India Today AI Summit: AI के कंट्रोल में कितनी सेफ हैं हमारी पर्सनल चैट्स और डेटा

AI लोगों की लाइफ का हिस्सा बनता जा रहा है. एक वक्त पर ऐसा इंटरनेट और स्मार्टफोन्स के लिए कहा जाता है, लेकिन अब AI भी हमारी रोजमर्रा की लाइफ का पार्ट होता जा रहा है. ऐसे में हमारी पर्सनल डिटेल्स कितनी सेफ है. इस टॉपिक पर India Today AI Summit में खास बातचीत हुई है.

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AI के दौर में प्राइवेसी और डेटा कितना सेफ है. (Photo: ITG) AI के दौर में प्राइवेसी और डेटा कितना सेफ है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:57 PM IST

India Today AI Summit में एक्सपर्ट्स ने AI के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है. AI के फ्यूचर, जॉब रिस्क और दूसरे टॉपिक्स के साथ ही चर्चा AI के कंट्रोल में डेटा सिक्योरिटी पर भी बात हुई है. यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कंट्रोल में हमारा डेटा कितना सेफ है. ये एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर दुनिया भर में बहस हो रही है. 

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इस टॉपिक पर निहारिका करंजावाला, प्रिंसिपल एसोसिएट, करंजावाला एंड कंपनी, अपार गुप्ता, फाउंडर और डायरेक्टर, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन, निखिल पावा और प्रोफेसर गणेश रामाकृष्णन ने खास चर्चा की है. 

पब्लिक डेटा से ट्रेन हुआ है AI

अपरा ने इस बातचीत को शुरू करते हुए बताया, 'DPDA अभी प्रभाव में नहीं है. वहीं LLM को पब्लिक में मौजूद डेटा से ट्रेन किया गया है. ऐसे में इन AI मॉडल्स से हमारी प्रोटेक्शन सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड है. क्योंकि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट भी कहता है कि पब्लिक में मौजूद जानकारी उनके दायरे में नहीं आती है.'

अपना एक अनुभव शेयर करते हुए निखिल ने बताया, 'पिछले दिनों मैं एक ब्लड टेस्ट देना गया है, जो AI बेस्ड था. वहां मुझे एक फॉर्म दिया गया है, जिसमें लिखा था कि मैं अपना डेटा अपनी मर्जी से AI को ट्रेन करने के लिए दे रहा हूं. जब मैंने ऐसा करने से मना किया, तो उन्होंने कहा कि क्या आप मानवता की मदद के लिए डेटा शेयर नहीं करना चाहते हैं.' 

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'यहां सवाल ये है कि क्या हमें ये डेटा AI टूल को ट्रेनिंग के लिए देना चाहिए, जो बहुत पर्सनल है. आज अगर आप देखेंगे, तो हर दिन कुछ ना कुछ डेटा लीक होता है. साथ ही हमारे पास कितनी चॉइस है. क्या हमारे पास डेटा शेयर ना करने की आजादी है.' 

आपके बारे में अंदाजा लगा लेगा AI

इस टॉपिक पर निहारिका ने कहा, 'अगर AI हमें गलत डेटा देता है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा. कई कंपनियों के डेटा लीक हो रहे हैं, उन पर फाइन लग रहा है. मगर सवाल वहीं है कि एक बार डेटा बाहर निकल जाने के बाद हमारे पास क्या विकल्प हैं.' 

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निखिल पावा ने बताया, 'जितना ज्यादा आपका डेटा उनके हाथ लगेगा, उतना ही आसान आपके बारे में प्रीडिक्ट करना हो जाएगा. हमने देखा है कैसे क्विक कॉमर्स कंपनियां अलग-अलग यूजर्स को अलग-अलग प्राइस दिखाती हैं. ये सब कुछ डेटा के आधार पर होता है.' 

वहीं निहारिका ने बताया कि क्या आप फाइन प्रिंटेड डॉक्यूमेंट्स को पढ़ते हैं? ये एक बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि बहुत से लोग ऐसा नहीं करते है. जब आप कोई ऐप या गेम डाउनलोड करते हैं, तो इन पर ध्यान नहीं देते हैं. ऐसे में सरकार को आगे आना होगा और गार्ड रेल्स बनाने होंगे. 

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'ऐपल के पास आपके फिंगरप्रिंट हैं, जिन्हें वो स्टोर करके रखते हैं. इस डेटा को वो हैंडओवर कर सकते हैं. इसलिए कहीं ना कहीं यूजर्स को सतर्क होना पड़ेगा.' इस सेशन के अंतिम में सभी पैनलिस्ट इस बात पर सहमत हुए कि कंज्यूमर्स को जागरूक होना होगा. इसके बिना उनके डेटा का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

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