उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसके दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों पर फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए लोगों को निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर रकम ठगने का आरोप है.
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में करीब 5 हजार 600 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का अनुमान सामने आया है. ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रांसफर कर छिपाने की कोशिश की जाती थी. पूछताछ में आरोपियों ने रकम को इस तरह इधर-उधर करने की जानकारी दी है.
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शाहबाज वारसी (24) निवासी तलाक महल रेल पटरी, थाना बेगमगंज, कानपुर नगर और सलमान पुत्र शकील अहमद (31) निवासी चमनगंज, कानपुर नगर के रूप में हुई है. पुलिस ने दोनों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसके पूरे आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
72 बैंक खातों से देशभर में ठगी की शिकायतें
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 65 लाख 26 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा दो आईपैड, तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड, बैंक खाते खुलवाने से संबंधित दस्तावेज, कैश जमा और निकासी की रसीदें बरामद हुई हैं. साइबर अपराध से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं.
जांच के दौरान साइबर पुलिस को अब तक 72 संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली है. इन खातों से देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई साइबर ठगी की करीब 86 शिकायतें जुड़ी मिली हैं. पुलिस को इन मामलों के तार दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक जुड़े मिले हैं.
इसके अलावा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से भी शिकायतें इन बैंक खातों से संबंधित पाई गई हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितनी रकम को अलग-अलग जगह भेजा गया और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे.
मोबाइल से मिले चैट और आपराधिक कॉल रिकॉर्ड
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में आपराधिक कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है. बरामद मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. इसके जरिए गिरोह के काम करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.
साइबर पुलिस अब फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और उनके संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि 5600 करोड़ रुपये के अनुमानित वित्तीय लेनदेन में ठगी की रकम कितनी थी और वैध लेनदेन के नाम पर किस तरह रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया गया.
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी हो सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, नेटवर्क की कड़ियां सामने आने के बाद फर्जी फर्मों और संदिग्ध खातों के जरिए चल रहे साइबर अपराध के इस पूरे तंत्र पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
कानपुर पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी को लेकर सतर्क रहने की अपील की है. पुलिस के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच, CBI, ED या किसी निवेश संस्था का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगता है तो तत्काल सावधान हो जाएं.
पुलिस ने लोगों से कहा है कि ऐसे किसी भी दबाव में आकर रकम ट्रांसफर न करें और मामले की तुरंत शिकायत करें. साइबर अपराध से जुड़ी घटना होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
सिमर चावला