पाकिस्तान में चरस, गांजा से भी आगे बढ़कर नशा का एक अजीबोगरीब ट्रेंड इन दिनों बढ़ता जा रहा है. वहां लोग अब बिच्छु का नशा करने लगे हैं. हलांकि, यह कोई नया ट्रेंड नहीं है. बताया जाता है कि 60 के दशक में नशे के किसी प्रयोगधर्मी ने इसकी शुरुआत की थी. इसके बाद ज्यादा से ज्यादा की नशा करने की चाह वाले लोग इसमें रुचि लेने लगे.
नशा करना एक खतरनाक और बुरी लत है, चाहे वो किसी भी तरह का हो. किसी भी तरह के नशे का सीधा स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. खासकर ऐसा नशा, जिसमें छिपकली और बिच्छु जैसे जीवों का इस्तेमाल किया जाता हो.
बिच्छु को मारकर उनका नशे के लिए इस्तेमाल करने की शुरुआत पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से शुरू हुई. पाकिस्तान का यह इलाका वैसे भी चरस और अफीम की खेती के लिए जाना जाता है. यहां गांजा, अफीम और चरस जैसी चीजें आम है. शायद यही वजह है कि इससे आगे बढ़कर कुछ हार्ड और नया ननशा करने वाले लोगों ने बिच्छु को मारकर पीने के तरीके को ईजाद किया.
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबकि, खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद तोफैल ने बताया था कि उनके लिए बिच्छू का सेवन एक खतरनाक चीज थी. उन्होंने कहा कि जब मैंने पहली बार चरस के साथ बिच्छू का सेवन किया, तो मुझे एक अजीब सा अनुभव हुआ.तोफैल याद करते हुए बताते हैं कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है. आंख के आगे सबकुछ नाचता हुआ सा दिख रहा था.
इस अनुभव ने उन्हें बिच्छू का सेवन हमेशा के लिए छोड़ने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने कहा कि मेरा शरीर और दिमाग बहुत उत्तेजित हो गया था. मेरे दोस्तों ने बाद में बताया कि मैं एक घंटे तक चिल्लाता और रोता रहा. होश आने पर मैंने तय कर लिया कि मैं इसे फिर कभी हाथ नहीं लगाऊंगा.
कैसे तैयार होता है बिच्छु का नशा
बिच्छू को धूम्रपान के लिए तैयार करने की प्रक्रिया काफी समय लेने वाली है. तोफैल के मुताबिक, मरे हुए बिच्छु या बिच्छु को मारकर इसे बहुत ही सावधानी से सुखाया जाता है. इसे पहले कुछ दिनों के लिए धूप में सुखाना पड़ता है. यह बहुत जरूरी है कि इसे चींटियों और अन्य कीड़ों से दूर रखा जाए.
क्योंकि, ये छोटे जीव बिच्छु के जहर को सोख सकते हैं. जब मरे हुए बिच्छु पूरी तरह से सूख जाते हैं तो इसे पीसकर पाउडर बना लिया जाता है. फिर इसे गांजे या चरस के साथ पेपर में रोल करके या चिलम में भरकर इसका सेवन करते हैं.
कुछ लोग सीधे भी बिच्छु का नशा करते हैं. यानी उसे बिना गांजा या चरस में मिलाए सीधे जलाकर सूंघते हैं. अगर जल्दबाजी में बिच्छु का नशा तैयार करना हो तो मरे हुए बिच्छु को तवे पर अच्छे से भून लिया जाता है और फिर ठंडा कर उसका पाउडर बनाया जाता है. कुछ उतावले लोग बिच्छु को मारकर सीधे आग में दे देते हैं और पाइप लगाकर सीधे इसका धुआं खींच लेते हैं.
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बिच्छु का नशा लोगों को 10 घंटे के लिए बेसुध कर देता है. इस दौरान आदमी को कुछ याद नहीं रहता है. वह अपना होश खो देता है. होश में आने के बाद शरीर में दर्द, पीड़ा और काफी बेचैनी होती है. बिच्छु का नशा काफी खतरनाक और दर्दनाक होता है.
बिच्छु का नशा सीधा आदमी के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है. पाकिस्तान में कई ऐसे लोग हैं जिनकी मानसिक हालत हमेशा के लिए खराब हो गई. सिर्फ एक बार ही बिच्छु का नशा करने पर लोगों की मानसिक हालत बिगड़ जाती है. ऐसा करते हुए जान जाने की आशंका भी बनी रहती है.
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