अयोध्या में चंदा चोरी मामले को लेकर गुरुवार को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद शुक्रवार को साधु-संतों की बैठक हुई. इस बैठक में संतों ने चंपत राय का समर्थन किया गया और साथ ही अयोध्या को बदनामी से बचाने का आग्रह किया. इस बैठक में कल ट्रस्ट द्वारा बनाई गई समिति के सदस्य सहित विश्व हिंदू परिषद और RSS के पदाधिकारी शामिल हुए.
ट्रस्ट की बनाई हुई नई समिति के सदस्य राजकुमार दास ने आजतक से बातचीत में बताया जिन लोगों ने गलती की वे लोग फिलहाल जेल में है और मामले में SIT की जांच भी चल रही है. जल्द ही सभी पहलू सामने आएंगे, इस घड़ी में संत समाज एकजुट है.
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रतिनिधियों व वकीलों द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस भेजे जाने पर उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत लंबे समय से चला आ रहा है. सुप्रीम कोर्ट में भी मामला है लेकिन वे लोग वासुदेवानंद जी को ही शंकराचार्य मानते हैं.
ट्रस्ट द्वारा निर्मित नई समिति के सदस्य राजकुमार दास ने कहा कि ट्रस्ट में जो अभी तीन पद खाली हैं, उसमें भी संतों को रखा जाना चाहिए. ट्रस्ट की समिति के सदस्य मैथिलीशरण महाराज ने आजतक से बातचीत में कहा कि अयोध्या में दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है. लोग ईर्ष्या से भरे हैं इसलिए अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं. SIT की जांच जारी है और आरोपियों को पकड़ा भी गया है.
ट्रस्ट द्वारा बनाई गई समिति के सदस्य मैथिलीशरण महाराज ने कहा कि चंपत राय पर आरोप नहीं हैं, उनके साथ षड्यंत्र हुआ है. वहीं ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रतिनिधियों व वकीलों द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस भेजे जाने पर उन्होंने कहा, "वे पहले अपने लीगल(वैध) होने का प्रमाण दें, जिनका जिनका खुद ही लीगल होना प्रमाणित नहीं है वे कैसे किसी को लीगल नोटिस दे सकते हैं. भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे."
बैठक में अधिकतर संतों ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का समर्थन किया और उन्हें निर्दोष बताया है. संतों द्वारा कुछ अन्य संतों पर भी सवाल उठाया गया है जो चंपत राय पर पहले दिन से सवाल उठा रहे हैं.
पत्थर मंदिर के महंत मुनि दास ने बैठक में कहा कुछ संतों ने संतोष दुबे पर भी सवाल उठाया और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी सवाल उठाया. उन्होंने दो टूक कह दिया है कि निर्णय अयोध्या का निर्णय संत समाज ही करेगा, बाहर के बैठे हुए कालनेमि नहीं, अयोध्या में वही होगा जो संत समाज चाहेगा.
समर्थ श्रीवास्तव