कंटेंट हटाने पर सरकार का बड़ा खुलासा, 99% मामलों में प्लेटफॉर्म खुद लेते हैं फैसला!

सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने को लेकर सरकार पर सेंसरशिप के आरोप लगते रहे हैं. अब MeitY सचिव ने बताया कि सिर्फ 0.01% कंटेंट सरकार के कहने पर हटता है, जबकि 99% कंटेंट प्लेटफॉर्म खुद हटाते हैं.

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आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:25 PM IST

सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने को लेकर अक्सर सरकार पर सेंसरशिप और लोगों की आवाज दबाने के आरोप लते रहते हैं. अब इस मामले पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया से हटाए जाने वाले ज्यादातर कंटेंट को सरकार नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद अपने नियमों के तहत हटाते हैं.

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बिजनेस टुडे के BT@100 समिट में बातचीत के दौरान एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार की तरफ से सीधे तौर पर सिर्फ करीब 0.01% कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने के लिए कहा जाता है. वहीं करीब 99% कंटेंट सोशल मीडिया कंपनियां अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के आधार पर खुद हटाती हैं.

कृष्णन ने सरकार पर सोशल मीडिया कंटेंट को सेंसर करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार इस तरह से कंटेंट को सेंसर नहीं करती है. उन्होंने बताया कि आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कंटेंट को ब्लॉक करने की शक्ति सरकार के पास है, लेकिन इसका इस्तेमाल काफी कम और खास मामलों में किया जाता है.

किन मामलों में सरकार कर सकती है कार्रवाई?

एस. कृष्णन के मुताबिक, कुछ खास परिस्थितियों में सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने के लिए कह सकती है. इसमें देश की सुरक्षा, भारत की रक्षा और दूसरे देशों के साथ अच्छे संबंध जैसे मामले शामल हैं. ये ऐसे मामले हैं, जिनमें कानून के तहत कंटेंट पर कार्रवाई की जा सकती है.

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उन्होंने यह भी बताया कि अश्लील कंटेंट, मानहानि और कोर्ट की अवमानना जैसे मामलों में MeitY धारा 69A का इस्तेमाल नहीं करता है. हालांकि, इन मामलों में दूसरे कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है.

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CSAM कंटेंट पर जीरो टॉलरेंस

कृष्णन ने बच्चों से जुड़े सेक्सुअल अब्यूज कंटेंट यानी CSAM को लेकर भी साफ कहा कि इस तरह के कंटेंट को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर ऐसा कंटेंट सामने आता है तो यह सीधे तौर पर अपराध बन सकता है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट के पीछे का पूरा संदर्भ समझने की भी सलाह दी. कई बार कोई फोटो या वीडियो पहली नजर में नियमों का उल्लंघन करता हुआ नहीं दिखता, लेकिन उसके पीछे यौन हिंसा या किसी अपराध का मामला हो सकता है.

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प्लेटफॉर्म की भी होती है जिम्मेदारी

सरकार के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैरकानूनी कंटेंट को लेकर भी सावधान रहना होगा. अगर कोई कंटेंट कानून का उल्लंघन करता है और सरकार की तरफ से प्लेटफॉर्म को नोटिस दिया जाता है, तो प्लेटफॉर्म के पास उसे हटाने का विकल्प होता है. अगर वह कंटेंट नहीं हटाता है तो कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

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कुल मिलाकर, MeitY सचिव का कहना है कि सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने का ज्यादातर फैसला सरकार नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के तहत लेते हैं. सरकार का सीधा दखल बहुत कम मामलों में होता है और वह भी कानून में तय किए गए आधार पर.

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