उत्तर प्रदेश के बांदा से सरकारी योजनाओं और उनके लिए दफ्तरों के चक्कर काटते एक दिव्यांग की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. दोनों पैरों से दिव्यांग बृजभूषण पिछले करीब 12 साल से राशन कार्ड बनवाने और सरकारी सुविधाएं पाने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है. शिकायतें करता रहा, अधिकारियों से गुहार लगाता रहा, लेकिन उसके मुताबिक उसे अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला. अब वह एक बार फिर अपनी फरियाद लेकर डीएम कार्यालय पहुंचा. यहां उसने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी बताते हुए राशन की मांग की. बृजभूषण ने कहा कि साहब, विभाग राशन कार्ड बना नहीं रहा. मैं पेट से भूखा हूं. मुझे राशन दिला दीजिए. उसकी हालत सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने पूर्ति विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और तत्काल राशन कार्ड बनाने के आदेश दिए. डीएम ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
बृजभूषण बांदा के स्योढ़ा गांव का रहने वाला है. उसने बताया कि उसके साथ एक हादसा हुआ था, जिसमें उसके दोनों पैर कट गए. इसके बाद से उसकी जिंदगी काफी मुश्किल हो गई. वह दोनों पैरों से दिव्यांग है और उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की है.बृजभूषण के मुताबिक उसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है. वह कोई काम भी नहीं कर सकता. ऐसे में घर का खर्च चलाना और पेट भरना उसके लिए बड़ी चुनौती बन गया है. वह पिछले करीब 12 साल से राशन कार्ड बनवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है. कभी ब्लॉक कार्यालय जाता है तो वहां से उसे जिले के कार्यालय भेज दिया जाता है. इसके बाद वह जिला स्तर पर अपनी समस्या लेकर पहुंचता है. इस तरह वह लगातार एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाता रहा.
हादसे में कट गए दोनों पैर
बृजभूषण का कहना है कि उसने अपनी समस्या को लेकर कई जगह शिकायत की. समाधान दिवस से लेकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. उसके मुताबिक हर बार उसे किसी न किसी तरह का आश्वासन मिला, लेकिन राशन कार्ड नहीं बन पाया. 12 साल का लंबा समय बीतने के बाद भी उसकी समस्या जस की तस बनी रही.बृजभूषण के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह भी है कि एक जगह से दूसरी जगह जाना उसके लिए आसान नहीं है. दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण हर बार अधिकारियों के कार्यालय तक पहुंचना उसके लिए परेशानी भरा है. उसने अधिकारियों से यही गुहार लगाई कि कम से कम उसका राशन कार्ड बन जाए, जिससे वह अपना पेट भर सके.
बृजभूषण की मुश्किल सिर्फ राशन कार्ड तक सीमित नहीं है. उसके मुताबिक सरकार से मिलने वाली पेंशन भी पिछले नौ महीने से बंद है. यानी जिस सरकारी मदद से उसे कुछ राहत मिल सकती थी, वह भी फिलहाल उसके पास नहीं पहुंच रही है.उसने बताया कि आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. आमदनी का कोई साधन नहीं है और वह खुद कोई काम करने की स्थिति में भी नहीं है. ऐसे में दिन गुजारना मुश्किल हो रहा है. बृजभूषण का कहना है कि आसपास के लोग कभी-कभी मदद कर देते हैं. लोगों की मदद से ही किसी तरह उसका पेट भर जाता है. लेकिन वह सरकारी सुविधाओं का लाभ पाने के लिए लगातार कोशिश करता रहा है.
कई साल तक अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद बृजभूषण डीएम कार्यालय पहुंचा और अपनी समस्या बताई. उसने अधिकारियों के सामने अपनी आर्थिक स्थिति और राशन कार्ड नहीं बनने की पूरी परेशानी रखी. उसकी शिकायत सुनने के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने पूर्ति विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई. साथ ही तत्काल राशन कार्ड बनाने के आदेश दिए गए. डीएम की ओर से भी मामले की तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. यानी जिस राशन कार्ड के लिए बृजभूषण पिछले करीब 12 साल से परेशान था, अब प्रशासन ने उसके मामले में तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
12 साल की दौड़ पर उठ रहे सवाल
बृजभूषण की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर तक पहुंचने पर भी सवाल खड़े करती है. एक ऐसा व्यक्ति जो दोनों पैरों से दिव्यांग है, जिसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है और जो सरकारी राशन तथा पेंशन जैसी मदद पर निर्भर है, उसे राशन कार्ड के लिए करीब 12 साल तक अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़े.
बृजभूषण का कहना है कि उसने ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक शिकायत की. समाधान दिवस में भी अपनी बात रखी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. अब डीएम कार्यालय पहुंचने के बाद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. मामले में सिटी मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र ने बताया कि पीड़ित की समस्या को गंभीरता से सुना गया है. उसकी समस्या के निस्तारण के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि पीड़ित की समस्या का जल्द निराकरण कराया जाएगा. अब देखने वाली बात यह है कि 12 साल से सरकारी सुविधाओं के लिए भटक रहे बृजभूषण को प्रशासन के इन निर्देशों के बाद कितनी जल्दी राहत मिलती है. फिलहाल डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
सिद्धार्थ गुप्ता