महोबा जिले के सिद्धनडेरा गांव में एक 500 मीटर सड़क स्कूली बच्चों की पढ़ाई के रास्ते में बड़ी परेशानी बन गई है. गांव में आजादी के बाद से यह सड़क कच्ची पड़ी है. बारिश के दिनों में रास्ते पर जलभराव और कीचड़ हो जाता है. इसी परेशानी से परेशान होकर प्राथमिक और जूनियर स्कूल के करीब 100 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए. बच्चों ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी समस्या को लेकर नारेबाजी की. उनका कहना था कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना कीचड़ और पानी भर जाता है कि स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई बार बच्चे रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं. ऐसे में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
बच्चों की परेशानी को लेकर छात्राओं ने भी अपनी बात रखी. छात्रा आकांक्षा और चांदनी ने सवाल उठाया कि अगर बेटियां कीचड़ में गिरेंगी तो पढ़ेंगी कैसे. उनका कहना था कि सरकार बेटियों को पढ़ाने की बात करती है, लेकिन उनके गांव में स्कूल जाने के लिए सुरक्षित रास्ता तक नहीं है. सिद्धनडेरा गांव इलाहीपुरा ग्योडी क्षेत्र में आता है. यहां प्राथमिक और जूनियर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को इसी कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने के कारण रास्ता और मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि वे कई साल से इस परेशानी का सामना कर रहे हैं.
कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे अपनी समस्या सीधे जिलाधिकारी के सामने रखना चाहते थे. हालांकि उस समय जिलाधिकारी मौजूद नहीं थे. इसके बाद एडीएम इंद्रानंदन सिंह ने बच्चों और उनके अभिभावकों की बात सुनी. उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर शिवध्यान पांडे और बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा को मौके पर भेजा. इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा बच्चों और ग्रामीणों के साथ सिद्धनडेरा गांव पहुंचे. इस दौरान उनका एक संवेदनशील चेहरा भी देखने को मिला. बच्चों की समस्या सुनने के बाद उन्होंने एक मासूम को गोद में उठाया और गांव के लिए रवाना हो गए.
बारिश में कीचड़ बना मुसीबत
गांव पहुंचकर बीएसए ने सड़क की स्थिति को करीब से देखा. उन्होंने उस रास्ते का निरीक्षण किया, जहां बारिश के बाद जलभराव और कीचड़ हो जाता है. इसी रास्ते से बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से उनकी परेशानी के बारे में जानकारी ली. बीएसए राहुल मिश्रा ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि सड़क निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने की दिशा में कार्रवाई हो सके.
एडीएम इंद्रानंदन सिंह ने भी बच्चों और ग्रामीणों को मामले में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया. अधिकारियों के गांव पहुंचने से बच्चों और ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी सड़क की समस्या का समाधान हो सकता है. ग्रामीणों के लिए 500 मीटर की यह सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं है. बारिश के दिनों में यही रास्ता बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है. सड़क पर पानी और कीचड़ जमा होने से छोटे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है. बच्चे फिसलकर गिरते हैं और कई बार रास्ता पार करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है.
कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले बच्चों की उम्र भले ही कम हो, लेकिन उन्होंने अपनी समस्या को लेकर आवाज उठाने का तरीका जरूर दिखा दिया. करीब 100 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे और सड़क बनवाने की मांग की. बच्चों की मांग के बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने का फैसला किया. अब सिद्धनडेरा गांव के इन बच्चों को उम्मीद है कि आजादी के बाद से कच्ची पड़ी 500 मीटर सड़क जल्द पक्की होगी. बच्चों का कहना है कि अगर गांव में सड़क बन जाती है तो उन्हें बारिश में कीचड़ और पानी के बीच से होकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा.
अधिकारियों ने गांव का किया दौरा
इन मासूमों ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि अगर उनके गांव में सड़क बन गई तो वे देश के मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद देंगे. फिलहाल बच्चों और ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर है. अधिकारियों के आश्वासन के बाद अब यह देखना होगा कि 500 मीटर की इस सड़क को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है.
नाहिद अंसारी