ऑस्ट्रेलिया में ग्रॉसरी स्टोर से शुरुआत, फिर रिटेल की नौकरी... और आखिर में अपनी कंसल्टिंग प्रैक्टिस. सिडनी में रहने वाले भारतीय शख्स दिव्यज गौतम ने सोशल मीडिया पर अपनी कमाई की पूरी जर्नी शेयर की है. उन्होंने बताया कि कैसे घंटे के हिसाब से काम करने वाली नौकरियों से आगे बढ़कर वह ऐसी सर्विस देने लगे, जहां एक क्लाइंट से उन्हें महीने में करीब 2.88 लाख रुपये मिलते थे. उनकी औसत मासिक कमाई एक समय करीब 9.6 लाख रुपये तक पहुंच गई थी.
ऑस्ट्रेलिया पहुंचकर नहीं मिली लाखों की नौकरी
दिव्यज ने अपनी कहानी की शुरुआत उस दौर से की, जब वह ऑस्ट्रेलिया में इंडियन ग्रॉसरी स्टोर में काम करते थे. वह हफ्ते में छह दिन काम करते थे और करीब 48,000 रुपये प्रति हफ्ता कमाते थे.इसके बाद उन्होंने रिटेल की नौकरी की. यहां उनकी कमाई बढ़कर करीब 1.05 लाख रुपये प्रति हफ्ते हो गई.
यानी ऑस्ट्रेलिया में उनकी कमाई की कहानी सीधे लाखों रुपये से शुरू नहीं हुई थी. उन्होंने छोटे काम से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी कमाई का तरीका बदला.
असली बदलाव नौकरी बदलने से नहीं, काम के मॉडल से आया
दिव्यज के मुताबिक, उनकी कमाई में बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने अपनी साइकोसोशल रिस्क कंसल्टिंग प्रैक्टिस शुरू की.उन्होंने बताया कि एक क्लाइंट से उन्हें करीब 2.88 लाख रुपये महीने की फीस मिलती थी. कई क्लाइंट्स के साथ काम करने के बाद उनकी औसत मासिक कमाई करीब 9.6 लाख रुपये तक पहुंच गई.टैक्स कटने के बाद उनके पास करीब 7.2 लाख रुपये महीने बचते थे.
यानी उनकी कहानी का सबसे बड़ा बदलाव यह था कि वह सिर्फ अपने काम के घंटों के बदले पैसे लेने से आगे बढ़कर अपनी प्रोफेशनल सर्विस के लिए फीस लेने लगे.
'पहले घंटों के लिए पैसे मिलते थे...'
दिव्यज ने अपनी पोस्ट में कमाई के इस बदलाव को खास तौर पर समझाया.उनके मुताबिक, ग्रॉसरी स्टोर और रिटेल की नौकरियों में उनकी कमाई सीधे उनके काम के घंटों से जुड़ी थी. जितने घंटे काम, उसी हिसाब से भुगतान.लेकिन कंसल्टिंग में तस्वीर बदल गई. यहां उनकी कमाई उनके समय से ज्यादा उनकी विशेषज्ञता और क्लाइंट को दी जाने वाली सर्विस से जुड़ गई.यही बदलाव उनकी कमाई बढ़ने का अहम हिस्सा बना.
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9.6 लाख रुपये की कमाई में कितना बचता था?
दिव्यज ने अपनी कमाई के साथ-साथ सिडनी में होने वाले खर्च का भी हिसाब शेयर किया.उनके मुताबिक, करीब 2.3 लाख रुपये किराए में चले जाते थे. यूटिलिटीज पर लगभग 33,600 रुपये, ग्रॉसरी पर करीब 48,000 रुपये और जिम पर लगभग 9,600 रुपये खर्च होते थे.इसके अलावा बाहर खाने-पीने और घूमने पर वह करीब 48,000 से 58,000 रुपये खर्च करते थे.इन सभी खर्चों को मिलाकर उनका मासिक खर्च करीब 3.74 लाख रुपये था.टैक्स के बाद करीब 7.2 लाख रुपये मिलने पर उनके पास लगभग 3.45 लाख रुपये बच जाते थे.
अब कमाई से ज्यादा सेविंग पर फोकस
दिव्यज ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया छोड़कर भारत लौटने में अब करीब 18 दिन बाकी थे. ऐसे में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और सेविंग्स का हिसाब शेयर किया.
उनका कहना है कि भारत लौटते समय वह अपने साथ एक मजबूत फाइनेंशियल कुशन रखना चाहते हैं. यानी ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा कमाई करना उनके लिए अंतिम लक्ष्य नहीं था. वह वहां रहते हुए पर्याप्त पैसा बचाकर भारत लौटना चाहते थे.
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हालांकि,दिव्यज की कहानी को सिर्फ 'सिडनी में 9.6 लाख रुपये कमाने वाले भारतीय' के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता.उनकी जर्नी दिखाती है कि विदेश जाकर कमाई का सफर कई लोगों के लिए छोटे काम से शुरू हो सकता है. बाद में स्किल, अनुभव और अपनी सर्विस के दम पर कमाई का मॉडल बदल सकता है.
हालांकि, दिव्यज के बताए आंकड़े उनका व्यक्तिगत अनुभव हैं. सिडनी में हर व्यक्ति की कमाई और खर्च एक जैसे नहीं होते. किराया, परिवार का आकार, लाइफस्टाइल और नौकरी के हिसाब से बजट काफी बदल सकता है.
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