नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शनिवार को बैडमिंटन का एक बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला. भारत की स्टार बैडमिंटन जोड़ी त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद वर्ल्ड चैम्पियनशिप 2026 के फाइनल में पहुंचने से चूक गईं. लेकिन उन्होंने अपने शानदार खेल से करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया है.
विमेंस डबल्स के सेमीफाइनल में इस भारतीय जोड़ी का सामना वर्ल्ड नंबर-1 और डिफेंडिंग चैंपियन चीन की लियू शेंगशु और टैन निंग से था. एक घंटे 11 मिनट तक चले इस मुकाबले में त्रिशा-गायत्री को 21-18, 13-21, 8-21 से हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, इस हार के बावजूद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया है.
घरेलू दर्शकों के शोर और समर्थन के बीच त्रिशा और गायत्री ने बिल्कुल निडर होकर शुरुआत की. भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया. एक समय चीन की टीम 18-16 से आगे थी, लेकिन तभी त्रिशा और गायत्री ने गजब का जज्बा दिखाते हुए लगातार 5 पॉइंट बटोरे और पहला गेम 21-18 से अपने नाम कर लिया.
दूसरे गेम में पलटा पासा
12-12 के स्कोर तक दोनों टीमों में कांटे की टक्कर थी. इसके बाद चीनी जोड़ी ने अपनी रणनीति बदली. उन्होंने रैलियों को छोटा रखा और दबाव बनाकर दूसरा गेम 21-13 से जीत लिया. फाइनल और निर्णायक गेम में वर्ल्ड नंबर-1 चीनी जोड़ी पूरी तरह से हावी रही और 21-8 से मैच अपने नाम कर लिया.
15 साल का सूखा हुआ खत्म
ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के बाद वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मेडल जीतने वाली त्रिशा-गायत्री भारत की केवल दूसरी महिला डबल्स जोड़ी बन गई हैं. साल 2011 के वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने मेडल जीतने का करिश्मा किया था. त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय बैडमिंटन टीम का भी हिस्सा हैं. ऐसे में इनसे फैन्स को एक बार फिर मेडल की उम्मीद होगी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क