उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े मामले में उस समय हलचल तेज हो गई जब पुलिस विवेचक और सीओ अयोध्या इस केस की चार्जशीट दाखिल करने के लिए एंटी करप्शन कोर्ट पहुंचे. जैसे ही यह खबर फैली कि चार्जशीट दाखिल की जा रही है, वहां मौजूद वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया. अधिवक्ताओं का कहना है कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी और कॉपी दिखाई जानी चाहिए थी, ऐसा न होने से पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
दरअसल राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे की चोरी का मामला काफी समय से चर्चा में रहा है और इसकी जांच पुलिस लगातार कर रही थी. लंबी जांच के बाद जब विवेचक अपनी रिपोर्ट यानी चार्जशीट लेकर कोर्ट पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद वकीलों ने इसे स्वीकार करने से इनकार करते हुए विरोध शुरू कर दिया.
वकीलों की मुख्य आपत्ति यह है कि इतने संवेदनशील मामले में चार्जशीट को गुपचुप तरीके से दाखिल करने की कोशिश की जा रही है, जबकि उन्हें पहले इसे देखने और समझने का मौका मिलना चाहिए था.
यह भी पढ़ें: राम मंदिर में 105 बार हुई चढ़ावे की चोरी! CCTV से खुला राज, SIT ने SC को क्या-क्या बताया?
इस विरोध के बाद कोर्ट परिसर में माहौल गरमा गया और मौके पर पुलिस बल भी सतर्क नजर आया. हालात को देखते हुए अधिवक्ता संघ ने तुरंत एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जा रही है. वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि चार्जशीट औपचारिक रूप से दाखिल हो पाई है या नहीं, क्योंकि वकीलों के विरोध के चलते प्रक्रिया अटकी हुई बताई जा रही है.
राम मंदिर जैसे आस्था से जुड़े स्थान पर चढ़ावे की चोरी का मामला होने के कारण यह घटना और भी गंभीर मानी जा रही है. लोगों की नजर अब इस पर टिकी है कि पुलिस और अधिवक्ता संघ के बीच यह गतिरोध किस तरह सुलझता है और आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है.
मयंक शुक्ला