न UP, न बिहार... इन 4 राज्यों के लोगों को नौकरी नहीं देगा ये CEO, जानिए क्यों

बेंगलुरु की एक कंपनी के सीईओ ने यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी न देने की बात कही है. सीईओ ने इसके पीछे एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी घटना और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को वजह बताया. उनके इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

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सीईओ का आरोप है कि उसे महिला कर्मचारियों के साथ बदतमीजी की. ( Photo: ITG) सीईओ का आरोप है कि उसे महिला कर्मचारियों के साथ बदतमीजी की. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:19 AM IST

नौकरी के लिए आमतौर पर उम्मीदवार की पढ़ाई, अनुभव, काम करने की क्षमता और इंटरव्यू में प्रदर्शन देखा जाता है. लेकिन बेंगलुरु की एक कंपनी के सीईओ के एक फैसले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. कंपनी के सीईओ ने ऐलान किया है कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी. उन्होंने इस फैसले की वजह कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी घटना को बताया है. 

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एक्स पर पोस्ट कर दी जानकारी
दरअसल, एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड (A1 Sports World) के फाउंडर और सीईओ कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर की. इसमें उन्होंने बताया कि कंपनी में काफी बातचीत और बहस के बाद यह फैसला लिया गया है. उन्होंने अपनी पोस्ट में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को कंपनी में नौकरी नहीं दी जाएगी.

कार्तिक ने यह भी बताया कि कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया है. उनके इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस फैसले को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए. 

आखिर क्यों लिया ऐसा फैसला?
सोशल मीडिया पर आलोचना होने के बाद कार्तिक ने एक और पोस्ट के जरिए अपने फैसले के पीछे की वजह बताई. उनके मुताबिक, करीब दो हफ्ते पहले कंपनी के एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था. वह कर्मचारी इन चार राज्यों में से किसी एक राज्य से था. सीईओ का आरोप है कि उसे महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी के लिए दो बार चेतावनी दी गई थी. इसके बावजूद उसका व्यवहार नहीं बदला.

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कार्तिक ने दावा किया कि उस कर्मचारी ने एक महिला कर्मचारी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश भी की. उन्होंने कहा कि कंपनी में काफी कम उम्र के लोगों के साथ काम होता है, इसलिए उनकी टीम की सुरक्षा उनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. कार्तिक के मुताबिक, जिस कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया, वह एमबीए ग्रेजुएट था. उन्होंने कहा कि नौकरी देने से पहले उसका रिज्यूमे और बैकग्राउंड सामान्य और साफ दिखाई दे रहा था.

लेकिन कंपनी का दावा है कि कंपनी में काम शुरू करने के करीब दो महीने बाद उसके व्यवहार में समस्या सामने आई. उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी के बाद उसे चेतावनी दी गई, लेकिन स्थिति नहीं बदली. कार्तिक ने कहा कि उनके लिए बिजनेस चलाने से ज्यादा जरूरी अपनी टीम और उनके साथ काम करने वाले युवा लोगों की सुरक्षा है. 

कंपनी में कितने कर्मचारी हैं?
सीईओ ने अपनी पोस्ट में कंपनी के कर्मचारियों से जुड़ी कुछ जानकारी भी शेयर की. उनके अनुसार, कंपनी में कुल 32 कर्मचारी काम करते हैं. इनमें 14 महिलाएं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी में अलग-अलग राज्यों के लोग काम करते हैं. उनके मुताबिक, 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं और इनमें 12 ऐसे लोग हैं जो दक्षिण भारत के राज्यों से नहीं हैं. सीईओ ने यह भी कहा कि उनकी कंपनी अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमि के लोगों के साथ काम करती है. 

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सोशल मीडिया पर क्यों हो रही बहस?
सीईओ के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोग जमकर कमेंट कर रहे हैं. कुछ लोगों ने कहा कि किसी कर्मचारी के गलत व्यवहार की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होनी चाहिए और उसके आधार पर किसी पूरे राज्य के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी से बाहर करना सही तरीका नहीं है. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति के व्यवहार और उसके राज्य से किस तरह संबंध जोड़ा जा सकता है. वहीं, कुछ लोगों ने सीईओ की बताई गई घटना और कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता का समर्थन किया. फिलहाल इस पूरे मामले ने नौकरी में भर्ती, कर्मचारियों की सुरक्षा और किसी व्यक्ति के व्यवहार को उसके राज्य से जोड़ने जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बहस शुरू कर दी है.

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