भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट मैच के पहले दिन यशस्वी जायसवाल की श्रीलंकाई गेंदबाज असिथा फर्नांडो के साथ भिड़ंत हो गई. यशस्वी को आउट करने के बाद असिथा ने उन्हें सेंड ऑफ दिया. इसके बाद माहौल गरमा गया और दोनों खिलाड़ी आमने-सामने आ गए. इस दौरान उनके बीच बॉडी कॉन्टैक्ट भी हुआ.
पूरे मामले में अब इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल अब दोनों खिलाड़ियों पर एक्शन ले सकती है. ये देखना होगा कि मैच अधिकारी इस घटना को केवल मैदान पर हुई गर्मागर्मी मानते हैं या जानबूझकर किया गया शारीरिक टकराव. अगर दूसरा मामला बना तो भारतीय ओपनर यशस्वी जायसवाल को थोड़ी कड़ी सजा मिल सकती है.
यशस्वी ने यहां कर दी चूक
मामला तब ज्यादा गंभीर दिखाई दिया जब यशस्वी जायसवाल पवेलियन लौटने के बजाय असिथा फर्नांडो की तरफ बढ़े. साथी बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने उन्हें वहां से जाने के लिए समझाने की कोशिश की, जबकि श्रीलंका के दूसरे खिलाड़ी भी आसपास जमा हो गए. यशस्वी और असिथा एक-दूसरे के बेहद करीब पहुंचे और उनके सिर आपस में टकराते दिखाई दिए. यही कॉन्टैक्ट अब संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की वजह बन सकता है.
क्या यशस्वी पर लगेगा बैन?
मैदान पर शारीरिक हमले और हिंसा से निपटने के लिए आईसीसी ने बेहद सख्त प्रावधान कर रखे हैं. आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट का अनुच्छेद 2.18 इंटरनेशनल मुकाबले के दौरान किसी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी या अन्य व्यक्ति पर शारीरिक हमले से संबंधित है. वहीं आर्टिकल 2.19 मैदान पर किसी भी तरह की हिंसक हरकत से जुड़ा है.
देखना होगा कि आईसीसी किस आधार पर मामले का आकलन करती है. दोनों खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही डिमेरिट पॉइंट्स दिए जा सकते हैं. यशस्वी जायसवाल ने पिछले 24 महीने में कोई डिमेरिट पॉइंट हासिल नहीं किया है. ऐसे में यदि यशस्वी को आईसीसी की तरफ कम से कम 4 डिमेरिट अंक मिलेंगे तभी उन पर एक टेस्ट या 2 ओडीआई/2 टी20I मैचों का बैन लगेगा. बता दें कि अगर 24 महीने के समय के दौरान खिलाड़ी के चार या इससे अधिक डिमेरिट अंक होते हैं, तो यह एक सस्पेंशन अंक में बदल जाता है और बैन का सामना करना पड़ता है.
आईसीसी मैदान पर हुई घटनाओं को लेवल-1, लेवल-2, लेवल-3 और लेवल-4 के तौर पर जज करती है.. सामान्य तौर पर लेवल-1 में 1 या 2 डिमेरिट पॉइंट्स, जबकि लेवल-2 में 3 या 4 डिमेरिट पॉइंट्स मिल सकते हैं. लेवल-3 और लेवल-4 जैसे ज्यादा गंभीर मामलों में सीधे सस्पेंशन से जुड़ी कड़ी सजा हो सकती है.
बता दें कि लेवल-4 आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट में उल्लंघन की सबसे गंभीर श्रेणी है. इसके तहत सजा पांच टेस्ट या 10 ओडीआई मैचों के प्रतिबंध से शुरू होकर आजीवन बैन तक जा सकती है. अगर आईसीसी पूरे मामले को कम से कम लेवल-2 की श्रेणी में रखती है तो ही यशस्वी जायसवाल पर 1 टेस्ट मैच का बैन लग सकता है.
यशस्वी जायसवाल के करियर में इससे पहले भी ऐसा मामला सामने आ चुका है. 2022 के दलीप ट्रॉफी फाइनल में वेस्ट जोन की तरफ से खेलते हुए उनकी साउथ जोन के खिलाड़ी टी रवि तेजा के साथ बार-बार नोकझोंक हुई थी. अंपायरों की चेतावनी के बावजूद विवाद जारी रहने पर कप्तान अजिंक्य रहाणे ने खुद यशस्वी को मैदान से बाहर भेज दिया था. रहाणे ने बाद में बताया था कि मैच रेफरी यशस्वी पर चार मैचों का प्रतिबंध लगाने की तैयारी में थे. हालांकि कप्तान की ओर से तत्काल कार्रवाई किए जाने के बाद यशस्वी सजा से बच गए.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क