मुजफ्फरनगर: 54 साल पुराने शिव मंदिर में हुई पूजा, मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं पर बरसाए फूल

यूपी के मुजफ्फरनगर में मुस्लिम बहुल इलाके में प्राचीन शिव मंदिर मिलने के बाद आज वहां पूजा-अर्चना की गई. खास बात ये है कि इस दौरान वहां आने वाले श्रद्धालुओं पर मुस्लिम समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा की और उनका स्वागत किया. बताया जा रहा है कि ये मंदिर 54 साल पुराना है जो खंडहर के रूप में बदल चुका था.

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शिव मंदिर में शुद्धिकरण और पूजा शिव मंदिर में शुद्धिकरण और पूजा

संदीप सैनी

  • मुजफ्फरनगर,
  • 23 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

संभल के बाद यूपी के मुजफ्फरनगर में भी मुस्लिम बहुल इलाके में 54 साल पुराना एक प्राचीन शिव मंदिर मिला है. खंडहर हो चुके इस शिव मंदिर का शुद्धिकरण स्वामी यशवीर महाराज ने किया. इस मौके पर सैकड़ों लोग वहां मौजूद रहे, जिन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना की. इस दौरान वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.

बता दें कि यह मंदिर सालों पहले खंडहर में तब्दील हो चुका था और इसमें कोई पूजा-अर्चना नहीं हो रही थी. स्वामी यशवीर महाराज के आह्वान पर स्थानीय समाज ने इस मंदिर के पुनरुद्धार का संकल्प लिया और सोमवार को विधिवत शुद्धिकरण समारोह का आयोजन किया.

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मंदिर में पूजा-अर्चना

शुद्धिकरण के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा अनुष्ठान किए गए. वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने मंदिर में गंगाजल और दुग्धाभिषेक कर इसे एक बार फिर से पूजा योग्य बनाया. स्वामी यशवीर महाराज ने बताया कि अब इस मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे.

मुस्लिम समुदाय ने श्रद्धालुओं पर की पुष्प वर्षा

इस शुद्धिकरण समारोह की खास बात यह रही कि इसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी अपनी सहभागिता दिखाई. उन्होंने श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर अपनी शुभकामनाएं दी. इससे दोनों समुदायों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश दिया.

इसको लेकर एक स्थानीय बुजुर्ग मुस्लिम शख्स ने कहा कि मंदिर मिलने से हम खुश हैं, यहां आकर लोग पूजा-अर्चना करें, हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है, हमने अपने युवाओं से कहा है कि जो यहां आए उनका स्वागत करें. हिंदू समाज ने मुस्लिम समुदाय के इस जेस्चर के लिए उनका आभार प्रकट किया.

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कई पीढ़ियों ने इस मंदिर को खंडहर देखा

इस आयोजन को लेकर उत्साहित एक स्थानीय श्रद्धालु ने कहा, 'हमारी कई पीढ़ियों ने इस मंदिर को खंडहर के रूप में देखा है, आज इसे पुनर्जीवित होते देखना गर्व और खुशी की बात है.' स्थानीय लोगों का कहना है कि अब इस मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाएगी और इसे आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.

 

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