भारत के इस राज्य में है एशिया का सबसे साफ गांव, सुंदर इतना कि बसने का मन कर जाएगा

बिना किसी सफाईकर्मी के भारत का यह गांव पिछले 22 सालों से स्वच्छता की मिसाल पेश कर रहा है. प्लास्टिक मुक्त और ईको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल वाले इस गांव की खूबसूरती देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि एशिया का सबसे स्वच्छ गांव 'मावलिननॉन्ग' आखिर किस राज्य में है और क्या की क्या खासियत है.

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एशिया के सबसे साफ गांव शिलॉंग के पास है. (PHOTO:ITG) एशिया के सबसे साफ गांव शिलॉंग के पास है. (PHOTO:ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST

Cleanest Village India: दुनियाभर में भारत का एक गांव अपनी साफ-सफाई के लिए काफी फेमस है, जिसे देखने के लिए विदेशोंं से लोग आते हैं. सबसे खास बात यह है कि इस गांव में एक भी सफाईकर्मी नहीं है, लेकिन उसके बाद भी यह पिछले 22 साल से टॉप पर बना हुआ है. इस छोटे से गांव का का नाम मावलिननॉन्ग है. अगर आप भी नई-नई जगहें देखना पसंद करते हैं तो गर्मियों में हीटवेव से बचने के लिए आप इस गांव की ट्रिप प्लान कर सकते है. आइए जानते हैं कि एशिया का सबसे साफ गांव आखिर भारत के किस प्रदेश में है और यहां पर कैसे पहुंच सकते हैं.

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मावलिननॉन्ग गांव पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में स्थित है, इसे एशिया का सबसे स्वच्छ गांव भी कहा जाता है. करीबन 22 साल से यह गांव सफाई के मामले में टॉप पर है और इसी वजह से यह न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है और इस छोटे से गांव की दुनियाभर में तारीफ होती है, क्योंकि बिना किसी सफाई कर्मचारी के भी यह सबसे ज्यादा साफ-सुथरा गांव है. 

कैसे बना सबसे साफ गांव

मावलिननॉन्ग जहां कोई सफाईकर्मी नहीं है तो यह गांव कैसे सबसे साफ है. ये सवाल हर किसी के मन में आता है, लेकिन इस गांव की सबसे खास बात ही यही है कि यहां के लोगों की सोच है. इस गांव के हर इंसान को साफ-सफाई की जिम्मेदारी दी जाती है, यहां बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग मिलकर अपने गांव को साफ रखते हैं. लोग कहीं भी कचरा नहीं फेंकते और हर जगह आपको बांस से बने डस्टबिन दिखाई देंगे.

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प्लास्टिक पर पूरी तरह है बैन

दुनियाभर में प्लास्टिक बैन को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है, कुछ देशों में इस पर प्रतिबंध भी लगा रखा है. भारत में भी इसे लेकर अक्सर ही लोगों को समझाया जाता है कि वो जितना हो सके प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें, लेकिन उसके बावजूद धड़ल्ले से प्लास्टिक का यूज होता है.

मगर मेघालय में स्थित इस छोटे से गांव मावलिननॉन्ग में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है. यहां के लोग पर्यावरण की रक्षा को बहुत गंभीरता से लेते हैं और प्लास्टिक की जगह वे बांस और दूसरे प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि गांव में हरियाली और स्वच्छता दोनों बनी रहती है, क्योंकि लोग कचरा ही कम करते हैं.

साफ-सफाई की अनोखी व्यवस्था

मावलिननॉन्ग में हर घर के बाहर और गलियों में सफाई का खास ध्यान रखा जाता है, यहां रोजाना सफाई की जाती है. कचरे को भी लोग  जैविक और अजैविक कचरे में अलग-अलग बांटकर रखते हैं. कचरा भी यहां पर काम की चीज है, क्योंकि जैविक कचरे से लोग अपने खेतों के लिए नेचुरल खाद बनाते हैं.

लाइफस्टाइल का हिस्सा है सफाई

इस गांव के लोगों के लिए साफ-सफाई सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का हिस्सा है. बच्चों को छोटी उम्र से ही स्वच्छता का महत्व सिखाया जाता है, स्कूलों में भी साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि यहां के लोग हमेशा अपने वातावरण को साफ रखने के लिए प्रेरित रहते हैं.

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गांव की सुंदरता देखने आते हैं टूरिस्ट

मावलिननॉन्ग अब एक फेमस टूरिस्ट प्लेस बन चुका है, देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इस गांव को देखने आते हैं. यहां की साफ-सुथरी सड़कें, हरियाली और नेचर की खूबसूरती लोगों को बहुत अट्रैक्ट करती है. गांव में एक स्काई वॉक भी है, जहां से आसपास के सुंदर नजारे देखे जा सकते हैं.

संडे नहीं मिलेगी गांव में एंट्री

रोजाना मावलिननॉन्ग हजारों लोग आते हैं और वहां की हरियाली और सुकून भरी जिंदगी का मजा लेते हैं. मगर साल 2023 के बाद से एक नियम बनाया गया है, जिसके मुताबिक रविवार के दिन किसी बाहरी को गांव में एंट्री नहीं मिलती है, इसलिए अगर आप भी मावलिननॉन्ग जाने का प्लान बना रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप संडे वहां न जाएं.

मावलिननॉन्ग जाने का रूट

इस गांव तक जाने के लिए पहले गुवाहाटी या शिलॉंग पहुंचना होगा. यहां से टैक्सी लेकर शिलॉन्ग होते हुए मावलिननॉन्ग जा सकते हैं. शिलॉन्ग से दूरी करीब 80 से 90 किमी है, जिसमें 2.5 से 3 घंटे लगते हैं, रास्ते में डावकी की खूबसूरत नदी भी देखने को मिलती है, जो सफर को और यादगार बना देती है.
 

 

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