सालाना करीब 1.5 करोड़ रुपये की सैलरी, सुबह 9 से शाम 5 बजे तक काम और अच्छा work-life balance. इसके बावजूद कनाडा में रहने वाली प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग ने अपनी टेक जॉब छोड़ दी. अब वह अपने दम पर कंटेंट क्रिएशन और लेखन कर रही हैं. हालात ऐसे हैं कि एक महीने में कंटेंट से उनकी कमाई सिर्फ 6 डॉलर यानी करीब 500 रुपये रही, लेकिन उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है.
1.5 करोड़ की नौकरी क्यों छोड़ी?
बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, जियोंग 2020 में कोरिया से टोरंटो आई थीं. यहां उन्होंने एक टेक कंपनी में इन-हाउस प्रोडक्ट डिजाइनर के तौर पर काम शुरू किया. उनका काम मोबाइल ऐप और वेबसाइट डिजाइन करना था.
इस नौकरी से उन्हें सालाना करीब 1,73,000 डॉलर की कमाई होती थी. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 1.5 करोड़ रुपये है. वह आमतौर पर सप्ताह में करीब 40 घंटे काम करती थीं और उनका काम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलता था.
जियोंग ने बताया कि वह अपनी नौकरी से परेशान नहीं थीं. उन्हें बर्नआउट भी नहीं था. असल समस्या यह थी कि नौकरी के साथ उन्होंने कंटेंट क्रिएशन शुरू कर दिया था और इसी दौरान उन्हें एक बुक डील भी मिल गई.अब उन्हें नौकरी, किताब लिखने और कंटेंट बनाने का काम एक साथ संभालना पड़ रहा था. उनके मुताबिक, यह तीन फुल टाइम नौकरियों जैसा हो गया था.
खुद को दिया सिर्फ एक साल
नियमित और अच्छी सैलरी छोड़ना उनके लिए आसान नहीं था. इस्तीफा देने से पहले उन्हें कई हफ्तों तक चिंता रही कि कहीं बाद में अपने फैसले पर पछतावा न हो.
इसलिए उन्होंने खुद को एक साल का समय दिया. जून 2026 में नौकरी छोड़ने के बाद वह फिलहाल पूरी तरह अपने काम पर ध्यान दे रही हैं. एक साल बाद वह तय करेंगी कि इसी रास्ते पर आगे बढ़ना है या कॉरपोरेट नौकरी में वापस लौटना है.
एक महीने में सिर्फ 500 रुपये की कमाई
नौकरी छोड़ने के बाद सबसे बड़ा बदलाव उनकी कमाई में आया. जुलाई में पेमेंट में देरी के कारण कंटेंट क्रिएशन से उन्हें सिर्फ 6 डॉलर मिले, जो करीब 500 रुपये हैं.
हालांकि यह उनकी कुल आय नहीं थी. उन्हें किताब का एडवांस भी मिला है और कुछ महीनों में उनकी कमाई पुरानी नौकरी की सैलरी से भी ज्यादा हो सकती है. लेकिन अब उनकी आय नियमित नहीं है. कुछ महीनों में कमाई बेहद कम रहती है, जबकि कुछ महीनों में काफी ज्यादा हो सकती है.
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फिर भी क्यों नहीं है पछतावा?
अपने लिए काम करने से आजादी तो मिली है, लेकिन काम खत्म होने का कोई तय समय नहीं है. कॉरपोरेट नौकरी में शाम के बाद काम से दूरी बनाना आसान था. अब हमेशा कोई न कोई काम बाकी रहता है.
इसके बावजूद तीन महीने बाद भी जियोंग अपने फैसले से संतुष्ट हैं. उनका मानना है कि अगर एक साल बाद उन्हें कॉरपोरेट नौकरी में वापस लौटना पड़ा, तब भी यह अनुभव बेकार नहीं जाएगा.
उनके लिए सबसे बड़ा पछतावा नौकरी छोड़ना नहीं होता. पछतावा शायद इस बात का होता कि उन्होंने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने दम पर वह कितना आगे बढ़ सकती हैं.
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