उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर वाराणसी में विवाद खड़ा हो गया है. उन्होंने भारत रत्न शहनाई सम्राट मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुराने मकान पर बुलडोजर चलाए जाने का दावा करते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा था. हालांकि, अब बिस्मिल्लाह खान के परिवार ने इस दावे को गलत बताया है.
बिस्मिल्लाह खान के परिवार का कहना है कि उनके पुश्तैनी मकान पर कोई बुलडोजर नहीं चला है. परिवार के सदस्य खुद आपसी सहयोग से जर्जर भवन का पुनर्निर्माण करा रहे हैं. उनका मकसद इस ऐतिहासिक इमारत को धरोहर के रूप में संरक्षित करना और यहां बिस्मिल्लाह खान का म्यूजियम बनाना है. परिवार ने कहा कि अखिलेश यादव ने संभवत: किसी भ्रम की वजह से ऐसा पोस्ट किया है.
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दरअसल, वाराणसी के सरायहड़हा इलाके में स्थित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पुराना मकान काफी जर्जर हो चुका है. इसी भवन को लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने इसे भारत रत्न से सम्मानित कलाकार की सांगीतिक विरासत और देश के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया.
अखिलेश यादव ने पोस्ट में क्या कहा?
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, "जिनके लिए शहनाई नहीं बजी, उनसे और क्या उम्मीद करना?" उन्होंने बीजेपी और उसकी विचारधारा से जुड़े लोगों पर कला और कलाकारों के खिलाफ होने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि रचनात्मक लोग समाज में बदलाव की जमीन तैयार करते हैं और सकारात्मक कला समाज में सहृदयता तथा सहनशीलता को बढ़ावा देती है.
उन्होंने आगे लिखा कि जिनके नाम के आगे भारत रत्न लगा हो, उनकी मिली-जुली विरासत को ध्वस्त करना उनके मान-सम्मान के साथ देश के सम्मान को भी नुकसान पहुंचाने जैसा है. अखिलेश ने बीजेपी पर नफरत की राजनीति के जरिए देश को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया.
सपा प्रमुख ने यह भी घोषणा की कि प्रदेश में सरकार बनने पर भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की सांगीतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए 'श्रवण-संग्रहालय' बनाया जाएगा. अपने पोस्ट के आखिर में उन्होंने इस कथित कार्रवाई को घोर निंदनीय बताया.
परिवार बोला- मकान पर नहीं चला बुलडोजर, खुद करा रहे निर्माण
अखिलेश यादव के पोस्ट के बाद बिस्मिल्लाह खान का परिवार सामने आया और उनके दावे पर आपत्ति जताई. उस्ताद के पोते सिफ्तेन हुसैन और अफाक हैदर ने कहा कि उनके पुराने मकान पर किसी तरह का बुलडोजर नहीं चला है. संभव है कि अखिलेश यादव को गलत जानकारी मिली हो और उन्होंने भ्रम की स्थिति में यह पोस्ट कर दिया हो. परिवार ने यह भी बताया कि उनका इलाका काफी संकरी गलियों में बसा है, जहां बुलडोजर का पहुंचना भी मुमकिन नहीं है.
परिवार के मुताबिक, बिस्मिल्लाह खान के सभी बेटे और बेटियों ने काफी पहले ही पुश्तैनी मकान के पुनर्निर्माण का फैसला लिया था. इसी निर्णय के तहत भवन को नया रूप दिया जा रहा है. यह पूरा काम परिवार के सदस्य आपसी सहयोग से करा रहे हैं और इसके लिए किसी तरह की सरकारी आर्थिक मदद नहीं ली जा रही है.
पोते सिफ्तेन हुसैन और अफाक हैदर ने बताया कि मकान की हालत काफी खराब हो चुकी थी. भवन जर्जर होने के कारण कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती थी. इसी खतरे को देखते हुए परिवार ने इसके पुनर्निर्माण का फैसला किया. उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद अपने पूर्वजों की विरासत को सुरक्षित रखना है, न कि उसे खत्म करना.
ग्राउंड फ्लोर पर बनेगा म्यूजियम, पहली मंजिल पर रहेगा परिवार
परिवार की योजना के मुताबिक, पुनर्निर्माण के बाद मकान के ग्राउंड फ्लोर पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का म्यूजियम बनाया जाएगा. यहां उनकी सांगीतिक विरासत और यादों को संरक्षित करने की योजना है. वहीं, फर्स्ट फ्लोर पर परिवार पहले की तरह ही रहेगा. इस तरह पुश्तैनी मकान को एक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा.
परिवार ने साफ किया कि उन्हें सरकारी मदद लेने से कोई परहेज नहीं है. अगर सरकार इस विरासत को संरक्षित करने के लिए सहयोग करना चाहती है तो उसका स्वागत है. अखिलेश यादव भी मदद करना चाहें तो परिवार को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन मकान पर बुलडोजर चलाए जाने का दावा पूरी तरह निराधार है.
गौरतलब है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. उनकी शहनाई ने भारतीय संगीत को दुनिया भर में पहचान दिलाई. उन्हें गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के तौर पर भी याद किया जाता है. उनका व्यक्तित्व धर्म, मजहब और सियासत की सीमाओं से ऊपर माना जाता रहा है. ऐसे में उनके पुश्तैनी मकान और सांगीतिक विरासत को लेकर शुरू हुई यह सियासी बहस अब परिवार के बयान के बाद चर्चा में है.
रोशन जायसवाल