Maharashtra Forts For Trekking: मॉनसून आते ही महाराष्ट्र के ट्रैवल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगती है, क्योंकि बारिश का मौसम आते ही महाराष्ट्र की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. सह्याद्रि की पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं, झरने पूरे वेग से बहने लगते हैं और घाटियों में बादलों का डेरा जम जाता है. खासकर यहां के ऐतिहासिक किले इस मौसम में किसी जादुई दुनिया जैसे दिखाई देते हैं, ट्रेकिंग के शौकीन, फोटोग्राफर और हिस्ट्री लवर्स हर साल मानसून के दौरान इन किलों का रुख करते हैं.
हालांकि महाराष्ट्र का ऐतिहासिक लोहागढ़ किला एक केतन मर्डर केस के चलते सुर्खियों में बना हुआ है. पूणे के 26 साल के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल के मर्डर ने पूरे देश में एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है. केतन को उनकी 20 साल की मंगेतर सिया गोयल ने कथित तौर पर अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर लोहागढ़ किले से 400 फीट नीचे धक्का दे दिया था.
अगर आप भी इस मानसून एडवेंचर का प्लान बना रहे हैं, तो लोहागढ़ किला के अलावा महाराष्ट्र के यह शानदार किले भी आप घूम सकते हैं. बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए पूरी तैयारी के साथ ही ट्रेक पर निकलना चाहिए.
सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित लोहागढ़ किला मानसून ट्रेकिंग के लिए सबसे पॉपुलर जगहों में से एक है. समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला अपने मजबूत निर्माण और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है. Maharashtra Tourism के मुताबिक, इस किले का शुरुआती निर्माण सातवाहन राजवंश के समय हुआ था.
लोहागढ़ का अर्थ होता है लोहे का किला. यह किला कई शासकों के अधीन रहा और बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ गया. इस किले में लोग सबसे ज्यादा विंचू कटा देखने जाते हैं जो बिच्छू की पूंछ जैसी आकृति वाला एक लंबा किलेबंद हिस्सा है. मानसून में यहां से दिखाई देने वाले बादलों और हरियाली देखकर दिल खुश हो जाता है.
पूणे का राजगढ़ किला भी बारिश के दिनों में सबसे अलह और शानदार लगता है, जहां हर साल भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यह कभी मराठा साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था. करीब 20 सालों तक यह प्रशासनिक और रणनीतिक केंद्र बना रहा. लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला सह्याद्रि की पर्वत श्रृंखलाओं का शानदार नजारा दिखाता है.
बारिश के मौसम में यहां की ट्रेकिंग और भी एक्साइटिंग हो जाती है. किले का बड़ा इलाका, कई बुरुज और विस्तृत पठार इसे एक्सप्लोर करने के लिए बेस्ट जगह बनाते हैं. इतिहास और एडवेंचर का बेहतरीन कॉम्बिनेशन इस जगह को परफेक्ट टूरिस्ट स्पॉट बनाते हैं.
इतिहास, पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सुंदरता का संगम देखने के लिए हरिश्चंद्रगढ़ किला बेहतरीन ऑप्शन है. यह किला अपने फेमस कोंकण कडा के लिए जाना जाता है, जो महाराष्ट्र के सबसे शानदार व्यू पॉइंट्स में से एक माना जाता है.
मानसून में यहां का ट्रेक घने जंगलों, चट्टानी रास्तों और पुरानी गुफाओं से होकर गुजरता है. बादलों से घिरी घाटियां और दूर-दूर तक फैली हरियाली ट्रेकर्स को खूब अट्रैक्ट करती हैं.
रायगढ़ किला मराठा इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समेटे हुए है, यहीं पर साल 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था. यह किला लंबे समय तक मराठा साम्राज्य की राजधानी भी रहा.
मानसून के दौरान रायगढ़ की नेचुरल ब्यूटी अपने चरम पर होती है. यहां पहुंचने के लिए टूरिस्ट ऐतिहासिक सीढ़ियों से ट्रेक कर सकते हैं या फिर रोपवे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. किले से दिखाई देने वाले बादलों से घिरे पहाड़ और घाटियां अलग ही एक्सपीरियंस देते हैं.
पुणे के पास स्थित सिंहगढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे मशहूर और सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले किलों में शामिल है. पहले इसे कोंढाणा किले के नाम से जाना जाता था, लेकिन 1670 में हुई सिंहगढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई के बाद इसका नाम अमर हो गया.
यहीं पर वीर तानाजी मालुसरे ने मुगलों के खिलाफ बहादुरी से युद्ध लड़ा था. मानसून में यहां तक पहुंचने का रास्ता बेहद खूबसूरत हो जाता है. ट्रेक के दौरान रास्ते में मिलने वाली चाय और गरमा-गरम स्थानीय स्नैक्स इस सफर का मजा और बढ़ा देते हैं.
टिकोना किला, जिसे वितंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिमी भारत के मावल क्षेत्र में स्थित एक फेमस पहाड़ी किला है. यह पुणे से लगभग 60 किलोमीटर दूर कामशेत के पास मौजूद है. करीब 3,500 फीट ऊंची यह पहाड़ी त्रिकोणीय आकार की है, इसी वजह से इसका नाम टिकोना पड़ा. बारिश के मौसम में यहां से दिखाई देने वाली पवना झील और आसपास की हरी-भरी घाटियां मन मोह लेती हैं. ट्रेक के दौरान आपको प्राचीन गुफाएं, मंदिर भी देखने को मिलेंगे.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क