जिस टूरिस्ट के साथ शख्स ने ली सेल्फी, वो निकला बिछड़ा हुआ चाचा

पहाड़ों की सैर के दौरान एक शख्स ने सोचा भी नहीं होगा कि किसी अनजान टूरिस्ट की फोटो खींचना उसकी जिंदगी का सबसे यादगार पल बन जाएगा. कुछ मिनटों की बातचीत में ऐसा राज खुला कि दोनों हैरान रह गए. जिस व्यक्ति की उसने तस्वीर लेने में मदद की, वह कोई अजनबी नहीं बल्कि उसका वर्षों पहले बिछड़ा हुआ रिश्तेदार निकला.

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पहाड़ पर सैर करने गए एक शख्स को मिल गया उसका बिछड़ा रिश्तेदार (Photo - AI Generated) पहाड़ पर सैर करने गए एक शख्स को मिल गया उसका बिछड़ा रिश्तेदार (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

कहते हैं दुनिया बहुत छोटी है और कभी-कभी किस्मत ऐसे खेल खेलती है, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. चीन में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां एक युवक ने घूमने के दौरान एक अनजान टूरिस्ट की फोटो खींचने में मदद की. उसके साथ सेल्फी ली और बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि वह कोई अजनबी नहीं, बल्कि उसके परिवार का बिछड़ा हुआ सदस्य है.

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यह कहानी चीन के शंघाई में रहने वाले चेन जी की है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई की शुरुआत में चेन काम के सिलसिले में दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत गए थे. काम से थोड़ा समय मिलने पर वह मशहूर पर्यटन स्थल लुगू लेक घूमने पहुंच गए.

सनराइज देखने पहुंचे थे, वहीं हुई मुलाकात
9 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे चेन झील किनारे सूर्योदय का नजारा देख रहे थे. तभी उनसे उम्र में बड़े एक टूरिस्ट ने अपनी फोटो खींचने में मदद मांगी. चेन ने खुशी-खुशी उनकी तस्वीरें खींच दीं.  फोटो खींचने के बाद दोनों के बीच सामान्य बातचीत शुरू हो गई. टूरिस्ट ने बताया कि वह ताइवान के काओशुंग शहर से हैं, लेकिन उनके पूर्वजों का घर चीन के झेजियांग प्रांत के पुयुआन कस्बे में था.

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यह सुनते ही चेन चौंक गए, क्योंकि उनका अपना पैतृक गांव भी पुयुआन ही था. दोनों ने साथ में  एक सेल्फी भी ली. फिर दोनों एक दूसरे से सोशल मीडिया पर संपर्क में आ गए.

एक नाम ने बढ़ाया शक
बातचीत के दौरान चेन को पता चला कि उस टूरिस्ट का उपनाम है. यही बात उन्हें खटक गई. उन्होंने यह जानकारी अपने पिता को भेजी. चेन के पिता ने पूछा कि क्या उनके पिता का नाम फेई युनफेंग है? जब चेन ने यह सवाल टूरिस्ट से पूछा तो जवाब 'हां' में मिला. इसके बाद परिवार से जुड़ी कुछ और जानकारियां मिलाई गईं और सच सामने आ गया.

जांच में पता चला कि फेई के पिता और चेन के दादा सगे भाई थे. यानी जिस व्यक्ति की चेन ने फोटो खींची थी, वह रिश्ते में उनका चाचा निकला. दरअसल, 1949 में चीन में जनवादी गणराज्य बनने से पहले फेई के पिता कुओमिन्तांग सेना के साथ ताइवान चले गए थे. वहीं दूसरी ओर, चेन के दादा को एक दूसरे परिवार ने गोद ले लिया था, जिसके बाद उनका उपनाम बदलकर 'चेन' हो गया. इसी वजह से दोनों परिवारों का संपर्क टूट गया.

चेन ने कहा कि हमारे परिवार की परंपरा के हिसाब से मुझे उन्हें चाचा कहना चाहिए. हालांकि दोनों परिवारों का संपर्क दशकों तक नहीं हो पाया, लेकिन 1980 के दशक के आखिर में ताइवान के लोगों को चीन में अपने रिश्तेदारों से मिलने की अनुमति मिलने लगी.

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फेई के पिता खुद चीन नहीं आ सके, लेकिन उन्होंने 1991 में अपने भाई के नाम एक खत भेजा. इसके साथ उन्होंने किसी के जरिए 200 अमेरिकी डॉलर भी भेजे थे. चेन बताते हैं कि उस समय चीन में आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी और 200 डॉलर बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी. उनका परिवार आज भी वह खत संभालकर रखे हुए है.

उस खत में लिखा था, यह पैसे मेरे प्यार और चिंता की निशानी हैं. इस साल मैं चीन नहीं आ पाऊंगा. उम्मीद है अगले साल मिलने का मौका मिलेगा. भगवान करे परिवार के सभी लोग स्वस्थ और खुश रहें.

अब अगली पीढ़ी निभाएगी रिश्ता
समय बीतने के साथ फेई के पिता और चेन के दादा दोनों का निधन हो गया, लेकिन किस्मत ने उनकी अगली पीढ़ी को अचानक मिला दिया. फेई ने कहा कि वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे, लेकिन मैंने फोटो खींचने के लिए चेन को ही चुना. शायद हमारी मुलाकात किस्मत में लिखी थी.उन्होंने बताया कि वह अगले महीने पुयुआन जाकर चेन के पूरे परिवार से मिलेंगे.

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वहीं चेन का कहना है, अब हमारे दोनों परिवारों के रिश्ते को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी शायद हमारी पीढ़ी की है.कभी-कभी जिंदगी में कुछ मुलाकातें इतनी अनोखी होती हैं कि वे किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती हैं. यह घटना भी ऐसी ही है, जहां एक साधारण-सी फोटो ने बिछड़े हुए परिवार को फिर से जोड़ दिया.

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