अनाहत सिंह ने रच दिया नया इतिहास... बनीं वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैम्पियन, मिस्त्र का वर्चस्व किया खत्म

अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैम्पियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं. अनाहत की यह जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय स्क्वैश के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है. वर्षों से जिस विश्व खिताब का इंतजार था, उसे अनाहत सिंह ने अपने दमदार प्रदर्शन से भारत की झोली में डाल दिया.

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अनाहत सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. (Photo: World Squash) अनाहत सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. (Photo: World Squash)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नियाग्रा-ऑन-द-लेक,
  • 26 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:38 AM IST

भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने इतिहास रच दिया है. 18 वर्षीय अनाहत ने कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 में गर्ल्स सिंगल्स का खिताब जीत लिया. 25 जुलाई (शनिवार) को आयोजित फाइनल में टॉप सीड अनाहत ने दूसरे वरीयता प्राप्त मिस्र की रुकय्या सलेम को लगातार गेमों में 11-3, 11-7, 11-9 से हराया. 

अनाहत सिंह की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जूनियर विश्व स्क्वैश चैम्पियनशिप के इतिहास में इससे पहले कोई भी भारतीय खिलाड़ी चैम्पियन नहीं बन सका था. अनाहत ने 2005 में फाइनल तक पहुंचने वाली जोशना चिनप्पा से भी एक कदम आगे बढ़ते हुए ट्रॉफी अपने नाम कर ली.

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खिताबी मुकाबले में अनाहत सिंह शुरू से ही पूरी तरह हावी रहीं. पहले गेम में उन्होंने आक्रामक खेल दिखाते हुए सलेम को सिर्फ तीन अंक लेने दिए. दूसरे गेम में मिस्र की खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय स्टार ने संयम बनाए रखा और बढ़त को बरकरार रखा. तीसरे गेम में भी सलेम ने कड़ी चुनौती दी, लेकिन निर्णायक क्षणों में अनाहत ने शानदार शॉट्स खेलते हुए मुकाबला सीधे गेमों में खत्म कर दिया.

अनाहत सिंह का प्रदर्शन सिर्फ फाइनल तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपने खेल से दबदबा बनाए रखा. छह मुकाबलों के दौरान उन्होंने केवल दो गेम गंवाए, जबकि शुरुआती तीन मैच बिना एक भी गेम हारे जीत लिए. अपने अभियान की शुरुआत उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की लिली विल्सन को 3-0 से हराकर की. इसके बाद हॉन्ग कॉन्ग की क्लोई लो और मलेशिया की डॉयस ये सान ली को भी सीधे गेमों में हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई.

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नॉकआउट स्टेज में अनाहत ,सिंह का सामना लगातार मिस्र की तीन खिलाड़ियों से हुआ. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने हबीबा रिज्क को 3-1, सेमीफाइनल में बार्ब सामेह को 3-1 और फाइनल में रुकय्या सलेम को 3-0 से हराकर साबित कर दिया कि वह इस खिताब की सबसे मजबूत दावेदार थीं.

मिस्त्र का दबदबा हुआ खत्म
अनाहत सिंह की जीत ने जूनियर स्क्वैश में मिस्र के लंबे वर्चस्व को भी समाप्त कर दिया. 2011 से लगातार 13 संस्करणों तक गर्ल्स सिंगल्स का खिताब मिस्र की खिलाड़ियों के नाम रहा था. अब अनाहत ने इस सिलसिले को तोड़ते हुए नया इतिहास लिखा. इतना ही नहीं, वह 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद जूनियर विश्व चैम्पियन बनने वाली पहली गैर-मिस्री खिलाड़ी भी बन गई हैं.

अनाहत सिंह की यह सफलता अचानक नहीं आई. पिछले साल काहिरा में आयोजित जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत का 15 साल का इंतजार खत्म किया था. उस प्रदर्शन ने उनके उज्ज्वल भविष्य के संकेत दिए थे और इस बार उन्होंने उससे भी आगे बढ़ते हुए विश्व चैम्पियन बनने का सपना साकार कर दिखाया. 18 साल की उम्र में सीनियर PSA टूर रैंकिंग में 20वें नंबर पर पहुंच चुकीं अनाहत सिंह अब भारतीय स्क्वैश की सबसे बड़ी उम्मीदों में शामिल हैं.

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