उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मुरादाबाद के उदीषा महोत्सव मैदान में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान ₹365 करोड़ से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात, कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की इन योजनाओं को जनता को समर्पित किया. सीएम योगी ने यह कदम मुरादाबाद के विकास को रफ्तार देने और 'व्यापारी कल्याण दिवस' पर व्यापारियों व लाभार्थियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से उठाया.
सीएम योगी ने कहा- अखिलेश जी, आपकी सरकार ने तो इन राम भक्तों पर गोलियां चलाई थीं, आज की अयोध्या फिर से त्रेता युग का स्मरण करा रही है. अब बारी है बांके बिहारी की, कृष्ण कन्हैया की. तुष्टीकरण से उबरिये! वोट बैंक से उभरिए, खुल करके बोलिए, मथुरा-वृंदावन के बारे में,श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बारे में बोलिए. मथुरा-वृंदावन का तो हम कार्य कर लेंगे. श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बारे में बोलिए, तब हम सच मानेंगे, नहीं तो आपका झूठ,ये धूल झोंकने की राजनीतिक चाल पर जनता विश्वास करने वाली नहीं है. क्योंकि जनता को मालूम है कि अब समाजवादी पार्टी की साइकिल पंचर हो चुकी है, उसकी गति अब समाप्त हो चुकी है। अब उसकी चलने की सामर्थ्य समाप्त, खेल खत्म.
अब जब खेल खत्म तो फिर आगे की कोई संभावना नहीं. संभावना नहीं तो आगे के बारे में स्वयं सोच रहे होंगे कि कुछ नहीं तो राम नाम का ही सहारा सही और राम नाम का सहारा लेंगे, तो इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में ही कल्याण हो जाएगा. बहुत सारे लोग हैं जो अपने कल्याण के लिए कुछ न कुछ करते हैं, और इसलिए हम किसी धोखे में न रहें.
पहले कब्रिस्तान, अब मंदिर पर खर्च
इस दौरान सपा-बसपा को परिवारवादी बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि पहले सरकारी पैसा कब्रिस्तान बनाने के लिए जाता था, लेकिन अब वही पैसा मंदिर और विकास कार्यों के लिए जाता है. उन्होंने सपा सरकार द्वारा राम मंदिर पर गोलियां चलवाने का जिक्र करते हुए कहा कि अब अयोध्या त्रेतायुग जैसी हो गई है और अब बारी मथुरा के बांके बिहारी की है.
अखिलेश यादव पर तीखा तंज और कानून-व्यवस्था
सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले मुख्यमंत्री को फुर्सत नहीं थी, वे 1 बजे सोकर उठते थे, 3 बजे तैयार होते थे और 5 बजे मित्रों के साथ बैठ जाते थे. तब सूबे में न बिजली थी और न रोजगार. उन्होंने कानून-व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि पहले एक कहावत चल पड़ी थी- 'एक सपाई और बिटिया घबराई'.
बाबर राज और बाबरी सोच पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 साल पहले मुरादाबाद उपद्रव के लिए जाना जाता था, लेकिन आज इसकी पहचान पीतल नगरी और अन्नदाता किसानों से है. कुंदरकी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां जनता ने तुर्कों को परास्त कर साबित किया कि अब बाबर का राज नहीं चलेगा. बाबरी सोच का मतलब जातिवाद के नाम पर बांटना और समाज में विष पैदा करना है.
जगत गौतम