टेस्ट क्रिकेट को बचाने की चिंता अब सिर्फ क्रिकेट बोर्ड और पूर्व खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है. दुनिया भर में तेजी से बढ़ती फ्रेंचाइजी टी20 लीग ने क्रिकेटरों के सामने ऐसा विकल्प खड़ा कर दिया है, जहां कम मैच खेलकर ज्यादा कमाई का रास्ता खुलता है. ऐसे में अगर कोई खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट को जल्दी छोड़कर फ्रेंचाइजी क्रिकेट को चुनता है तो उसे सीधे दोषी ठहराना आसान नहीं है. मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी MCC के हेड ऑफ क्रिकेट फ्रेजर स्टीवर्ट ने भी इस हकीकत को स्वीकार किया है.
स्टीवर्ट ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट से खिलाड़ी इसलिए जल्दी संन्यास ले रहे हैं क्योंकि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में ज्यादा पैसा है. उनका कहना था कि अगर कोई क्रिकेटर कम खेलकर ज्यादा कमाई कर सकता है तो उसके इस फैसले के लिए उसे दोष नहीं दिया जा सकता. उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि क्रिकेट का पूरा कार्यक्रम ऐसा कैसे बनाया जाए जिसमें टेस्ट क्रिकेट समेत सभी फॉर्मेट के लिए जगह बनी रहे.
MCC (Marylebone Cricket Club) लंदन स्थित क्रिकेट का ऐतिहासिक संस्थान है, जिसकी स्थापना 1787 में हुई थी. MCC क्रिकेट के नियमों यानी ‘Laws of Cricket’ का संरक्षक है और समय-समय पर इनमें बदलाव व संशोधन करता है. इसके साथ ही MCC क्रिकेट की परंपराओं और ‘Spirit of Cricket’ को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाता है.
टेस्ट क्रिकेट चाहता है दुनिया के बेस्ट खिलाड़ी
MCC के लिए टेस्ट क्रिकेट का महत्व अपनी जगह कायम है. स्टीवर्ट ने साफ कहा कि वह चाहते हैं कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर टेस्ट क्रिकेट खेलें. लेकिन मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर की व्यस्तता और फ्रेंचाइजी लीग से मिलने वाले आर्थिक फायदे ने खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है.
न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर माइकल ब्रेसवेल का हालिया फैसला इसका उदाहरण है. उन्होंने अपने बोर्ड के साथ नियमित अनुबंध के बजाय कैजुअल कॉन्ट्रैक्ट चुना है, ताकि बिग बैश लीग और दूसरी फ्रेंचाइजी प्रतियोगिताओं में खेलने के ज्यादा मौके मिल सकें.
यानी मामला सिर्फ टेस्ट क्रिकेट से मोहभंग का नहीं है. क्रिकेटर अपने करियर, कमाई और खेलने के समय का हिसाब भी देख रहे हैं. यही वजह है कि टेस्ट क्रिकेट को बचाने की बहस अब खिलाड़ियों को कटघरे में खड़ा करने के बजाय पूरे क्रिकेट सिस्टम पर सवाल उठा रही है.
फ्रेंचाइजी क्रिकेट को भी खलनायक नहीं बना सकते
दिलचस्प बात यह है कि MCC फ्रेंचाइजी क्रिकेट को टेस्ट क्रिकेट का दुश्मन नहीं मानता. स्टीवर्ट ने माना कि फ्रेंचाइजी लीग ने विश्व क्रिकेट की अर्थव्यवस्था को बदल दिया है. खास तौर पर IPL ने क्रिकेट की वित्तीय तस्वीर पर बड़ा असर डाला है और दुनिया की कई लीगों को इससे आर्थिक फायदा मिला है.
उनका मानना है कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट को अप्रत्यक्ष रूप से फंड करने में भी मदद करता है. इसलिए समाधान यह नहीं हो सकता कि टी20 लीग को रोक दिया जाए. जरूरत इस बात की है कि क्रिकेट का ऐसा कार्यक्रम तैयार किया जाए जिसमें दोनों फॉर्मेट साथ चल सकें.
