सोचिए, आपने किसी लाइब्रेरी से किताब ली हो और उसे वापस करने में कुछ दिन नहीं, बल्कि करीब 150 साल लग जाएं. इतना ही नहीं, किताब भी किसी अलमारी में नहीं बल्कि घर की बंद पड़ी चिमनी के अंदर एक चाय के डिब्बे में ईंटों से चुनकर रखी मिले. ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के किआमा शहर की एक पब्लिक लाइब्रेरी को उसकी करीब 150 साल पुरानी किताब वापस मिली है. यह किताब हाल ही में एक घर की मरम्मत के दौरान मिली थी. स्थानीय निवासी रॉस सिमंस को यह किताब अपने घर की बंद पड़ी चिमनी के अंदर एक चाय के क्रेट में मिली. इसके बाद उन्होंने इसे किआमा लाइब्रेरी को लौटा दिया.लाइब्रेरी की मैनेजर मिशेल हडसन के मुताबिक, उन्होंने पहले कभी इतनी पुरानी किताब वापस आते नहीं देखी थी.
घर की मरम्मत के दौरान मिला 150 साल पुराना 'राज'
रॉस सिमंस अपने घर में कुछ निर्माण और मरम्मत का काम करा रहे थे. इसी दौरान उन्हें सील की गई चिमनी के अंदर एक चाय का डिब्बा मिला. डिब्बे को ईंटों से बंद कर दिया गया था. जब इसे खोला गया तो उसके अंदर एक पुरानी किताब मिली. किताब की हालत देखकर पता चला कि यह कोई सामान्य पुरानी किताब नहीं थी. जांच करने पर पता चला कि यह किताब 'एंटिक्विटी ऑफ एथेंस'है, जिसे साल 1858 में प्रकाशित किया गया था.
सिमंस ने जब किताब को देखा तो उन्हें अंदाजा हुआ कि शायद यह उनके परिवार से जुड़ी हो सकती है. उनका मानना है कि इसे उनके परदादा के भी परदादा, जॉन सिमंस ने लाइब्रेरी से लिया होगा. उन्होंने बताया कि जॉन सिमंस उस समय इसी घर में रहते थे. हालांकि, यह सिर्फ उनका अनुमान है, क्योंकि किताब के आखिरी पाठक का कोई रिकॉर्ड अब मौजूद नहीं है.
किआमा लाइब्रेरी की शुरुआत 1872 में हुई थी. उस समय लाइब्रेरी के शुरुआती कलेक्शन में करीब 1,000 किताबें थीं. 'एंटिक्विटीज ऑफ एथेंस' भी उन्हीं किताबों में शामिल थी. लाइब्रेरी के रिकॉर्ड के मुताबिक इस किताब को नंबर 506 दिया गया था.
लाइब्रेरी मैनेजर मिशेल हडसन का मानना है कि किताब लाइब्रेरी शुरू होने के कुछ ही साल बाद गायब हो गई होगी. लेकिन इसे किसने लिया था और वह किताब वापस क्यों नहीं आई, इसका कोई पक्का जवाब अब किसी के पास नहीं है.
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि 1870 के दशक में किताबें उधार लेने वाले लोगों के रिकॉर्ड अब लाइब्रेरी के पास नहीं हैं. हडसन ने कहा कि किताब में ऐसा कुछ नहीं है जिससे पता चल सके कि इसे आखिरी बार किसने उधार लिया था.
150 साल की देरी का जुर्माना कितना होता?
अगर आज के हिसाब से उस किताब पर पुराना नियम लागू किया जाए तो उसका लेट फाइन सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. किताब के अंदर लाइब्रेरी के पुराने नियम लिखे हुए हैं. इनमें बताया गया था कि किताब देर से लौटाने पर हर हफ्ते तीन पेंस का जुर्माना देना होता था.
करीब 150 साल की देरी और महंगाई को ध्यान में रखते हुए लाइब्रेरी ने अनुमान लगाया कि आज के हिसाब से यह जुर्माना करीब 28,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, यानी लगभग 19,500 अमेरिकी डॉलर बैठता है.
हालांकि, रॉस सिमंस को इस बात की चिंता नहीं थी कि उन्हें अपने परिवार की ओर से कोई पुराना जुर्माना भरना पड़ेगा. 77 साल के सिमंस ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी नाराज ग्राहकों से निपटते हुए बिताई है. इसलिए अगर कोई लाइब्रेरियन उनके परिवार से नाराज होता भी तो वह उसका सामना कर लेते.
1870 के लाइब्रेरी नियम भी कम दिलचस्प नहीं थे
यह किताब सिर्फ 150 साल पुरानी नहीं है, बल्कि इसके अंदर उस दौर की लाइब्रेरी के नियम भी दर्ज हैं. इनमें से कुछ नियम आज के समय में काफी अजीब लग सकते हैं. मसलन, किसी ऐसे परिवार को 'तीन किताब तक' उधार लेने की अनुमति थी, जिसमें कम से कम छह लोग हों और सभी पढ़ना जानते हों.
यानी उस समय लाइब्रेरी से किताब लेने के लिए सिर्फ सदस्य होना काफी नहीं था, परिवार के पढ़े-लिखे होने का भी हिसाब रखा जाता था. एक और नियम था कि अगर कोई व्यक्ति लाइब्रेरी में नशे की हालत में पहुंचता है तो उसे किताब उधार नहीं दी जाएगी. आज लाइब्रेरी में ऐसा कोई खास नियम नहीं है. अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार से दूसरे लोगों को परेशानी होती है तो उसे वहां से जाने के लिए कहा जा सकता है.
शायद इसी वजह से किताब वापस नहीं आई!
उस समय के नियमों के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के पास पहले से कोई किताब बकाया है और उसका जुर्माना बाकी है, तो वह दूसरी किताब उधार नहीं ले सकता था. किआमा लाइब्रेरी की मैनेजर मिशेल हडसन ने मजाक में कहा कि शायद इसी वजह से किसी ने किताब वापस करने की जरूरत ही महसूस नहीं की.
लेकिन असली वजह क्या थी, यह अब शायद कभी पता नहीं चलेगा. रॉस सिमंस ने भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि उनके अंग्रेजी मूल के पूर्वज जॉन सिमंस ने किताब वापस क्यों नहीं की. जॉन सिमंस किआमा की स्थानीय नगरपालिका में एल्डरमैन भी रह चुके थे.
अब दोबारा कभी उधार नहीं जाएगी ये किताब
करीब डेढ़ सदी बाद किताब आखिरकार अपनी लाइब्रेरी में वापस पहुंच गई है. लेकिन इस बार इसे दोबारा किसी को उधार नहीं दिया जाएगा. किआमा लाइब्रेरी ने फैसला किया है कि 'एंटिक्विटीज ऑफ एथेंस' को उसकी लोकल हिस्ट्री कलेक्शन में रखा जाएगा.
लाइब्रेरी मैनेजर मिशेल हडसन ने कहा कि वे इस किताब को दोबारा बाहर नहीं भेजना चाहते. आखिर वे अगले 150 साल तक इसके वापस आने का इंतजार नहीं करना चाहते.
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इस तरह एक किताब, जो करीब डेढ़ सौ साल पहले लाइब्रेरी से निकली थी, अब एक बंद चिमनी से होते हुए वापस अपनी पुरानी जगह पहुंच गई है. लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा रहस्य अब भी कायम है- आखिर 150 साल पहले इस किताब को लाइब्रेरी से लेकर गया कौन था?
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