शख्स ने एक फ्लैट में पाल रखे थे 300 से ज्यादा अजगर, बिजली बिल से पकड़ा गया

चीन में एक शख्स के फ्लैट से 300 से ज्यादा अजगर बरामद हुए. वह इतने सीक्रेट तरीके से अजगरों को पाल रहा था कि पड़ोसी तक को इस बात की भनक नहीं लगी. ऐसे में जानते हैं कि सीक्रेट तरीके से अजगर पालने के बावजूद कैसे पुलिस उस शख्स के घर तक पहुंची. यह कहानी काफी दिलचस्प है.

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फ्लेट में शख्स ने पाल रखे थे 300 से ज्यादा अजगर (Photo - AI Generated) फ्लेट में शख्स ने पाल रखे थे 300 से ज्यादा अजगर (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:54 PM IST

सोचिए, आपके पड़ोस में रहने वाला एक शख्स सामान्य जिंदगी जीता हुआ दिखाई दे, लेकिन उसके फ्लैट के अंदर सैकड़ों अजगर पल रहे हों. बाहर से देखने पर सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगे.चीन में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां एक फ्लैट से 300 से ज्यादा अजगर बरामद किए गए. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले का सुराग किसी मुखबिर ने नहीं, बल्कि बिजली के बिल ने दिया.

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दरअसल, चीन के झेजियांग प्रांत के ताइझोउ शहर में मार्च 2024 में एक बुजुर्ग व्यक्ति को पहाड़ी इलाके के पास एक बड़ा सा सांप दिखाई दिया. सांप का रंग और आकार देखकर उन्हें लगा कि यह इलाके में मिलने वाली सामान्य प्रजाति नहीं है. उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दे दी.

जब वन्यजीव अधिकारियों ने सांप की जांच की तो पता चला कि वह अजगर था. विशेषज्ञों ने बताया कि यह प्रजाति उस इलाके की मूल प्रजाति नहीं है. इतना ही नहीं, मार्च के महीने में आमतौर पर सांप खुले में ज्यादा सक्रिय भी नहीं होते. ऐसे में अधिकारियों को शक हुआ कि यह किसी के घर या फार्म से भागकर आया है.

यहीं से शुरू हुई जांच की दिलचस्प कहानी. पुलिस ने एक पेशेवर सांप पालक से सलाह ली. उसने अधिकारियों को बताया कि अजगरों को जिंदा रखने के लिए लगातार गर्म और नम वातावरण की जरूरत होती है. इसके लिए तापमान करीब 20 से 30 डिग्री सेल्सियस बनाए रखना पड़ता है, जिसके कारण बिजली की खपत सामान्य घरों की तुलना में काफी ज्यादा होती है.

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इस जानकारी के बाद पुलिस ने इलाके के घरों की बिजली खपत का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया. जांच के दौरान एक फ्लैट पर अधिकारियों की नजर टिक गई. यह फ्लैट गुओ नाम के व्यक्ति का था. गुओ अकेला रहता था, उसकी शादी नहीं हुई थी और उसके पास कोई नियमित नौकरी भी नहीं थी. इसके बावजूद उसके घर में बिजली की खपत असामान्य रूप से अधिक थी.

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को एक और सुराग मिला. दी नाम का एक व्यक्ति अक्सर गुओ के घर आता-जाता था. वह नियमित रूप से कूरियर सेंटर से पार्सल भी उठाता था. जब पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि इन पार्सलों में सफेद चूहे होते थे, जिन्हें ऑनलाइन खरीदा जाता था. चूहों के विक्रेताओं ने बताया कि ऐसे चूहे अक्सर पालतू सांपों को खिलाने के लिए खरीदे जाते हैं.

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इस बीच पुलिस को गुओ के सोशल मीडिया अकाउंट भी मिले. वहां वह समय-समय पर सांपों की तस्वीरें साझा करता था. कुछ पोस्ट में उसने इशारों-इशारों में अजगर बेचने की बात भी कही थी. जांच में यह भी सामने आया कि दी ने दो अजगर किसी अन्य व्यक्ति को करीब 1,000 युआन में बेचे थे.

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अब पुलिस को यकीन हो गया कि मामला अवैध सांप पालन और बिक्री का है. जब पुलिस टीम गुओ के फ्लैट पर पहुंची और दरवाजा खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. फ्लैट का लगभग पूरा हिस्सा अजगरों के कब्जे में था. एक कमरे में गुओ का निजी सामान रखा था, जबकि बाकी दो बेडरूम और लिविंग रूम को सांपों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.

पड़ोसियों को भी नहीं लग पाई थी भनक 
कमरों में प्लास्टिक के सैकड़ों बॉक्स एक के ऊपर एक रखे हुए थे. हर बॉक्स में एक या एक से ज्यादा अजगर मौजूद थे. गिनती पूरी हुई तो अधिकारियों ने कुल 309 अजगर बरामद किए. बाद में इन सभी अजगरों को सुरक्षित रूप से एक स्थानीय चिड़ियाघर में भेज दिया गया. गुओ के पड़ोसियों को भी पता नहीं था कि उसके बगल वाले फ्लैट में 300 से ज्यादा सांप पल रहे हैं. 

पूछताछ में गुओ ने बताया कि उसे बचपन से ही सांपों में दिलचस्पी थी. उसने साल 2014 में चार अजगर खरीदे थे और उसके बाद लगातार इनके ब्रीडिंग पर काम करता रहा. उसने दावा किया कि वह अलग-अलग रंगों के अजगर तैयार करने में सक्षम है. गुओ ने पुलिस से कहा कि मुझे ऐसा लगता था जैसे मैं नए जीव बना रहा हूं.

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जांच में यह भी सामने आया कि गुओ और उसका साथी दी अब तक करीब 80 अजगर बेच चुके थे. पुलिस ने उस दुकानदार देंग को भी गिरफ्तार किया, जिसने साल 2014 में गुओ को शुरुआती चार अजगर बेचे थे. देंग के घर से भी 47 अजगर बरामद हुए.

पूरे मामले में कुल 436 अजगर बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ युआन से ज्यादा बताई गई. भारतीय मुद्रा में यह रकम सैकड़ों करोड़ रुपये के बराबर बैठती है. चीन के कानून के मुताबिक, अजगर संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आते हैं. इनके खरीदने, बेचने, पालने या परिवहन के लिए सरकारी अनुमति जरूरी होती है. बिना अनुमति ऐसा करने पर जेल की सजा हो सकती है.

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अंत में स्थानीय अदालत ने गुओ, दी और देंग तीनों को दोषी मानते हुए जेल भेज दिया. हालांकि उनकी सजा की अवधि सार्वजनिक नहीं की गई. यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक बुजुर्ग की सतर्कता, एक अजगर का भाग निकलना और बिजली के बिल का रिकॉर्ड मिलकर ऐसे अवैध कारोबार का पर्दाफाश कर गए, जिसके बारे में आसपास रहने वाले लोगों को भी भनक तक नहीं थी. 

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