IPL ने खिलाड़ियों को करीब भी लाया
स्टीवर्ट ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट का एक और फायदा गिनाया. उनके मुताबिक पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी मैदान पर सिर्फ विरोधी के रूप में मिलते थे.अब वे दुनिया भर की लीगों में एक ही टीम के लिए खेलते हैं.
इससे खिलाड़ियों के बीच व्यक्तिगत रिश्ते और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ा है. विराट कोहली और स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आमने-सामने होते हैं, लेकिन फ्रेंचाइजी क्रिकेट में एक साथ ड्रेसिंग रूम भी साझा करते हैं.
यानी जिस फ्रेंचाइजी क्रिकेट को टेस्ट के लिए खतरा माना जा रहा है, उसके कुछ सकारात्मक असर भी हैं. असली चुनौती दोनों के बीच संतुलन बनाने की है.
पिंक बॉल से टेस्ट को नया जीवन?
टेस्ट क्रिकेट को आकर्षक बनाए रखने के लिए ICC ने दिन के टेस्ट में पिंक बॉल के इस्तेमाल को ट्रायल के तौर पर मंजूरी दी है. स्टीवर्ट ने इस फैसले का स्वागत किया. उनका मानना है कि अगर दिन के आखिरी हिस्से में खराब रोशनी के कारण खेल रुकता है तो पिंक बॉल एक समाधान हो सकती है.
भारत-ऑस्ट्रेलिया जैसी द्विपक्षीय सीरीज में दोनों टीमें किसी खास टेस्ट के लिए पिंक बॉल का इस्तेमाल करने पर सहमत हो सकती हैं. इसका फायदा यह होगा कि खराब रोशनी के कारण खेल के ओवर कम होने की समस्या घट सकती है और दर्शकों को ज्यादा क्रिकेट देखने को मिल सकता है.
स्टीवर्ट के मुताबिक टेस्ट क्रिकेट में जितना ज्यादा खेल होगा और जितने ज्यादा लोग उसे देख पाएंगे, उतना ही इस फॉर्मेट के लिए अच्छा होगा.
समय बर्बाद किया तो अब जेब पर पड़ेगा असर
MCC प्रमुख ने टेस्ट क्रिकेट में समय बर्बाद करने की समस्या पर भी सख्ती का समर्थन किया. खासकर टेस्ट के आखिरी घंटे में बल्लेबाजों की ओर से जानबूझकर समय लेने की प्रवृत्ति पर अब कार्रवाई का प्रावधान मजबूत किया गया है.
1 अक्टूबर से लागू ICC के नए नियमों के तहत समय बर्बाद करने पर पहली और दूसरी गलती के लिए चेतावनी दी जाएगी. तीसरी बार वही गलती दोहराने पर फील्डिंग टीम को 5 रन की पेनल्टी मिलेगी.
स्टीवर्ट ने कहा कि नियम पहले भी मौजूद था, लेकिन अब उसे मैदान पर लागू करने की जरूरत है. उनका मानना है कि दर्शक टिकट के लिए पैसा खर्च करते हैं और अगर खेल में अनावश्यक देरी होती है तो उन्हें लगता है कि उन्हें पूरा क्रिकेट नहीं मिला.
यही टेस्ट क्रिकेट की मौजूदा कहानी है- एक तरफ खिलाड़ी के सामने फ्रेंचाइजी क्रिकेट की मोटी कमाई है, दूसरी तरफ टेस्ट के सामने दर्शकों, समय और आधुनिक क्रिकेट कैलेंडर की चुनौती. MCC का संदेश साफ है- फ्रेंचाइजी क्रिकेट को रोकना समाधान नहीं, बल्कि ऐसा रास्ता निकालना होगा जिसमें खिलाड़ी भी कमाएं और टेस्ट क्रिकेट भी अपने सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों को खोए नहीं.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क