Commonwealth Games 2026: जूडो में भारत का गोल्डन डे, महज 30 मिनट में अस्मिता और हर्ष सिंह ने जीते गोल्ड मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतकर 36 साल का इंतजार खत्म किया. इसके महज 30 मिनट बाद हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया. वहीं यामिनी मौर्य का कम से कम रजत पदक पक्का हो गया है.

Advertisement
CWG में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास. (Photo: PTI) CWG में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:21 PM IST

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. भारत की 23 वर्षीय अस्मिता डे और 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया. दोनों की जीत के बीच महज 30 मिनट का अंतर रहा. वहीं भारत की तीसरी फाइनलिस्ट यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं और उनका कम से कम रजत पदक पक्का हो गया है.

Advertisement

सबसे पहले अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेडी क्वाच को रोमांचक गोल्डन स्कोर मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं. 1990 में ऑकलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो को पदक स्पर्धा में शामिल किए जाने के बाद से भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीते, लेकिन गोल्ड मेडल का सपना पूरा नहीं हो सका था. अस्मिता ने 36 साल का यह इंतजार खत्म कर भारतीय जूडो के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया.

अस्मिता डे बनीं पहली भारतीय स्वर्ण पदक विजेता

फाइनल की शुरुआत में अस्मिता दबाव में नजर आईं. उन्होंने पहले युको गंवाया और फिर उन्हें एक पेनल्टी भी मिली, जिससे कनाडा की हेडी क्वाच मुकाबले में आगे निकल गईं. इसके बावजूद अस्मिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को गोल्डन स्कोर तक पहुंचाया और आखिरकार स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. अस्मिता की जीत के महज 30 मिनट बाद भारत के हर्ष सिंह ने भी इतिहास रच दिया. उन्होंने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जूडोका जोशुआ कैट्ज़ को हराकर गोल्ड मेडल जीता. इसके साथ ही हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए.

Advertisement

जूडो में भारत ने रचा स्वर्णिम इतिहास

अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलने उतरे हर्ष ने पूरे मुकाबले में धैर्य और रणनीति का शानदार प्रदर्शन किया. जोशुआ कैट्ज़ को मुकाबले से पहले स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. लंबे समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कोई स्पष्ट बढ़त नहीं बन सकी. मैच समाप्त होने में केवल 41 सेकंड बाकी थे, तभी हर्ष ने वाजा-आरी के जरिए निर्णायक बढ़त हासिल कर ली. यह बढ़त अंत तक कायम रही और उन्होंने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. 

 

भारत की तीसरी फाइनलिस्ट यामिनी मौर्य भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंच चुकी हैं. उनके नाम कम से कम रजत पदक पहले ही सुनिश्चित हो चुका है. अब सभी की नजर उनके फाइनल मुकाबले पर है, जहां वह भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी. इस शानदार प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्मिता और हर्ष को बधाई दी. 

अस्मिता डे का सफर भी प्रेरणादायक रहा है. त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता साइकिल मैकेनिक थे. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जूडो को अपना करियर बनाया. शुरुआत में वह 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं, लेकिन बाद में अपने पहले कोच की सलाह पर जूडो की ओर रुख किया. वर्ष 2015 में वह त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल से जुड़ीं.

Advertisement

अब यामिनी के मुकाबले पर टिकी देश की निगाहें

राष्ट्रीय स्कूल खेलों और खेलो इंडिया में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 2018 में भारतीय खेल प्राधिकरण के भोपाल स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण का मौका मिला. एशियन ओपन, जूनियर एशिया कप और कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी इतिहास रच दिया. भारत के लिए जूडो में एक ही दिन दो स्वर्ण पदक जीतना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. अस्मिता डे और हर्ष सिंह की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है, जबकि अब सभी की निगाहें यामिनी मौर्य के फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »