एक स्मार्टफोन से दूसरा स्मार्टफोन कैसे चार्ज होता है? वायर्ड और वायरलेस चार्जिंग का तरीका जानें

इन दिनों स्मार्टफोन में 10000mAh तक की बैटरी दी जा रही है. कई बार आप दूसरे स्मार्टफोन को पावर बैंक की तरह यूज कर सकते हैं. एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल को वायर्ड या वायरलेस दोनों ही तरह से चार्ज किया जा सकता है.

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स्मार्टफोन से स्मार्टफोन कैसे चार्ज होता है? स्मार्टफोन से स्मार्टफोन कैसे चार्ज होता है?

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST

कभी ऐसा हुआ है कि आपका फोन बंद होने वाला है, लेकिन आसपास चार्जर या पावर बैंक नहीं है? ऐसे समय में दूसरा स्मार्टफोन काम आ सकता है. आजकल कुछ फोन में ऐसा फीचर मिलता है, जिससे एक फोन की बैटरी से दूसरे फोन को चार्ज किया जा सकता है. मार्केट में अब पावर बैंक की डिमांड पहले से कम है. इसकी एक वजह ये भी है कि अब कंपनियां स्मार्टफोन में 7000 से लेकर 9000mAh तक की बैटरी देने लगे हैं. ये खुद एक पावर बैंक की तरह काम कर सकते हैं.

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एक स्मार्टफोन से दूसरे स्मार्टफोन चार्ज करने को रिवर्स चार्जिंग कहा जाता है. इसमें एक फोन अपनी बैटरी की बिजली दूसरे फोन को देता है. यह काम बिना तार के भी हो सकता है और कुछ फोन में तार की मदद से भी किया जा सकता है. लेकिन हर फोन में यह सुविधा नहीं होती और हर फोन दूसरे फोन को एक ही तरीके से चार्ज भी नहीं कर सकता.

फोन से फोन चार्ज कैसे होता है?

फोन से फोन चार्ज करने के दो तरीके हो सकते हैं. पहला तरीका बिना तार के चार्ज करने का है. इसमें एक फोन अपनी बैटरी की बिजली दूसरे फोन को बिना किसी तार के देता है. पावर शेयरिंग इन दिनों बड़ी बैटरी वाले स्मार्टफोन्स में दिया जा रहा है.

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दूसरा तरीका चार्जिंग केबल के जरिए हो सकता है. इसमें दोनों फोन को केबल से जोड़कर एक फोन दूसरे को बिजली दे सकता है. हालांकि यह सुविधा फोन के मॉडल और उसमें मौजूद तकनीक पर निर्भर करती है. कुछ स्मार्टफोन में इस फीचर का नाम बैटरी शेयर है, जबकि सैमसंग के कुछ फोन में इसे वायरलेस पावरशेयर कहा जाता है.

दूसरे फोन को चार्ज करने के लिए क्या चाहिए?

सबसे जरूरी बात यह है कि जिस फोन से आप दूसरे फोन को चार्ज करना चाहते हैं, उसमें रिवर्स चार्जिंग का फीचर होनी चाहिए. अगर बिना केबल के चार्ज करना है, तो दूसरे फोन में भी वायरलेस चार्जिंग की फीचर होनी चाहिए. सिर्फ फोन में वायरलेस चार्जिंग होना काफी नहीं है. दोनों फोन का आपस में काम करना भी जरूरी है. गूगल के पिक्सल फोन में बैटरी शेयर नाम का फीचर मिलता है. इसके जरिए दूसरे वायरलेस चार्जिंग वाले फोन या दूसरी चीजों को चार्ज किया जा सकता है. 

सैमसंग के कुछ Galaxy स्मार्टफोन्स में वायरलेस पावरशेयर की सुविधा मिलती है. इसके जरिए दूसरे ऐसे फोन या उपकरण को चार्ज किया जा सकता है जो इस तकनीक को सपोर्ट करते हों. 

बिना तार के फोन को फोन से कैसे चार्ज करें?

