1 लाख सैलरी, 50 हजार रेंट... लोग बोले 'पागल', CA ने बताया क्यों लिया इतना महंगा घर

1 लाख की सैलरी में 50 हजार किराया देने वाले कुशाल लोढ़ा ने बताया कि उन्होंने इतना महंगा घर क्यों चुना और कैसे उस माहौल ने उनकी सोच और करियर को प्रभावित किया.

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CA ने इसका रीजन भी बताया ( सांकेतिर तस्वीर:AI generated) CA ने इसका रीजन भी बताया ( सांकेतिर तस्वीर:AI generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:21 AM IST

चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंटेंट क्रिएटर कुशाल लोढ़ा ने बताया कि जब वह महीने में 1 लाख रुपये कमाते थे, तब मुंबई के लोअर परेल में रहने के लिए 50 हजार रुपये महीने का किराया देते थे. उन्होंने यह बात X पर साझा की.

लोढ़ा के मुताबिक, कई लोगों ने सैलरी का आधा हिस्सा किराए पर खर्च करने के उनके फैसले को गलत बताया और उन्हें 'पागल' तक कहा. लेकिन उनका मानना था कि वह सिर्फ घर के लिए नहीं, बल्कि ऐसे माहौल के लिए पैसे दे रहे थे, जिसने उनकी सोच और काम करने के तरीके को प्रभावित किया.

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उन्होंने कहा कि लोअर परेल में रहने से उन्हें एक ऐसा माहौल मिला, जिसने उन्हें ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने और अपने काम को नए नजरिए से देखने में मदद की. उनके मुताबिक, किसी जगह की कीमत सिर्फ उसके किराए से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाली महत्वाकांक्षा से भी तय हो सकती है.

लोअर परेल क्यों? सिर्फ घर नहीं, एक पूरा इकोसिस्टम

लोअर परेल मुंबई के प्रमुख महंगे और कमर्शियल-रेजिडेंशियल इलाकों में शामिल है. यहां 1 BHK का किराया 63,000 से 1 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकता है. लेकिन लोढ़ा के लिए यह सिर्फ एक पता नहीं था, बल्कि ऐसा माहौल था, जहां उन्हें नए लोगों, विचारों और संभावित अवसरों से जुड़ने का मौका मिलता था.

लोअर परेल में फीनिक्स मॉल, कमला मिल्स और कई कॉर्पोरेट ऑफिस हैं. यहां का कारोबारी और सामाजिक माहौल इसे मुंबई के चर्चित इलाकों में शामिल करता है. लोढ़ा के मुताबिक, इसी तरह का माहौल उनकी सोच और काम करने के तरीके पर असर डालने वाला था.

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क्या महंगा इलाका करियर में मदद कर सकता है?

मनोविज्ञान और सोशल साइंस की रिसर्च से संकेत मिलता है कि आसपास का सामाजिक माहौल लोगों की आकांक्षाओं और सोच को प्रभावित कर सकता है. जर्मनी के जर्मन सोशियो-इकोनॉमिक पैनल के डेटा पर आधारित एक अध्ययन में पाया गया कि जिन इलाकों में यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट्स का अनुपात ज्यादा था, वहां युवाओं में हायर एजुकेशन हासिल करने की आकांक्षाएं भी ज्यादा थीं.

रिसर्चर्स के मुताबिक, आसपास पढ़े-लिखे लोगों की मौजूदगी युवाओं को रोल मॉडल, नई जानकारी और अलग-अलग अवसरों के बारे में जानने का मौका दे सकती है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सिर्फ किसी महंगे इलाके में रहने से व्यक्ति का करियर बेहतर हो जाएगा. यह स्टडी एंड्रियास हार्टुंग और स्टीफन हिलमर्ट ने किया था और यह सोशल साइंस रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ था.

रहने की जगह का असर किन चीजों से पड़ सकता है?

नेटवर्किंग: बिजनेस हब के आसपास रहने से प्रोफेशनल्स, कंपनियों और इवेंट्स तक पहुंच आसान हो सकती है.

सामाजिक माहौल: आसपास के लोगों और उनके कामकाज का माहौल सोच, लक्ष्य और करियर से जुड़ी आकांक्षाओं को प्रभावित कर सकता है.

जीवनशैली: बेहतर सुविधाएं, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं.

हालांकि, महंगे इलाके में रहना अपने आप करियर बेहतर होने की गारंटी नहीं देता. इसी तरह सैलरी का 50 फीसदी किराए पर खर्च करना भी हर व्यक्ति के लिए सही वित्तीय फैसला नहीं माना जा सकता. यह आय, बचत, कर्ज, परिवार और करियर के लक्ष्यों जैसी कई चीजों पर निर्भर करता है.

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कुशाल लोढ़ा की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने किराए को सिर्फ एक खर्च के तौर पर नहीं देखा. उनके लिए यह ऐसे माहौल में रहने की कीमत थी, जिसने उनकी सोच, महत्वाकांक्षा और काम करने के तरीके को प्रभावित किया.

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