मॉडर्न स्मार्टफोन में स्क्रीन के दो मोड देखने को मिलते हैं लाइट मोड और डार्क मोड. इसकी मदद से आप अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से कोई भी मोड चुन सकते हैं. लेकिन क्या ये मोड आपकी आंखों के लिए सही हैं? इस सवाल का जवाब 2025 में पब्लिश हुई एक रिसर्च में दिया गया है. इस रिसर्च में यह भी बताया गया है कि एक फीचर की वजह से टेक कंपनियों और सोशल मीडिया कंपनियों को कैसे फायदा हो सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.
रिसर्च में कौन सा राज सामने आया?
रिसर्चर्स यह पता लगाना चाहते थे कि स्मार्टफोन का डार्क मोड, जिसमें स्क्रीन काली और टेक्स्ट सफेद दिखाई देता है, और लाइट मोड, जिसमें स्क्रीन पूरी सफेद और टेक्स्ट ब्लैक होता है, इन दोनों में से आंखों के लिए कौन सा मोड बेहतर है.
इसके लिए 18 से 25 साल की उम्र की 30 महिलाओं को रिसर्च में शामिल किया गया. सभी महिलाएं टैबलेट का इस्तेमाल करती थीं और उनकी आंखों की विजन सामान्य थी. उन्हें दोनों मोड में टेक्स्ट पढ़ने के लिए दिया गया. रीडिंग से पहले और रीडिंग के बाद उनकी आंखों की जांच की गई. इसमें आंखों की थकान, आंखों का सूखना और आंखों के रिएक्शन की स्पीड जैसी चीजों को देखा गया.
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जानिए क्या पता चला इस रिसर्च में
लोगों पर टेस्ट करने के बाद सामने आया कि दोनों मोड में आंखों में थकान होती है, लेकिन लाइट मोड में आंखों पर ज्यादा थकान देखने को मिली. वहीं, डार्क मोड में आंखों की थकान कुछ कम रही.
इस रिसर्च से यह पता चलता है कि स्क्रीन को सही तरीके से ऑप्टिमाइज करना काफी जरूरी है. अगर आप लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, तो स्क्रीन का मोड भी आपकी आंखों की थकान पर असर डाल सकता है.
क्या जानबूझकर रखा गया है डार्क मोड ताकि टेक कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमा सकें?
आज के समय में लगभग हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है. फोन का इस्तेमाल सिर्फ बात करने के लिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया देखने और कंटेंट कंज्यूम करने के लिए भी किया जाता है.
खासकर रात के समय अगर आप लंबे समय तक लाइट मोड में स्क्रीन देखते हैं, तो आंखों में जल्दी थकान महसूस हो सकती है. वहीं, डार्क मोड में कुछ लोगों को स्क्रीन देखने में ज्यादा आराम महसूस होता है.
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ऐसे में अगर आंखों पर कम थकान महसूस हो, तो यूजर स्क्रीन और सोशल मीडिया का ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर सकता है. इससे सोशल मीडिया ऐप्स को फायदा हो सकता है, क्योंकि यूजर उनके प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताता है.
हालांकि, सिर्फ इस रिसर्च के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि टेक कंपनियों ने जानबूझकर डार्क मोड को यूजर्स को ज्यादा स्क्रीन देखने के लिए बनाया है. इसके पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जैसे आंखों की सुविधा, कम रोशनी में बेहतर विजिबिलिटी और यूजर की पसंद.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क