कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पुरुष भाला फेंक फाइनल किसी ओलंपिक फाइनल से कम नहीं होगा. मैदान में चार ओलंपिक पदक विजेता उतरेंगे, जबकि इस सीजन 92.62 मीटर के साथ दुनिया का सबसे लंबा थ्रो करने वाले श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं. भारत की ओर से नीरज चोपड़ा के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह भी पदक की दौड़ में होंगे. फाइनल भारतीय समयानुसार शुक्रवार रात 12:45 बजे शुरू होगा.
नीरज चोपड़ा के लिए यह फाइनल सिर्फ एक और मेडल जीतने का मौका नहीं है. पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में निराशाजनक प्रदर्शन और चोटों के बाद उनके फॉर्म पर सवाल उठे हैं. ऐसे में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच जीत हासिल करना आलोचकों को जवाब देने का सबसे बड़ा मंच होगा.
विश्व चैम्पियनशिप के बाद नीरज ने बड़ा फैसला लेते हुए दिग्गज कोच जान जेलेज़्नी से अलग होकर अपने पहले कोच जय चौधरी के साथ फिर से काम शुरू किया. पानीपत के शिवाजी स्टेडियम से शुरू हुआ यह रिश्ता अब उनके करियर के नए अध्याय की नींव बना है. लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने दोहा डायमंड लीग में चौथे स्थान के साथ वापसी की.
आंकड़े सवाल खड़े करते हैं, लेकिन आत्मविश्वास कायम
नीरज पहली बार ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब चर्चा उनके रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि गिरते प्रदर्शन की हो रही है. पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में वह 2,566 दिनों बाद पहली बार किसी बड़े टूर्नामेंट में पोडियम से बाहर रहे. ग्लास्गो क्वालिफिकेशन में उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 79.61 मीटर रहा, जिससे लगातार 58 प्रतियोगिताओं तक 80 मीटर से अधिक थ्रो करने का सिलसिला टूट गया.
इसके बावजूद नीरज के चेहरे पर किसी तरह की बेचैनी नहीं दिखती. दो बार के ओलंपिक पदक विजेता जानते हैं कि करियर के इस दौर में शरीर और तकनीक के साथ तालमेल बैठाना ही सबसे बड़ी चुनौती है.
ठंडी हवा और बारिश... क्या मौसम बनेगा नीरज का हथियार?
ग्लास्गो का मौसम खिलाड़ियों की परीक्षा लेने वाला है. तेज हवाएं, कम तापमान और हल्की बारिश की संभावना फाइनल को और कठिन बना सकती है. क्वालिफिकेशन के बाद नीरज ने कहा कि वॉर्म-अप करना भी मुश्किल था और लंबे इंतजार के कारण शरीर को गर्म रखना चुनौती बन गया था.
ऐसे मौसम में अनुभव सबसे बड़ा हथियार होता है. नीरज ने क्वालिफिकेशन के दौरान स्कल कैप पहनकर शरीर का तापमान बनाए रखा और हर थ्रो के बीच हल्की दौड़ लगाकर खुद को सक्रिय रखा. अगर फाइनल में भी मौसम खराब रहा तो यह परिस्थितियां युवा खिलाड़ियों की तुलना में नीरज को फायदा पहुंचा सकती हैं.
पदक की राह में सबसे बड़ी दीवार कौन?
सबसे बड़ा खतरा श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे हैं. 23 साल के पथिरागे इस सीजन 92.62 मीटर का थ्रो कर चुके हैं, जो 2026 में दुनिया का सबसे लंबा थ्रो है. उन्होंने इस साल चार बार 88 मीटर से अधिक दूरी हासिल की है और शानदार लय में हैं.
उनके अलावा दो बार के विश्व चैम्पियन एंडरसन पीटर्स भी खिताब के मजबूत दावेदार हैं. क्वालिफिकेशन में उन्होंने 81.29 मीटर का थ्रो कर अपनी तैयारी का संकेत दे दिया.
पाकिस्तान के ओलंपिक चैम्पियन अरशद नदीम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. क्वालिफिकेशन में उन्होंने सिर्फ 78.63 मीटर फेंका, लेकिन बड़े मुकाबलों में अचानक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता उन्हें बेहद खतरनाक बनाती है.
क्या भारत को मिल सकते हैं तीन दावेदार?
भारतीय चुनौती सिर्फ नीरज तक सीमित नहीं है. रोहित यादव पिछले महीने राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैम्पियनशिप में 87.05 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर चुके हैं और शानदार फॉर्म में हैं. वहीं यशवीर सिंह पहली बार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरेंगे और अपने करियर की सबसे बड़ी परीक्षा देंगे.
अगर रोहित अपनी हालिया लय बरकरार रखते हैं और नीरज अनुभव का फायदा उठाते हैं, तो भारत के पास एक नहीं बल्कि दो मजबूत पदक दावेदार होंगे.
चार ओलंपिक पदक विजेता, इस सीजन का नंबर-1 थ्रोअर, दो विश्व चैम्पियन और तीन भारतीय खिलाड़ी... ग्लास्गो का यह फाइनल किसी भी मायने में साधारण नहीं है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नीरज चोपड़ा एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी बादशाहत साबित कर पाएंगे या फिर पथिरागे और अरशद जैसे नए-पुराने प्रतिद्वंद्वी उनसे बाजी मार ले जाएंगे.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क