14 साल मेटा में किया काम, कंपनी छोड़ कर बना ली 1800 करोड़ की कंपनी, भारतीय शख्स का कमाल

मेटा में 14 साल तक काम करने के बाद मनोहर पलुरी नाम के शख्स ने AI स्टार्टअप शुरू किया. अब इस कंपनी को लगातार फंडिंग मिल रही है. आइए जानते हैं मनोहर पलुरी की सक्सेस स्टोरी.

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मेटा छोड़ कर बनाई हजार करोड़ की कंपनी (Photo: LinkedIN) मेटा छोड़ कर बनाई हजार करोड़ की कंपनी (Photo: LinkedIN)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

भारतीय मूल के टेक्नोलॉजी लीडर ऐसी AI बनाने जा रहे हैं, जो नई दवाओं की खोज में वैज्ञानिकों की मदद कर सकती है. मनोहर पलुरी ने करीब 14 साल तक Meta में काम करने के बाद कंपनी छोड़ दी है. अब वह Warp Sciences नाम के नए स्टार्टअप के को-फाउंडर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर यानी CTO हैं. इस कंपनी ने 215 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जो भारतीय रुपये में करीब 1,900 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. 

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इस कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ इतना नहीं है कि एक भारतीय मूल के AI एक्सपर्ट ने बड़ी टेक कंपनी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू किया है. असली बात यह है कि अब उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सोशल मीडिया के बजाय दवाओं की खोज और वैज्ञानिक रिसर्च जैसे क्षेत्र में किया जाएगा.

अगर यह तरीका सफल होता है, तो वैज्ञानिकों को नई दवाओं के लिए जरूरी शुरुआती प्रयोग ज्यादा तेजी से करने में मदद मिल सकती है. 

कौन हैं मनोहर पलुरी?

मनोहर पलुरी ने साल 2006 में हैदराबाद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी यानी IIIT हैदराबाद से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने Sarnoff Innovative Technology में काम शुरू किया. यहां उनका काम कंप्यूटर विजन से जुड़ा था. यह AI का ऐसा स्पेस है, जिसमें कंप्यूटर तस्वीरों और वीडियो को समझने की कोशिश करता है.

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इसके बाद वह अमेरिका गए और जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आगे की पढ़ाई और रिसर्च की. उनकी रिसर्च में कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स पर खास ध्यान था. इस दौरान उनका जुड़ाव IBM Watson Labs और Google से भी रहा.

साल 2012 में पलुरी Facebook से जुड़े, जिसे आज Meta के नाम से जाना जाता है. यहां उन्होंने कंप्यूटर विजन रिसर्चर के तौर पर काम शुरू किया. समय के साथ वह बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचे. साल 2015 में वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर बने, 2021 में सीनियर डायरेक्टर और 2024 में AI के वाइस प्रेसिडेंट बने. करीब 14 साल के इस सफर में उन्होंने AI रिसर्च से लेकर बड़े डिजिटल प्रोडक्ट्स में उसके इस्तेमाल तक का काम देखा.

Meta छोड़कर अब क्या करेंगे?

Meta में AI का इस्तेमाल सोशल मीडिया ऐप्स पर कंटेंट, फोटो और वीडियो से जुड़े एक्सपीरिएंस को बेहतर बनाने सहित कई कामों में होता है. लेकिन Warp Sciences में पलुरी का काम एक अलग दिशा में होगा. कंपनी AI, रोबोटिक्स और केमिस्ट्री को जोड़कर दवा बनाने वाली और बायोटेक कंपनियों के लिए रिसर्च का काम आसान करना चाहती है.

नई दवा तैयार करने से पहले वैज्ञानिकों को कई पोंटेशियल सल्यूशन और उनके मिक्स पर काम करना पड़ता है. उन्हें यह समझना होता है कि कौन-सा पदार्थ उपयोगी हो सकता है, उसे कैसे बनाया जाए और आगे के टेस्ट में उसके बारे में क्या पता चलता है. यह शुरुआती काम काफी समय और संसाधन ले सकता है.

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