No Roads Village Giethoorn: सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम, गाड़ियों के हॉर्न की आवाज सुनने की शायद लोगों को अब आदत हो चुकी है. भारत में तो यह काफी ज्यादा आम है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे सोचा है, जहां न सड़कें हों, न कारें और न ही ट्रैफिक का शोर? जहां लोग ऑफिस, स्कूल या बाजार जाने के लिए नाव का इस्तेमाल करते हों. सुनने में यह किसी फिल्म या कहानी जैसा लगता है, लेकिन दुनिया में एक ऐसा गांव सचमुच मौजूद है.
नीदरलैंड का एक गांव अपनी इसी खासियत की वजह से दुनियाभर के लोगों की ड्रीम डेस्टिनेशन बन चुका है. हर साल भारी संख्या में लोग इस गांव में अपनी फैमिली या पार्टनर के साथ वेकेशन मनाने आते हैं. अगर आप भी विदेश यात्रा का सपना देखते हैं और भीड़भाड़ से दूर किसी शांत जगह पर घूमना चाहते हैं, तो यह गांव आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए.
आइए जानते हैं आखिर क्यों इस गांव को दुनिया के सबसे अनोखे गांवों में गिना जाता है.
जहां सड़कें नहीं, सिर्फ नहरें हैं
गीथॉर्न नीदरलैंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में ओवराइसेल प्रांत में स्थित है. यह एम्स्टर्डम से करीब 120 किलोमीटर दूर है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पुराने हिस्से में एक भी सड़क नहीं है. यहां आने-जाने का मुख्य रास्ता नहरें हैं. गांव में जगह-जगह छोटी-छोटी नहरें बनी हुई हैं, जिन पर 170 से ज्यादा लकड़ी के पुल बने हैं. लोग इन्हीं पुलों से पैदल चलते हैं और लंबी दूरी तय करने के लिए नाव का इस्तेमाल करते हैं.
क्यों बना ऐसा गांव?
इस इलाके में सदियों पहले पीट यानी दलदली मिट्टी निकाली जाती थी. खुदाई के दौरान यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिनको बाद में पानी से भरकर रखा गया था, जो नहरों और झीलों में बदल गए. धीरे-धीरे लोगों ने इन्हीं जलमार्गों के किनारे अपने घर बना लिए. समय के साथ यह पूरा गांव पानी पर बसा एक खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट बन गया.
नाव से घूमना है सबसे खास अनुभव
गीथॉर्न घूमने का सबसे मजेदार तरीका नाव की सैर है, यहां टूरिस्ट छोटी इलेक्ट्रिक नाव किराए पर लेकर खुद नहरों में घूम सकते हैं. इलेक्ट्रिक नाव होने की वजह से शोर भी नहीं होता और पूरे गांव में सुकून भरा माहौल बना रहता है.
अगर आप खुद नाव नहीं चलाना चाहते, तो गाइडेड बोट टूर भी मौजूद हैं. इसके अलावा कयाक, कैनो और स्टैंड-अप पैडलबोर्ड जैसी एक्टिविटीज का भी मजा आप यहां पर ले सकते हैं.
हर कोना है फोटो खिंचवाने लायक
गीथॉर्न की पहचान इसके खूबसूरत घास-फूस छत वाले घर, रंग-बिरंगे फूलों से सजे बगीचे और शांत नहरें हैं. गांव का लगभग हर पुल और हर गली फोटो क्लिक करने के लिए बेहतरीन जगह मानी जाती है, इसलिए दूर-दूर से लोग यहां पर फोटोशूट कराने भी आते हैं. सुबह और शाम के समय यहां का नजारा और भी ज्यादा मनमोहक हो जाता है, जब पर्यटकों की भीड़ कम हो जाती है.
नेचर लवर्स के लिए है जन्नत
यह गांव डी वेरिब्बेन-वीडेन नेशनल पार्क के बीचों-बीच बसा है, जो उत्तर-पश्चिमी यूरोप का सबसे बड़ा वेटलैंड इलाका माना जाता है. यहां झीलें, दलदली इलाके, हरे-भरे पेड़ और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं. बर्ड वॉचिंग, साइकिलिंग और नेचर वॉक पसंद करने वालों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं.
भारत से कैसे पहुंचे?
अगर आप भारत से गीथॉर्न जाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम पहुंचना होगा. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से एम्स्टर्डम के लिए फ्लाइट्स मिल जाती हैं.
एम्स्टर्डम से ट्रेन के जरिए स्टीनवाइक स्टेशन पहुंचें. वहां से बस के जरिए करीब 20 मिनट में गीथॉर्न पहुंचा जा सकता है. पूरा सफर लगभग 2 से 2.5 घंटे का होता है. अगर आप कार से जा रहे हैं, तो गांव के बाहर बनी पार्किंग में गाड़ी खड़ी कर सकते हैं, क्योंकि गांव के अंदर कारों की एंट्री नहीं है.
घूमने का सबसे अच्छा समय
अप्रैल से जून: फूलों से सजा गांव और सुहावना मौसम.
जुलाई से अगस्त: नाव की सैर के लिए बेहतरीन समय, लेकिन पर्यटकों की भीड़ ज्यादा रहती है.
सितंबर से नवंबर: कम भीड़ और सुनहरे रंगों में रंगा खूबसूरत गांव.
दिसंबर से फरवरी: अगर कड़ाके की ठंड में नहरें जम जाएं, तो लोग नाव की जगह बर्फ पर स्केटिंग करते नजर आते हैं. यह नजारा किसी परी की कहानी जैसा लगता है.
क्यों करें गीथॉर्न का सफर?
अगर आपको भीड़भाड़ वाले शहरों से दूर शांति, प्राकृतिक सुंदरता और अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस पसंद है, तो गीथॉर्न आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. यहां न ट्रैफिक का शोर है, न भागदौड़. सिर्फ शांत पानी, खूबसूरत घर, लकड़ी के पुल और प्रकृति की गोद में बिताए यादगार पल. यही वजह है कि हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक इस अनोखे गांव को देखने पहुंचते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क