उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में डीएम अविनाश सिंह ने मीरगंज तहसील में तैनात कनिष्ठ लिपिक रेहान खान पर सख्त एक्शन लिया है. लिपिक रेहान को हिंदी टंकण परीक्षा में लगातार तीन बार असफल होने के बाद डीएम ने कनिष्ठ सहायक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी (चपरासी) के पद पर डिमोट कर दिया है. शासनादेश के तहत यह कार्रवाई 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश के जरिए की गई. मृतक आश्रित कोटे से जुलाई 2021 में भर्ती हुए रेहान खान 8 सितंबर 2026 को आयोजित अपने तीसरे और अंतिम टाइपिंग टेस्ट में भी निर्धारित मानक हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहे थे.
तीन मौकों के बाद शासनादेश के तहत कार्रवाई
रेहान खान की नियुक्ति 5 जुलाई 2021 को मृतक आश्रित के रूप में हुई थी. नियमानुसार उन्हें हिंदी टंकण परीक्षा पास करना अनिवार्य था. पहला टेस्ट 25 सितंबर 2023 और दूसरा 21 जून 2024 को हुआ था, जिसमें वे फेल रहे. इसके बाद 8 सितंबर 2026 को तीसरा मौका दिया गया, लेकिन इसमें भी वे असफल रहे. इसके बाद नियमों के तहत 16 सितंबर को डिमोशन का आदेश जारी हुआ.
अन्य कर्मचारियों को मिला चेतावनी के साथ अंतिम मौका
प्रशासन ने टंकण परीक्षा में फेल हुए अन्य मृतक आश्रित कर्मचारियों को सुधार का मौका दिया है. राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना को तीसरा व अंतिम मौका मिला है, जबकि कंचित चौधरी और नेहा जोशी को दूसरा अवसर दिया गया है. इन सभी कर्मचारियों को कंप्यूटर टाइपिंग सीखने के लिए दो महीने की मोहलत दी गई है. तय समय में सुधार न होने पर उनके खिलाफ भी कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
सरकारी धन के गबन पर कर्मचारी बर्खास्त
प्रशासन ने फरीदपुर में पदस्थ रहे अंशुल वर्मा नाम के कर्मचारी को सेवा से पूरी तरह से बर्खास्त कर दिया है. अंशुल पर अमीन का पैसा अपने व्यक्तिगत खाते में डालकर गबन करने का आरोप था. 2015-16 में उसे पहले भी टर्मिनेट किया गया था. कोर्ट के आदेश पर एडीएम सिटी की जांच कमेटी ने दोबारा आरोप पत्र गठित किया, जिसमें सभी आरोप सही पाए गए. इसके बाद पुराना बर्खास्तगी का आदेश दोबारा प्रभावी कर दिया गया.
कलेक्ट्रेट में चर्चा और प्रशासनिक संदेश
कलेक्ट्रेट परिसर में इस कार्रवाई के बाद से अन्य कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है. जिले भर में इस बात की चर्चा हो रही है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति केवल योग्यता के आधार पर ही मिलनी चाहिए. काम में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर की गई इस कार्रवाई को एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है और इसकी सराहना भी हो रही है.
कृष्ण गोपाल राज