ऑस्ट्रेलियन ओपन में कार्लोस अल्कारेज के मेडिकल टाइम आउट पर विवाद... ATP नियम क्या कहते हैं?

अलेक्जेंडर ज्वेरेव का मानना था कि कार्लोस अल्कारेज क्रैम्प्स से जूझ रहे थे और ATP नियमों के मुताबिक क्रैम्प्स के लिए मेडिकल टाइम आउट की अनुमति नहीं है. यह ब्रेक मैच की लय तोड़ने वाला था, खासकर तब जब मुकाबला कांटेदार स्थिति में पहुंच चुका था.

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कार्लोस अल्कारेज ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में  (Photo: AP) कार्लोस अल्कारेज ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में (Photo: AP)

सिद्धार्थ विश्वनाथन

  • मेलबर्न,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में मेन्स सिंगल्स के पहले सेमीफाइनल में कार्लोस अल्कारेज और अलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच खेला गया मुकाबला टेनिस इतिहास के सबसे यादगार मैचों में शामिल हो गया. पांच घंटे 27 मिनट तक चला यह मैच ऑस्ट्रेलियन ओपन इतिहास का तीसरा सबसे लंबा मुकाबला रहा. हालांकि, इस ऐतिहासिक टक्कर के बीच एक विवाद ऐसा भी रहा, जिसने मैच की चमक को कुछ हद तक फीका कर दिया.

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विवाद का केंद्र बना कार्लोस अल्कारेज का मेडिकल टाइम आउट, जिस पर अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने खुलकर नाराजगी जाहिर की. तीसरे सेट के नौवें गेम के दौरान अल्कारेज ने मेडिकल टाइम आउट लिया. इसी दौरान ज्वेरेव चेयर अंपायर और कोर्ट पर मौजूद अधिकारियों से भिड़ते नजर आए. माइक्रोफोन पर ज्वेरेव को कहते हुए साफ सुना गया, 'यह अविश्वसनीय है. यह पूरी तरह बकवास है. आप हमेशा इन दोनों खिलाड़ियों को ही बचाते रहते हैं.' ज्वेरेव का मानना था कि अल्कारेज को क्रैम्प्स (मांसपेशियों में खिंचाव) के लिए मेडिकल टाइमआउट नहीं मिलना चाहिए था.

ATP और अन्य टेनिस संगठनों के नियम इस मामले में काफी स्पष्ट हैं. मेडिकल टाइम आउट केवल ट्रीटेबल मेडिकल कंडीशन (जैसे चोट या अचानक बीमारी) के लिए दिया जा सकता है. थकान, डिहाइड्रेशन और एक्सरसाइज से होने वाले क्रैम्प्स को नॉन-ट्रीटेबल माना जाता है. खिलाड़ी का मेडिकल स्टाफ की तरफ मूल्यांकन किया जा सकता है. अगर यह साबित हो जाए कि समस्या एक्सरसाइज से जुड़ी है, तो इलाज की अनुमति नहीं होती. महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला चेयर अंपायर नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के मेडिकल प्रोफेशनल्स लेते हैं.

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ज्वेरेव ने नियमों का उल्लंघन किया?
असल में, कार्लोस अल्कारेज के मेडिकल मूल्यांकन का फैसला मेडिकल टीम ने लिया था, ना कि अंपायर ने. ऐसे में अलेक्जेंडर ज्वेरेव का चेयर अंपायर पर गुस्सा निकालना नियमों के लिहाज से सही नहीं माना जा सकता. विडंबना यह रही कि इस पूरे विवाद के बावजूद ज्वेरेव ने तीसरा और चौथा सेट (टाईब्रेक में) दोनों जीत लिए. लेकिन नियमों में एक 'ग्रे एरिया' भी है. पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 और तीन बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन एंडी मरे ने इस मामले में एक अहम बात उठाई. टीवी एनालिस्ट के रूप में बोलते हुए मरे ने कहा, 'क्रैम्प्स और चोट के बीच फर्क कई बार बहुत धुंधला हो जाता है. कई बार जांघ की समस्या को चोट मान लिया जाता है.' यही वह ग्रे एरिया है, जिस पर यह पूरा विवाद टिका है.'

मैच के बाद अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने कहा, 'वह क्रैम्प कर रहे थे और आमतौर पर क्रैम्प्स के लिए मेडिकल टाइम आउट नहीं लिया जा सकता. मुझे यह पसंद नहीं आया, लेकिन फैसला मेरा नहीं था.' वहीं, कार्लोस अल्कारेज ने अपनी सफाई में कहा, 'मुझे सिर्फ एक मसल में समस्या महसूस हुई, दाहिनी टांग के एडडक्टर में. मुझे नहीं लगा कि यह क्रैम्प्स थे, इसलिए मैंने फिजियो को बुलाया.' अल्कारेज ने यह भी कहा कि यह मैच उनके करियर का सबसे ज्यादा शारीरिक रूप से थकाने वाला मुकाबला था.

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यह सवाल अब भी बहस का विषय बना हुआ है. नियम साफ हैं, लेकिन उनकी व्याख्या में मौजूद 'ग्रे एरिया' विवाद को जन्म देता है. फिलहाल, सिस्टम खिलाड़ी की ईमानदारी और मेडिकल टीम के फैसले पर भरोसा करता है. शायद नियम बदलने की जरूरत नहीं, लेकिन यह विवाद बताता है कि क्रैम्प्स और चोट के बीच की रेखा को और स्पष्ट करने की जरूरत जरूर है...

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