कहां है वैभव? दुनिया प्लेइंग XI में तलाशती रही, ‘बेबी बॉस’ तो कहीं और ही मिला!

वैभव सूर्यवंशी अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में प्लेइंग XI में जगह का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली में उनके साथ पापा संजीव सूर्यवंशी का खास साथ है. तीन तस्वीरों में मैदान के ‘बेबी बॉस’ का एक बिल्कुल अलग चेहरा दिखा- कहीं पापा के कंधे पर सिर रखे वैभव नजर आए तो कहीं दोनों एक ही कंबल में सुकून के पल बिताते दिखे.

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15 साल के ‘बेबी बॉस’ की ये तस्वीरें देखीं? (Instagram post) 15 साल के ‘बेबी बॉस’ की ये तस्वीरें देखीं? (Instagram post)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

जिस वैभव सूर्यवंशी को देखने के लिए क्रिकेट फैंस प्लेइंग XI में नाम तलाश रहे हैं, वही ‘बेबी बॉस’ दिल्ली में इन दिनों क्रिकेट के शोर से दूर पापा के कंधे पर सुकून के पल बिता रहा है. अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के दो मुकाबले निकल चुके हैं, लेकिन वैभव को अभी मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला. बाहर सवाल है- कब खेलेगा वैभव? और कमरे के अंदर कहानी बिल्कुल अलग है- पापा साथ हैं.

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वैभव के साथ उनके पिता संजीव सूर्यवंशी भी दिल्ली में हैं. मैच का दबाव हो, प्लेइंग XI का इंतजार हो या लगातार सुर्खियों में बने रहने का शोर... इन सबके बीच पापा का साथ वैभव के लिए शायद सबसे बड़ा सुकून है.

ये प्यारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, जहां वैभव और उनके पापा संजीव सूर्यवंशी के बीच का खास रिश्ता नजर आया. क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक अंदाज में दिखने वाले ‘बेबी बॉस’ का यहां बिल्कुल अलग रूप दिखाई देता है. पापा के साथ इन सुकून भरे पलों में वैभव की मासूमियत और पिता का अपनापन साफ नजर आता है.

एक कंबल... और दुनिया से दूर ‘बेबी बॉस’

एक तस्वीर में वैभव और उनके पापा एक ही कंबल में नजर आते हैं. पापा के चेहरे पर मुस्कान है और वैभव बेहद शांत.

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यह वही वैभव है जिसके बल्ले से मैदान पर गेंद लगातार बाउंड्री के बाहर जाती है. जिसकी बल्लेबाजी पर करोड़ों निगाहें रहती हैं. लेकिन यहां कोई स्टारडम नहीं है.

न कोई बल्ला. न कोई कैमरा. न कोई स्कोरबोर्ड. बस पापा और बेटा.

सुबह का वक्त है या रात के आराम का पल, यह तस्वीर भले न बताए. लेकिन इतना जरूर दिखाती है कि क्रिकेट की दुनिया से बाहर वैभव के लिए सुकून की सबसे सुरक्षित जगह कहां है.

मैदान पर ‘बेबी बॉस’, पापा के सामने अब भी बच्चा

इस तस्वीर में वैभव ने पापा के कंधे पर सिर रखा हुआ है. यहीं ‘बेबी बॉस’ की पूरी कहानी पलट जाती है.

मैदान पर बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ नजर आने वाला 15 साल का यह बल्लेबाज पापा के पास आते ही फिर वही बच्चा बन जाता है.

पापा की अंगूठी वाली उंगली तस्वीर में नजर आ रही है और वैभव का चेहरा पूरी तरह शांत है.

दुनिया उसे एक क्रिकेटर की तरह देखती है. पापा के लिए वह अब भी उनका बेटा है.

शायद इसी फर्क में इस तस्वीर की सबसे बड़ी खूबसूरती छिपी है.

पापा का हाथ आंखों पर... जैसे कह रहे हों- अब आराम करो बेटा

अगली तस्वीर में पिता का हाथ वैभव की आंखों पर है.

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तस्वीर में हल्की शरारत भी है और पिता वाला दुलार भी. जैसे क्रिकेट की सारी बातें कुछ देर के लिए बंद हों और संदेश सिर्फ इतना हो- अब आराम करो बेटा.

टीम इंडिया की प्लेइंग XI में जगह मिलेगी या नहीं, यह फैसला कप्तान और टीम मैनेजमेंट को करना है. लेकिन पापा का साथ वैभव को किसी प्लेइंग XI का इंतजार नहीं कराता.

वहां सिर्फ रिश्ता है. और शायद एक पिता के लिए बेटे के साथ बिताए ऐसे कुछ मिनट किसी भी मैच से बड़े होते हैं.

दुनिया पूछ रही- वैभव कब खेलेगा?

अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में दो मैच हो चुके हैं और वैभव अभी तक बाहर बैठे हैं. टीम इंडिया सीरीज अपने नाम कर चुकी है. अब गुरुवार को सीरीज का आखिरी मुकाबला खेला जाना है.

ऐसे में एक बार फिर नजरें वैभव पर हैं. क्या आखिरी मैच में उसे मौका मिलेगा? क्या फैन्स को एक बार फिर टीम इंडिया की जर्सी में ‘बेबी बॉस’ का बल्ला देखने को मिलेगा?

इन सवालों के जवाब मैदान पर मिलेंगे. लेकिन दिल्ली में कैमरे ने इससे पहले वैभव की एक दूसरी कहानी पकड़ ली है.

पापा ने कहा- जब खिलाएंगे, तब खेलेगा बच्चा

दूसरे टी20 मैच से पहले दिल्ली में 'स्पोर्ट्स तक' से बातचीत में संजीव सूर्यवंशी से जब बेटे को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब भी उतना ही सहज था.

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उन्होंने फैन्स से वैभव के लिए आशीर्वाद बनाए रखने की अपील की और कहा कि जब जरूरत होगी, जब खिलाएंगे, तब बच्चा खेलेगा. इस एक लाइन में शायद पिता का पूरा भरोसा छिपा है.

न कोई जल्दबाजी. न कोई शिकायत. न टीम मैनेजमेंट पर सवाल. बस बेटे पर भरोसा.

क्रिकेट में वैभव के नाम के साथ अब रिकॉर्ड, रन, छक्के और उम्मीदें जुड़ चुकी हैं. हर मैच के साथ उनसे जुड़ी चर्चा भी बढ़ती जा रही है. 

लेकिन इन तीन तस्वीरों में कहानी कुछ और है. यहां रिकॉर्ड नहीं हैं. रन नहीं हैं. प्लेइंग XI नहीं है. यहां सिर्फ एक पिता है, जो बेटे के साथ है. और एक बेटा है, जो दुनिया की नजरों से दूर कुछ पल के लिए फिर बच्चा बन गया है.

दुनिया वैभव को प्लेइंग XI में ढूंढ रही थी... वैभव पापा के कंधे पर था. शायद ‘बेबी बॉस’ की असली दुनिया यही है- जहां करोड़ों फैन्स की उम्मीदों से पहले पापा का कंधा मिलता है और क्रिकेटर बनने से पहले वह सिर्फ बेटा होता है.


 

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