Jahaz Mahal Mandu: दो तालाबों के बीच बना है मांडू का जहाज महल, खूबसूरती देख लौटने का नहीं करेगा दिल

Jahaz Mahal Mandu: मध्य प्रदेश के मांडू में स्थित जहाज महल अपनी अनोखी बनावट के लिए मशहूर है. मुंज तालाब और कपूर तालाब के बीच बना यह महल पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है. इसकी खूबसूरती के साथ-साथ पुराने समय की जल प्रबंधन व्यवस्था और शानदार वास्तुकला भी इसे खास बनाती है.

Advertisement
पानी में तैरते जहाज जैसा दिखता है मांडू का जहाज महल (Photo- ITG) पानी में तैरते जहाज जैसा दिखता है मांडू का जहाज महल (Photo- ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

Jahaz Mahal Mandu: भारत में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं जो अपनी खूबसूरती और अनोखी बनावट के लिए जानी जाती हैं. मध्य प्रदेश के मांडू में बना जहाज महल भी ऐसी ही एक ऐतिहासिक जगह है. इस महल को देखकर ऐसा लगता है, जैसे पानी के बीच कोई बड़ा जहाज खड़ा हो. इसकी एक तरफ मुंज तालाब और दूसरी तरफ कपूर तालाब है जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. यह महल अपनी शानदार वास्तुकला के साथ-साथ पुराने समय की जल प्रबंधन व्यवस्था के लिए भी खास माना जाता है. आइए जानते हैं मांडू के जहाज महल की खासियत और इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

Advertisement

कहां स्थित है जहाज महल?

जहाज महल मध्य प्रदेश के मांडू में स्थित है. यह मांडू के शाही परिसर यानी रॉयल एन्क्लेव के उत्तरी हिस्से में बना हुआ है. विंध्य पर्वतमाला में लगभग 2,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बसे मांडू में पानी की कमी थी. ऐसे में यहां बारिश के पानी को जमा करने और उसका इस्तेमाल करने के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी. जहाज महल के दोनों तरफ बने तालाब इसी जल प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा थे.

क्यों पड़ा जहाज महल नाम?
जहाज महल का निर्माण 15वीं शताब्दी के आखिरी दौर में सुल्तान गियासुद्दीन खिलजी के शासनकाल में कराया गया था. इसका निर्माण लगभग 1469 से 1500 के बीच माना जाता है. महल दो मंजिला है और इसकी ऊंचाई लगभग 9.7 मीटर है. मुंज तालाब और कपूर तालाब के बीच बने होने की वजह से यह पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है. इसी कारण इसे जहाज महल कहा जाता है. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसका इस्तेमाल सुल्तान के आराम और मनोरंजन के लिए किया जाता था.

Advertisement

पुराने समय की जल प्रबंधन व्यवस्था है खास
जहाज महल की सबसे दिलचस्प बात यहां पानी को जमा करने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की व्यवस्था है. मांडू ऊंचाई पर बसा हुआ था और पुराने समय में यहां नर्मदा नदी से पानी लाना आसान नहीं था. इसलिए बारिश के पानी को जमा करने के लिए तालाब और जलाशय बनाए गए थे.

महल के दोनों तरफ बने मुंज और कपूर तालाब पानी जमा करने का काम करते थे. इन तालाबों को अलग-अलग स्तर पर बनाया गया था, ताकि पानी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और साफ करने में मदद मिल सके. महल में पानी पहुंचाने के लिए भूमिगत रास्तों, छोटी टंकियों और पाइप जैसी संरचनाओं का इस्तेमाल किया जाता था. छत पर जमा बारिश के पानी को भी विशेष रास्तों से नीचे लाया जाता था.

पानी को साफ करने के लिए रेत और दूसरे फिल्टर करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल किए जाने का भी उल्लेख मिलता है. इस तरह पानी को जमा करने, साफ करने और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनाई गई थी. यह उस दौर की तकनीकी समझ और वास्तुकला का उदाहरण है.

महल की छत और गुंबद भी हैं आकर्षण
जहाज महल की छत पर बने मंडप, गुंबद और छोटी मीनारें इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं. यहां अलग-अलग आकार के गुंबद और छतें देखने को मिलती हैं. महल के उत्तरी और दक्षिणी सिरों पर बने बड़े मंडपों में बीच में विशाल गुंबद और दोनों तरफ पिरामिड जैसी छतें हैं.

Advertisement

महल की दीवारों पर बने मेहराबदार दरवाजे, सजावटी खिड़कियां और नक्काशीदार हिस्से इसकी वास्तुकला को खास बनाते हैं. पूर्वी हिस्से में संगमरमर के मेहराबदार प्रवेश द्वार के ऊपर एक मंडप बना है, जबकि पश्चिमी हिस्से में बड़ा गुंबद और बालकनी वाला मंडप दिखाई देता है.

घूमने के लिए क्यों है खास?
अगर आपको इतिहास, पुराने महल और वास्तुकला देखने में दिलचस्पी है तो जहाज महल को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं. यहां की बनावट, आसपास के तालाब और ऊंचाई से दिखाई देने वाले नजारे इसे खास बनाते हैं. मांडू में जहाज महल के अलावा भी कई ऐतिहासिक इमारतें और स्मारक हैं, जिन्हें एक ही यात्रा में देखा जा सकता है.

जहाज महल सिर्फ एक खूबसूरत ऐतिहासिक इमारत नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पुराने समय में पानी जैसी जरूरी चीज को सहेजने के लिए किस तरह योजनाबद्ध तरीके अपनाए जाते थे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »