उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने लखनऊ के केजीएमयू की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, धर्मांतरण का दबाव बनाने और प्रताड़ित करने के मामले में आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन के खिलाफ 800 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. यह कार्रवाई दिसंबर 2025 में दर्ज मुकदमों और उसके बाद मिली दो पीड़िताओं के बयानों व डिजिटल सबूतों के आधार पर की गई है. आरोपी के पास से बरामद लैपटॉप से 4 TB डेटा और 500 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिले हैं. डार्क वेब के जरिए नेटवर्क चलाने वाला आरोपी महिलाओं को फंसाकर ब्लैकमेल करता था. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ इस देशव्यापी नेटवर्क, डॉक्टरों की संदिग्ध भूमिका और वित्तीय लेनदेन की गहनता से जांच कर रही है.
डार्क वेब से फैलता नेटवर्क और बरामद डेटा
जांच में सामने आया है कि आरोपी का नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों में फैला हुआ था. आरोपी डार्क वेब के जरिए देशभर में साथियों के संपर्क में रहता था और उन्हें महिलाओं, छात्राओं व महिला डॉक्टरों को फंसाने के तरीके बताता था. बरामद तीन लैपटॉप की फॉरेशिक जांच में 12 साल से भी ज्यादा पुराना डेटा मिला है. आरोपी इन वीडियो का इस्तेमाल महिलाओं को ब्लैकमेल करने के लिए करता था.
केजीएमयू और पीजीआई के डॉक्टरों की संदिग्ध भूमिका
एसटीएफ की जांच में केजीएमयू और पीजीआई से जुड़े कुछ डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आई है. पैथोलॉजी विभाग की एक महिला डॉक्टर, उनके पति और पीजीआई के कुछ डॉक्टरों पर आरोपी की मदद करने का आरोप है. रिपोर्ट में केजीएमयू के आधा दर्जन डॉक्टरों द्वारा एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में बड़े आर्थिक निवेश और बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसरों की भूमिका का जिक्र है. इन निवेशों और सरकारी बजट के गलत इस्तेमाल की जांच की जा रही है.
केजीएमयू की विशेष बैठक में होगी सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए केजीएमयू की 6 नवंबर 2026 को विशेष कार्य परिषद (Special Executive Council) की बैठक बुलाई गई है. 25 अगस्त 2026 को एसटीएफ द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट को 30 अक्टूबर 2026 को शासन द्वारा केजीएमयू को भेजा गया था. रजिस्ट्रार एस. नित्यानंद द्वारा जारी एजेंडे के तहत इस बैठक में एसटीएफ रिपोर्ट में शामिल प्रोफेसरों के वित्तीय अधिकार रोकने और उन पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर फैसला लिया जाएगा.
आशीष श्रीवास्तव