जानें क्या है रेपचेज, अब तक भारत को मिले हैं इससे तीन ओलंपिक पदक

कुश्ती में रेपचेज वो नियम है जिसके तहत अगर कोई खिलाड़ी शुरुआती दौर में हार जाता है और उससे जीतने वाला खिलाड़ी फाइनल तक पहुंचता है तो हारने वाले को अपनी ताकत आजमाइश का दूसरा मिलता है.

Advertisement
योगेश्वर दत्त योगेश्वर दत्त

लव रघुवंशी

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 7:57 AM IST

ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त रियो ओलंपिक के आखिरी दिन अपने पहले दौर में हार गए. लेकिन इस हार के बावजूद भी वो पदक की दौड़ में बने हुए थे. दरअसल, ये संभव था रेपचेज से. रेपचेज से हारने वाले पहलवान के पास भी ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका रहता है.

हालांकि इस बार जिससे हारे वो मंगोलियाई पहलवान क्वार्टरफाइनल में हार गया और योगेश्वर की रेपचेज खेलने की संभावना खत्म हो गई.

Advertisement

आखिर क्या है रेपचेज?
कुश्ती में रेपचेज वो नियम है जिसके तहत अगर कोई खिलाड़ी शुरुआती दौर में हार जाता है और उससे जीतने वाला खिलाड़ी फाइनल तक पहुंचता है तो हारने वाले को अपनी ताकत आजमाइश का दूसरा मिलता है. यह शब्द फ्रेंच से लिया गया है जिसका अर्थ rescue अर्थात बचाव होता है. कुश्ती में यह उस खिलाड़ी के लिए बचाव का एक और मौका होता है जो शुरुआती मुकाबले में हार जाता है.

रेपचेज से जीते तीन पदक
कुश्ती में रेपचेज वो फॉर्मूला है जिसकी वजह से भारत अब तक में तीन बार पदक जीत चुका है. 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक के दौरान यह शब्द पहली बार भारतीय खेल प्रेमियों के जुबान पर चढ़ा. तब सुशील कुमार को इसी नियम के तहत शुरुआती दौर में हारने के बावजूद मौका मिला था और वो ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहे थे.

Advertisement

इसके चार साल बाद 2012 खुद योगेश्वर को इसी रेपचेज नियम ने ब्रॉन्ज दिलाया था. राउंड ऑफ 16 में योगेश्वर रूस के बेसिख कुडुखोव से हार गए थे. कुडुखोव फाइनल में पहुंचे और सिल्वर जीता तो योगेश्वर को इसी रेपचेज के नियम के तहत ब्रॉन्ज के लिए खेलने का मौका मिल गया और उन्होंने यह मौका नहीं गंवाया.

इस साल रियो में साक्षी मलिक भी इसी रेपचेज की वजह से मेडल जीतने में कामयाब हुईं. क्वार्टरफाइनल में वलेरिया कोब्लोवा से हारने के बावजूद ब्रॉन्ज के लिए खेलने का मौका मिला क्योंकि कोब्लोवा फाइनल में पहुंच गई थी.

कुश्ती में ही क्यों होता है रेपचेज?
अब सवाल यह उठता है कि कुश्ती में ही रेपचेज नियम का इस्तेमाल क्यों होता है, अन्य खेलों में क्यों नहीं? कुश्ती में अन्य खेलों की भांति पहलवानों के बीच मुकाबले का ड्रॉ उनकी रैंकिंग के मुताबिक नहीं होता है. यह आकस्मिक ड्रॉ के तहत तय किया जाता है कि किन दो पहलवानों के बीच मुकाबला होगा. टेनिस में कभी दो टॉप रैंकिंग प्लेयर शुरुआती दौर में आपस में नहीं भिड़ते लेकिन कुश्ती में यह संभव है और इसीलिए इस रेपचेज नियम को यहां लागू किया जाता है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »