फर्स्ट क्लास करियर के आगाज पर नौ विकेट, टेस्ट डेब्यू पर धमाल फिर दलीप ट्रॉफी में एक पारी के सभी 10 विकेट... ये गेंदबाज जब बॉलिंग करता था तो विपक्षी बल्लेबाज कांप उठते थे. फिर भी इस गेंदबाज के हिस्से में सिर्फ दो टेस्ट आए. रिकॉर्ड और काबिलियत किसी कमी की कहानी नहीं कहते, लेकिन इंटरनेशनल करियर के आंकड़े जरूर एक अधूरी कहानी का एहसास कराते हैं. ये कहानी है भारत के पूर्व तेज गेंदबाज देबाशीष मोहंती की.
नवंबर 1996 में ईडन गार्डन्स पर बंगाल के खिलाफ मोहंती ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा. पहली पारी में उन्होंने 5/52 का आंकड़ा दर्ज किया और मैच में कुल नौ विकेट लेकर सनसनी मचा दी. घरेलू क्रिकेट में उनका आगाज इतना प्रभावशाली था कि कुछ ही महीनों बाद उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिल गई.
अगस्त 1997 में कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में श्रीलंका के खिलाफ देबाशीष मोहंती ने टेस्ट डेब्यू किया. सामने सनथ जयसूर्या, रोशन महानामा, अर्जुन रणतुंगा और अरविंदा डी सिल्वा जैसे बल्लेबाज थे. मोहंती ने चारों को अपना शिकार बनाया और 4/78 के आंकड़े के साथ शानदार शुरुआत की. लेकिन यही उनके टेस्ट करियर का पहला और आखिरी बड़ा स्पैल साबित हुआ. मोहाली में श्रीलंका के खिलाफ दूसरा टेस्ट खेलने के बाद उन्हें फिर कभी टेस्ट टीम में मौका नहीं मिला. दो टेस्ट में उनके नाम सिर्फ चार विकेट रहे.
..जब पाकिस्तान के खिलाफ किया कमाल
वनडे क्रिकेट में देबाशीष मोहंती को ज्यादा मौके मिले. सितंबर 1997 में टोरंटो में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने डेब्यू किया. ओडीआई डेब्यू पर तो मोहंती सिर्फ एक विकेट ले पाए, लेकिन अगले ही मैच में उन्होंने तीन विकेट लेकर कमाल कर दिया. उन्होंने शाहिद आफरीदी, सईद अनवर और इजाज अहमद जैसे बल्लेबाजों को आउट किया. नई गेंद को स्विंग कराने की क्षमता और उनका अलग अंदाज उन्हें बल्लेबाजों के लिए मुश्किल बनाता था.
1999 वर्ल्ड कप से पहले मोहंती भारतीय टीम की पहली पसंद नहीं थे. मगर इंग्लैंड की परिस्थितियों में स्विंग गेंदबाज की उपयोगिता को देखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया गया. उन्होंने टूर्नामेंट में छह मैच खेले और 10 विकेट हासिल किए. भारत की ओर से सिर्फ जवागल श्रीनाथ उनसे आगे रहे, जिन्होंने 12 विकेट लिए थे. केन्या के खिलाफ मोहंती ने 4/56 का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन में उन्होंने एलेक स्टीवर्ट और ग्राहम हिक को लगातार गेंदों पर आउट कर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई. भारत ने वह मुकाबला 63 रनों से जीता और सुपर सिक्स में पहुंचा.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने स्टीव वॉ का महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किया. दाएं हाथ के तेज गेंदबाज देबाशीष मोहंती की पहचान उनके अनोखे गेंदबाजी एक्शन से भी थी. 1999 वर्ल्ड कप के आधिकारिक लोगो में दिखने वाले गेंदबाज की आकृति को उनकी शैली से प्रेरित बताया गया था. 1999 में उन्होंने 17 वनडे इंटरनेशनल मैचो में 29 विकेट लिए, जो उनके शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है.
फिर आया वो ऐतिहासिक पल
देबाशीष मोहंती के करियर का सबसे बड़ा व्यक्तिगत कारनामा जनवरी 2001 में दलीप ट्रॉफी में आया. अगरतला में ईस्ट जोन के सामने साउथ जोन की टीम थी, जिसकी बल्लेबाजी यूनिट में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे नाम मौजूद थे. मोहंती ने 19 ओवर की गेंदबाजी में 46 रन देकर सभी 10 विकेट चटका दिए. द्रविड़ खाता नहीं खोल सके, जबकि लक्ष्मण 20 रन पर बोल्ड हुए. साउथ जोन की पूरी टीम 113 रन पर सिमट गई. फिर दूसरी पारी में उन्होंने चार और विकेट लिए. यानी मैच में कुल 14 विकेट पूरे किए.
सबसे हैरानी वाली बात यह है कि दलीप ट्रॉफी में इस ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के कुछ ही महीनों बाद देबाशीष मोहंती ने भारत के लिए अपना आखिरी ओडीआई खेला. जुलाई 2001 के बाद उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली. घरेलू क्रिकेट में उन्होंने हालांकि लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन जारी रखा. उन्होंने 117 फर्स्ट क्लास मैचों में 417 विकेट झटके. लिस्ट-ए क्रिकेट में भी उन्होंने शानदार खेल दिखाया और 129 मैचों में 160 विकेट लिए.
भारत के लिए देबाशीष मोहंती का अंतरराष्ट्रीय करियर 47 मैचों तक सीमित रहा, जिसमें दो टेस्ट और 45 ओडीआई शामिल थे. उनके नाम 61 इंटरनेशनल विकेट रहे. लेकिन उनके घरेलू रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय मौकों के बीच का अंतर उनकी कहानी को खास बनाता है. एक तरफ 417 फर्स्ट क्लास विकेट, वर्ल्ड कप में 10 विकेट और दलीप ट्रॉफी की एक पारी में 10 विकेट, दूसरी तरफ टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ दो मुकाबले. क्रिकेट से संन्यास के बाद मोहंती ने कोचिंग और चयन की जिम्मेदारियां संभालीं. 2012 में उन्होंने ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी जिताने में भूमिका निभाई. इसके बाद वह BCCI (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) की जूनियर चयन समिति और फिर सीनियर पुरुष चयन समिति का भी हिस्सा बने.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क