इस कमेटी को डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (Disciplinary Action Committee) के तौर पर गठित किया गया है. इसमें कुलपति और कुल सचिव के अलावा चार अन्य सदस्य शामिल होंगे. इन चार सदस्यों में KGMU के दो वरिष्ठ डॉक्टर और दो स्वतंत्र सदस्य होंगे. कमेटी में एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी को भी शामिल किया जाएगा.
कमेटी स्पेशल टास्क फोर्स की पूरी रिपोर्ट के साथ मामले से जुड़े तथ्यों और अभिलेखों का परीक्षण करेगी. इसके बाद कमेटी अपनी जांच के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करेगी. एसटीएफ की रिपोर्ट में जिन शिक्षकों और KGMU स्टाफ के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ भी कमेटी कार्रवाई की संस्तुति करेगी. कमेटी रिपोर्ट में सामने आए नामों और उनसे जुड़े तथ्यों और अभिलेखों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर अपनी सिफारिश देगी.
डार्क वेब से देशभर में फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी का नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था. वह डार्क वेब के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद अपने साथियों के संपर्क में रहता था. आरोप है कि वह साथियों को महिलाओं, छात्राओं और महिला डॉक्टरों को फंसाने के तरीके बताता था. एसटीएफ ने आरोपी के तीन लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच की है. इसमें 12 साल से भी ज्यादा पुराना डेटा मिला है. जांच के मुताबिक आरोपी इन वीडियो का इस्तेमाल महिलाओं को ब्लैकमेल करने के लिए करता था.
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KGMU और PGI के डॉक्टरों की भूमिका की जांच
एसटीएफ की जांच में KGMU और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) से जुड़े कुछ डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आई है. पैथोलॉजी विभाग की एक महिला डॉक्टर, उनके पति और PGI के कुछ डॉक्टरों पर आरोपी की मदद करने का आरोप है. रिपोर्ट में KGMU के करीब आधा दर्जन डॉक्टरों द्वारा एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में बड़े आर्थिक निवेश का भी जिक्र है. इसके अलावा बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. इन निवेशों के साथ सरकारी बजट के गलत इस्तेमाल के आरोपों की भी जांच चल रही है.
संतोष शर्मा