मान लीजिए आपके पास ऐसा फोन है जिसमें वायरलेस पावरशेयर की सुविधा है. यानी आपको पता है कि वो फोन वायरलेस पावर शेयर को सपोर्ट करता है. ऐसे में  सबसे पहले फोन की सेटिंग्स से वायरलेस पावर शेयर चालू करना होगा. इसके बाद दूसरे फोन को पहले फोन की पिछे तरफ रखना होगा. दोनों ही स्मार्टफोन के बैक पैनल एक दूसरे से चिपके हुए हों, तभी ये फीचर काम करता है. 

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दोनों फोन की चार्जिंग वाली जगह एक-दूसरे के सही सामने होनी चाहिए. अगर फोन सही जगह पर नहीं रखा है, तो चार्जिंग शुरू नहीं होगी या बहुत धीमी हो सकती है. फोन का कवर भी कई बार परेशानी पैदा कर सकता है. अगर चार्जिंग शुरू नहीं हो रही है, तो कवर हटाकर दोनों फोन को फिर से सही जगह पर रखें. 

गूगल पिक्सल में इसी काम के लिए बैटरी शेयर फीचर मिलता है. इसे फोन की सेटिंग में जाकर चालू किया जा सकता है. इसके बाद दूसरे ऐसे फोन को पिक्सल के पीछे रखा जा सकता है जो वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता हो.  

क्या फोन से फोन चार्ज करना तेज चार्जिंग है?

नहीं. इसे सामान्य चार्जर वाली तेज चार्जिंग के बराबर नहीं समझना चाहिए. फोन से फोन चार्ज करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आपके पास चार्जर या पावर बैंक नहीं है, तब दूसरे फोन को थोड़ी बैटरी दी जा सकती है. इसे किसी फोन को जल्दी से 100 फीसदी चार्ज करने के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है.

चार्जिंग की स्पीड फोन, टेंप्रेचर और दोनों फोन की सही स्थिति पर निर्भर करती है. क्या इससे फोन की बैटरी जल्दी खत्म होगी? जिस फोन से दूसरे फोन को चार्ज किया जा रहा है, उसकी बैटरी कम होगी. आखिर वही फोन दूसरे फोन को बिजली दे रहा है.

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इसके अलावा वायरलेस चार्जिंग में कुछ बिजली गर्मी के रूप में भी निकल सकती है. इसलिए रिवर्स चार्जिंग को रोज इस्तेमाल करने के बजाय जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करना बेहतर है. गूगल पिक्सल में बैटरी शेयर के लिए एक सीमा भी तय की जा सकती है, ताकि फोन की बैटरी एक तय स्तर तक पहुंचने पर यह सुविधा अपने आप बंद हो जाए.

क्या फोन गर्म हो सकता है?

हां, चार्जिंग के दौरान फोन गर्म हो सकता है. खासकर वायरलेस रिवर्स चार्जिंग में दोनों फोन एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं. अगर फोन ज्यादा गर्म हो जाए, तो चार्जिंग धीमी हो सकती है या कुछ फोन खुद ही चार्जिंग बंद कर सकते हैं. इसलिए अगर फोन बहुत गर्म हो रहा है, तो चार्जिंग रोक देना बेहतर है.

क्या iPhone को Android फोन से चार्ज कर सकते हैं?

यह फोन के मॉडल और इस्तेमाल किए जा रहे तरीके पर निर्भर करता है. अगर एंड्रॉयड फोन में रिवर्स वायरलेस चार्जिंग है और दूसरा फोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है, तो दोनों आपस में काम कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ इसलिए कि दोनों फोन में यूएसबी-सी पोर्ट है, इसका मतलब यह नहीं है कि एक फोन दूसरे को जरूर चार्ज करेगा. यूएसबी-सी सिर्फ जोड़ने वाले पोर्ट का नाम है. बिजली देने और लेने की क्षमता फोन में मौजूद तकनीक पर निर्भर करती है.

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