जिम जाने वालों को ऐसे बेच रहे थे नकली सप्लीमेंट, 50 लाख का माल बरामद, 5 गिरफ्तार

जिम में तेजी से मांसपेशियां बढ़ाने की चाहत के बीच गाजियाबाद में कथित नकली बॉडी-बिल्डिंग दवाओं के नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 50 लाख रुपये की सामग्री बरामद करने का दावा किया है. Dianabol, Trenbolone, Winstrol समेत कई उत्पादों के साथ फर्जी लेबल, खाली शीशियां, कार्टन और होलोग्राम मिले हैं.

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गोदाम से मिलीं सैकड़ों पैकिंग और संदिग्ध दवाएं.(Photo: Mayank Gaur/ITG) गोदाम से मिलीं सैकड़ों पैकिंग और संदिग्ध दवाएं.(Photo: Mayank Gaur/ITG)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

जिम में जल्द बॉडी बनाने की चाहत युवाओं को नकली दवाओं और सप्लीमेंट के खतरनाक बाजार तक पहुंचा रही है. गाजियाबाद में शालीमार गार्डन पुलिस और ट्रांस हिंडन जोन की स्वाट/सर्विलांस टीम ने कथित तौर पर फर्जी लेबल-पैकिंग के जरिए बॉडी-बिल्डिंग सप्लीमेंट, पेप्टाइड्स, इंजेक्शन और दवाएं तैयार कर दिल्ली-एनसीआर में खपाने वाले गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 50 लाख रुपये कीमत की सामग्री बरामद करने का दावा किया है.

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पुलिस के मुताबिक, 15 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर दिलीप पांडेय (39), वीरभान उर्फ रवि (34), रोहित वक्शी उर्फ लड्डू (35), हन्नी कुलश्रेष्ठ (30) और आर्यन (24) को पकड़ा गया. दिलीप और वीरभान ओल्ड सीमापुरी, दिल्ली के रहने वाले हैं, जबकि रोहित, हन्नी और आर्यन विजयनगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं. पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि दिल्ली निवासी मोहित और आदिल से कच्चा माल, प्रिंटेड लेबल, मोनो कार्टन और खाली शीशियां हासिल की जाती थीं.

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जांच के अनुसार इसके बाद सामग्री को विजयनगर स्थित गोदाम और दुकानों में पैक कर तैयार उत्पाद का रूप दिया जाता था. अलग-अलग देशों के नाम-पते और कंपनियों के नाम का इस्तेमाल करके लेबल तैयार किए जाते थे. प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम और मोनोग्राम वाली पैकिंग लगाकर इन्हें ऊंचे दामों पर बेचने का आरोप है. रोहित ने ललित शर्मा उर्फ लल्ली को अपना मामा बताते हुए कारोबार में साझेदारी की बात कही है.

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गोदाम से मिलीं सैकड़ों पैकिंग और संदिग्ध दवाएं

पुलिस के मुताबिक हन्नी पर ललित का काम संभालने, जबकि आर्यन पर अकाउंटेंट के साथ गोदाम और दुकान देखने की जिम्मेदारी होने की बात सामने आई है. बरामद सामान में Dianabol की बोतलें, Anadrol और Clian के सैकड़ों खाली कार्टन, Testolone RAD, पेप्टाइड किट, Pragma इंजेक्शन और बिना लेबल वाली लाल गोलियों से भरी 508 डिब्बियां शामिल हैं.

इसके अलावा Myodrol, Bulkzilla, GHRP-6, Musclemass Gainer, MK-677, IGF-1 और HGH X2 जैसे डाइट सप्लीमेंट भी मिले हैं. इंजेक्शन और कंपाउंड में Trenbolone, Winstrol, Sustanon, Deca, Test E-250 और Masteron समेत कई उत्पाद बरामद किए गए. बड़ी संख्या में होलोग्राम, खाली शीशियां, मोनो कार्टन और दूसरी पैकिंग सामग्री मिलने के बाद पुलिस को इस कथित कारोबार के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है.

पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री में कुछ उत्पाद प्रतिबंधित या नियंत्रित श्रेणी के भी हो सकते हैं. इनकी वास्तविक संरचना, गुणवत्ता और वैधता की जांच कराई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक बिना निर्धारित मानकों और चिकित्सकीय निगरानी के तैयार दवाओं, स्टेरॉयड या हार्मोन आधारित कंपाउंड का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है.

दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई की कड़ियां तलाश रही पुलिस

जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि ये उत्पाद वास्तव में कहां तैयार किए जाते थे, कच्चा माल कहां से आता था और दिल्ली-एनसीआर में किन दुकानों, जिम संचालकों या ग्राहकों तक पहुंचाया गया. पुलिस ने शालीमार गार्डन थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है.

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पुलिस अब कथित नेटवर्क की बाकी कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जांच में सामने आए मोहित, आदिल और ललित शर्मा समेत अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है. साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि नकली लेबल और पैकिंग के जरिए तैयार उत्पादों का कारोबार कितना बड़ा था और अब तक कितने लोगों तक ऐसी सामग्री पहुंच चुकी है.

डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि बॉडी बनाने की चाहत में युवा जिन सप्लीमेंट, स्टेरॉयड या हार्मोन आधारित कंपाउंड को मांसपेशियां बढ़ाने का जरिया मानकर इस्तेमाल करते हैं, उनके नकली या मिलावटी होने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है. बिना चिकित्सकीय सलाह और गुणवत्ता जांच के इनका इस्तेमाल शरीर के सामान्य संतुलन को प्रभावित करने के साथ गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है. ऐसे में तेजी से नतीजे पाने की चाहत में खरीदे जा रहे उत्पादों की असलियत और गुणवत्ता बड़ा सवाल बन गई है.

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