समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच रायबरेली से अपनी रथ यात्रा की शुरुआत की है. इसकी शुरुआत उन्होंने रायबरेली से की, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यात्रा शुरू करने से पहले अखिलेश यादव ने कई बड़े बयान दिए. रायबरेली को यात्रा की शुरुआत के लिए चुने जाने के पीछे राजनीतिक समीकरणों की भी चर्चा हो रही है.
अखिलेश यादव आज हरचंदपुर के सपा विधायक और ओबीसी नेता राहुल लोधी के घर जाएंगे. वह सपा छात्रसभा के उन सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे, जिनकी 17 सितंबर को झड़प हुई थी. पार्टी के मुताबिक, अखिलेश अपने दौरे में ऐसे परिवारों से भी मिलेंगे, जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई से नाराज हैं.
यह भी पढ़ें: रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की PDA रथ यात्रा, कांग्रेस के गढ़ में बढ़ाएंगे ताकत
रायबरेली से शुरुआत क्यों?
रायबरेली से रथ यात्रा की शुरुआत को 2027 के चुनाव से पहले सपा की राजनीतिक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. जिले में विधानसभा की पांच सीटें हैं और सपा के पास फिलहाल हरचंदपुर, बछरावां और सरेनी सीटें हैं.
सपा की नजर ऊंचाहार सीट पर भी है. 2022 में कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने के बावजूद पार्टी ने रायबरेली की पांच में से चार सीटों पर जीत दर्ज की थी. ऊंचाहार से सपा के टिकट पर तीन बार जीत चुके डॉ. मनोज पांडेय अब बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.
गठबंधन के बीच सियासी संदेश
सपा और कांग्रेस के बीच 2027 चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. ऐसे में रायबरेली से यात्रा शुरू करने को दोनों दलों के बीच भविष्य की सीटों को लेकर सियासी संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: ओवैसी का डर या मायावती का प्रेशर? यादव को हटाकर मुस्लिम पर अखिलेश ने क्यों जताया भरोसा
सपा की रणनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़ना अहम रहा है. रायबरेली से शुरुआत के जरिए पार्टी अपने संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. वहीं राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के साथ आगे होने वाली सीट बंटवारे की बातचीत के संदर्भ में भी देख रहे हैं.
aajtak.in