रात 2 बजे प्रसव पीड़ा, गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस... प्रसूता को चारपाई पर रखकर नदी पार कराने का Video

आगरा के बाह क्षेत्र में उटंगन नदी पर पुल नहीं होने की वजह से एक प्रसूता और उसके नवजात को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ी. रात के अंधेरे में परिजनों ने चारपाई को ट्यूब के ऊपर रखकर महिला को नदी के दूसरी ओर पहुंचाया. अस्पताल से छुट्टी के बाद जच्चा-बच्चा को इसी खतरनाक रास्ते से वापस गांव लाया गया. घटना का वीडियो वायरल है.

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गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस.(Photo: Screengrab) गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस.(Photo: Screengrab)

नितिन उपाध्याय

  • आगरा,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

आगरा के बाह क्षेत्र में उटंगन नदी पर पुल नहीं होने की वजह से एक प्रसूता को बेहद जोखिम भरे तरीके से नदी पार करानी पड़ी. ग्राम पंचायत अरनौटा के सुखलालपुरा गांव की रहने वाली केशवती को बुधवार रात करीब दो बजे अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने बिना देर किए एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए नदी पर कोई पुल या पुलिया नहीं है.

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एंबुलेंस आगरा-बाह मार्ग पर जयसिंह गांव के पास पहुंच सकी. इसके बाद परिजनों के सामने केशवती को नदी के दूसरी तरफ ले जाने की चुनौती खड़ी हो गई. रात के समय नदी पार कराने के लिए कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं था. ऐसे में परिवार ने एक ट्यूब का इंतजाम किया और उसके ऊपर चारपाई रखकर प्रसूता को लिटाया.

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परिजनों ने बेहद सावधानी के साथ चारपाई को ट्यूब के सहारे नदी के पार पहुंचाया. इस दौरान महिला की जान के साथ-साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना रहा. नदी पार कराने के बाद एंबुलेंस की मदद से केशवती को फतेहाबाद के अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया.

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अस्पताल से छुट्टी के बाद फिर उसी रास्ते से लौटे

केशवती और नवजात को गुरुवार सुबह अस्पताल से छुट्टी मिल गई. इसके बाद परिजन उन्हें लेकर गांव के लिए रवाना हुए. गांव तक पहुंचने के लिए एक बार फिर वही खतरनाक रास्ता सामने था. चारपाई को दोबारा ट्यूब के ऊपर रखा गया और प्रसूता व नवजात को लेकर नदी पार कराई गई.

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी ग्रामीण ने वीडियो बना लिया. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. तस्वीरों में नदी के पानी के बीच चारपाई को ट्यूब के सहारे आगे बढ़ाते लोग नजर आ रहे हैं. यह स्थिति इलाके में बुनियादी सुविधाओं की कमी और ग्रामीणों की मजबूरी को सामने ला रही है.

ग्रामीणों के मुताबिक, उटंगन नदी पर पुल या पुलिया नहीं होने से इलाके के लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खासकर बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ जाने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य आवागमन के साथ आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन जाता है.

देखें वीडियो...

10 दिन धरना, ज्ञापन और दो महीने में काम शुरू होने का आश्वासन

ग्रामीणों का दावा है कि पुल निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने करीब दस दिनों तक धरना दिया था. इसके बाद बीते 22 जून को उप जिलाधिकारी बाह के माध्यम से जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा गया था. ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय उन्हें दो महीने के भीतर पुलिया निर्माण का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था.

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ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन के करीब तीन महीने बाद भी मौके पर निर्माण शुरू नहीं हुआ है. इसे लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है. उनका कहना है कि यह केवल सड़क या आवागमन से जुड़ी परेशानी नहीं है, बल्कि बारिश के दौरान मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े तो एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. ऐसी स्थिति में मरीज को इसी तरह नदी पार कराने की मजबूरी बन जाती है. उनका आरोप है कि पुल के अभाव में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

SDM बोले- ज्ञापन शासन को भेजा गया

मामले को लेकर एसडीएम बाह विनोद कुमार ने फोन पर बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग को लेकर उन्हें ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि ज्ञापन को नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया गया है.

फिलहाल प्रसूता और नवजात सुरक्षित हैं, लेकिन वायरल वीडियो ने उटंगन नदी पर पुल की जरूरत को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों की मांग है कि पुल या पुलिया का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को इस तरह जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े.

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